Tue Oct 27, 2026 | 03:37 AM IST

Doctor Verified

क्‍या शिशुओं का कराहना या घुरघुराना सामान्य है? जानें इसके कारण और घरेलू उपचार

शिशु का कराहना या घुरघुराना एक सामान्‍य प्रक्रिया है, जो उसके स्वास्थ्य को दर्शाता है। इसके कई कारण और संकेत हो सकते हैं।
क्‍या शिशुओं का कराहना या घुरघुराना सामान्य है? जानें इसके कारण और घरेलू उपचारक्‍या शिशुओं का कराहना या घुरघुराना सामान्य है? जानें इसके कारण और घरेलू उपचार

क्या आपने कभी नोटिस किया है कि छोटे बच्चे अक्सर लेटे-लेटे कराहने या घुरघुराने की आवाज निकालते हैं? ये कराह क्या सामान्य बात है? शिशुओं का कराहना एक सामान्‍य प्रक्रिया है, जो तनाव का संकेत देता है। खासकर जब वे स्‍टूल पास करने की कोशिश करते हैं। बच्‍चे तनाव को दूर करने, जलन या निराशा दिखाने और पेरेंट्स का ध्‍यान आकर्षित करने के लिए कराह सकते हैं। कई बार खाने में बदलाव के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश करते समय भी बच्‍चे कराह सकते हैं। हालांकि शिशुओं का कराहना सामान्‍य है लेकिन कुछ मामलों में कराहना एक संकेत है, जो बच्‍चों की आंतरिक परेशानी को दर्शाता है। शिशुओं का कराहना उनकी अलग-अलग समस्‍याओं के बारे में संकेत देता है जैसे कि मल त्याग के समय परेशानी या ब्रेस्टफीडिंग के समय ओवर सप्लाई की परेशानी आदि। आइए जानते हैं विस्तार से।

क्‍या शिशुओं का कराहना सामान्‍य है?

क्लाउडनाइन हॉस्पिटल, गुड़गांव और एपेक्स क्लीनिक की सीनियर कंसलटेंट गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर रितु सेठी बताती हैं कि पहले वर्ष के अंत तक शिशुओं का कराहना कम्‍युनिकेशन का जरिया माना जा सकता है। यानी कि मां और बच्चे के बीच में आपसी बॉन्डिंग का एक तरीका। सामान्‍य तौर पर इसे ग्रन्टिंग बेबी सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। कई बार मल पास करते समय भी बच्‍चे इस प्रकार की आवाज करना पसंद करते हैं। कुछ मामलों में आवाज आंतरिक समस्‍या का संकेत हो सकती है इसलिए ध्यान करना जरूरी है, जिसके लिए मेडिकल हेल्‍प की आवश्‍यकता पड़ सकती है। बच्‍चे के जन्‍म के साथ ही कराहने की आवाज शुरू हो जाती है। 

इसे भी पढ़ें- कहीं आप भी शिशु की इन 9 अजीब हरकतों से हैरान-परेशान तो नहीं, जानें किन बातों का इशारा हैं शिशु के ये संकेत

शिशु के कराहने के कारण

मल त्‍यागना

मल त्‍यागने के दौरान नवजात शिशु का कराहना अविकसित पेट की मांसपेशियों के कारण होता है जिसमें शिशु स्‍टूल पास करते समय प्रेशर लगाता है। आवाज निकालने का मतलब ये नहीं कि बच्‍चे को कब्‍ज है। ये एक सामान्‍य प्रक्रिया है जो सभी बच्चे करते हैं।

कम्युनिकेशन के लिए 

नवजात शिशु बोलना नहीं जानते हैं इसलिए कम्‍युनिकेशन के लिए तरह-तर‍ह की आवाजें निकालते हैं। सेल्‍फ इंटरटेनमेंट के लिए शिशु चीखते हैं, गुरगल्‍स करते हैं और हंसने के साथ कराहते हैं। ऐसी आवाजों से शिशु आपका ध्‍यान आकर्षित करने का प्रयास करते हैं। 

grunting baby in hindigrunting baby in hindi

ब्रीदिंग 

कराहना जम्‍हाई और आहें भरने के समान ही प्रभावशाली हो सकता है, जो लंग्‍स को ऑक्‍सीजन से भर देता है। गौरतलब है कि जब कभी बच्‍चा नींद में कराहता है तो उसके तुरंत बाद गहरी सांसें लेता है।  

इसे भी पढ़ें- इन 5 स्थितियों में नवजात शिशु को डॉक्टर के पास ले जाना है जरूरी, असावधानी से बढ़ सकती है परेशानी

ब्रेस्‍टफीडिंग 

दूध पीते वक्‍त अधिकतर बच्‍चे कराहते हैं। कई बार दूध की ओवर सप्‍लाई की वजह से भी हो सकता है। जब शिशु दूध का अधिक सेवन करता है तो उसे पाचन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मुंह में अधिक दूध की वजह से बच्‍चा हवा में सांस लेता है जिस वजह से कराहने की आवाज निकल सकती है। 

शिशु का कराहना रोकने के लिए घरेलू उपचार

  • स्‍टूल पास करते वक्‍त शिशु के पेट पर हाथ फेरे या हिप और पैरों को थोड़ा मोड़ें। 
  • शिशु को फीड कराते वक्‍त उसके सिर और गले को सपोर्ट दें, ताकि वे निप्‍पल से ऊपर की ओर रहे। इससे मुं‍ह में भरा एक्‍स्‍ट्रा दूध आसानी से बाहर निकल सकता है।
  • शिशु के स्‍वास्‍थ को ध्‍यान में रखते हुए छोटे-छोटे मील दें। फीड के बाद बच्‍चे को डकार दिलाना न भूलें। 
  • सोते समय यदि शिशु अधिक कराहने की आवाज निकालते हैं, तो उसकी पोजिशन को बदल दें। इससे उसे गैस पास करने में आसानी होगी जिससे डाइजेस्टिव सिस्‍टम में सुधार होगा।

Read Next

→ बच्चे की आंख में गुहेरी (स्टाई) होने पर आजमाएं ये 3 घरेलू उपाय, जानें बचाव के टिप्स

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Nov 20, 2022 16:00 IST

    Published By : Monika Agarwal