Fri Sep 11, 2026 | 10:46 PM IST

कुछ बच्चे देर से क्यों बोलते हैं? जानें इसके 9 कारण और जल्दी बुलवाने के खास तरीके

कई बार कुछ बच्चे देर से बोलन शुरू करते हैं, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जानें बच्चों को देर से बोलने से बचाव करने के टिप्स के बारे में।  

कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चे कम उम्र में ही कुछ शब्दों का उच्चारण सीख जाते हैं वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बोलने में काफी समय लेते हैं। जब बच्चे देरी से बोलना सीखते हैं तो ऐसे में माता-पिता इसको लेकर चिंतित हो जाते हैं। सामान्य रूप से एक साल के बाद बच्चे कुछ न कुछ बोलना शुरू कर देते हैं। आपको बता दें कि हर बच्चे का शारीरिक विकास अलग तरह से होता है इसलिए कुछ बच्चे समय पर बोलना सीख जाते हैं वहीं कुछ देर से बोलना शुरू करते हैं। बच्चों के देर से बोलना शुरू करने के पीछे कई कारण होते हैं। विज्ञान के मुताबिक बच्चे अपनी मां के हावभाव और उनके होंठों को देखकर अपनी प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते हैं। जब बच्चों को सामने ताली बजाकर या तेजी से उनका नाम पुकारा जाता है तो वे तुरंत उस तरफ देखने लगते हैं। आइये जानते हैं बच्चों के देर से बोलना शुरू करने के कारण, लक्षण और जल्दी बुलवाने के खास तरीके के बारे में।

बच्चों के देर से बोलने के कारण (Late Talking Children Causes)

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(image source - freepik.com)

बच्चों का देर से बोलना कई समस्याओं के कारण हो सकता है। इसके पीछे जन्म, स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां, आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार माने जाते हैं। बच्चों के उचित विकास के लिए यह जरूरी है कि उनकी सुनने और बोलने की क्षमता ठीक हो। ऐसे में जब बच्चे सही समय पर बोलना शुरू नहीं करते हैं तो माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित हो जाते हैं। बच्चों के देर से बोलना शुरू करने के कई कारण हो सकते हैं जो इस प्रकार से हैं।

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1. बच्चों का देर से रोना शुरू करना।

2. गर्भावस्था के समय मां के जॉन्डिस से ग्रस्त होने की वजह से।

3. जन्म के समय बच्चे के मस्तिष्क पर चोट लगने की वजह से।

4. समय से पहले बच्चे के जन्म होने की वजह से।

5. बच्चों में सुनने से जुड़ी समस्या होने के कारण।

6. कान में संक्रमण होने की वजह से।

7. तालू में दिक्कत होने की वजह से।

8. बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी होने पर।

9. बोलने से जुड़ी समस्या का आनुवंशिक होना।

बच्चों के देर से बोलने की समस्या के उपाय (Late Talking Children Prevention)

कई कारणों से बच्चे देर से बोलना शुरू करते हैं। बच्चों के देर से बोलने की समस्या से बचने के लिए आप कुछ उपायों को अपना सकते हैं। बच्चे के मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने का सबसे अच्छा तरीका है उससे बात करना। आप जितने अधिक शब्द कहेंगे, उतने अधिक शब्द बच्चे के मस्तिष्क को समझने और समझने की कोशिश करेंगे। इससे उसका मस्तिष्क जुड़ा रहेगा और उसकी शब्दावली बढ़ेगी। वहीं ये गर्भ से ही शुरू हो जाता है। पैदा होने के बाद आप अपने बच्चे को टहलाने ले जाकर बात करने में मदद करें और उसे आस पास होती चीजों के बारे में बताएं। अगर वे आपके सिर को हिलाकर या अपनी बाहों को हिलाकर या आपकी ओर इशारा करके आपकी प्रतिक्रिया का जवाब देते हैं, तो उन्हें और बोलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। बच्चों के माता-पिता को परवरिश के दौरान हमेशा इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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  • बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं, उन्हें बोलने के लिए ट्रेन करें।
  • बच्चों से बार-बार बात करने की कोशिश करें।
  • बच्चे जो शब्द बोलें उन्हें दोहराएं।
  • बच्चों के सामने तेज आवाज करके किताब पढ़ें।
  • बच्चों को अधिक टीवी देखने न दें।
  • बच्चों को कुछ चीजें रटायें और उसे दोहराने में उसकी मदद करें।

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ऊपर बताई गयी बातों का ध्यान रखने से आप अपने बच्चे को देर से बोलने की समस्या से बचा सकते हैं। अधिकांश बच्चे 11 से 14 महीने की उम्र के बीच अपने पहले शब्दों को बोलने की कोशिश करने लगते हैं। वहीं 16 महीने तक, एक बच्चे को एक दिन में 40 शब्द बोलना शुरू कर देना चाहिए। जैसा कि बच्चा हर दिन नए शब्दों को सुनता रहता है, तो धीरे-धीरे उसके शब्दावली बढ़ने लगते हैं। अपने तीसरे जन्मदिन तक आते-आते, एक बच्चे को जटिल वाक्यों की समझ बनाने और उनके साथ होने वाली बातचीत पर पकड़ बनाने में सक्षम होना जाना चाहिए। वहीं अगर बच्चे में बोलने का विकास अगर धीमी गति से हो रहा है, तो मां-बाप को उस पर खास ध्यान देना चाहिए। वहीं एक अभिभावक के रूप में, आप अपने बच्चे को तेजी से बात करने में भी मदद कर सकते हैं।

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जागरण न्यू मीडिया में (Only MyHealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रहे प्रिंस को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 5 सालों से अधिक काम करने का अनुभव है। बतौर पत्रकार प्रिंस ने त्रिपुरा, नागालैंड सही पूर्वोत्तर के राज्यों में राजनीति, महिला सुरक्षा और हेल्थ जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग भी की है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ रखने वाले प्रिंस ने देश के विभिन्न राज्यों में चुनावी कवरेज भी की है। प्रिंस को हेल्थ, पब्लिक पॉलिसी, राजनीति, क्राइम, फैक्ट चेक और डेटा स्टोरी समेत कई विषयों पर रिपोर्टिंग और लिखने की अच्छी समझ है। प्रिंस ने कमला नेहरु संस्थान से ग्रेजुएशन और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है।

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    Oct 27, 2021 00:00 IST

    Published By : Prins Bahadur Singh

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