प्रेग्नेंसी के दौरान खतरनाक है पैरासिटामॉल लेना, शिशु को मानसिक बीमारियों का खतरा: अध्ययन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 27, 2018

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का विेशेष ख्याल रखना पड़ता है। इस दौरान महिलाओं के के खान-पान से लेकर शारीरिक गतिविधि तक, हर चीज का असर होने वाले शिशु पर पड़ता है। प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाएं कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से गुजरती हैं। बुखार, उल्टी, सिरदर्द, शरीर दर्द, मितली और चक्कर आने जैसी समस्याएं इस दौरान आम हैं। कई महिलाएं दर्द या बुखार होने पर पैरासिटामॉल का प्रयोग करती हैं। मगर हाल में हुए एक शोध में ये बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामॉल का प्रयोग घातक हो सकता है।

1.5 लाख महिलाओं और बच्चों पर हुआ शोध

हार्वर्ड और दुनिया की कई अन्य बड़ी यूनिवर्सिटीज पिछले कई सालों से इस विषय में अध्ययन कर रही हैं। लगभग 1.5 लाख महिलाओं और बच्चों पर हुए तामाम शोधों के बाद ये निष्कर्ष निकाला गया कि पैरासिटामॉल के सेवन से महिलाओं के गर्भाशय में हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके साथ ही वे महिलाएं जो प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामॉल का सेवन करती हैं, उनके शिशु का आईक्यू लेवल भी सामान्य से कम होने का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल गर्भावस्था के दौरान होने वाला हार्मोनल असंतुलन होने वाले शिशु के मानसिक विकास में बाधा बनता है इसलिए ऐसे बच्चों में ऑटिज्म और ADHD जैसी मानसिक बीमारियों का भी खतरा ज्यादा रहता है। अनुसंधानकर्ताओं द्वारा खोजे गए ये नतीजे 'हॉर्मोन्स एंड बिहेवियर' नामक जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।

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गर्भाशय पर पड़ता है असर

इसके पूर्व स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में बताया गया था कि पैरासिटामॉल का प्रभाव गर्भाशय पर पड़ता है और इस दवा के चलते महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान बनने वाले अंडे बहुत कम हो जाते हैं। जिसके चलते उन्हें गर्भधारण करने में मुश्किल भी आ सकती है और जल्दी रजोनिवृत्ति भी हो सकती है।

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हार्मोन्स हो जाते हैं असंतुलित

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पैरासीटामॉल व आईब्यूफेन हार्मोन प्रोस्टैग्लैडिन ई2 के स्राव में हस्तक्षेप करते हैं। यह हार्मोन भ्रूण के प्रजजन तंत्र के विकास में अहम भूमिका निभाता है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिचर्ड शार्पे ने कहा, 'यह शोध पैरासीटामॉल या आईब्यूफेन लेने के संभावित खतरों को बताता है। हालांकि, हमें इसके सही असर के बारे में नहीं पता है कि यह मानव स्वास्थ्य पर क्या असर डालता है या इसकी कितनी मात्रा प्रजनन क्षमता पर असर डालती है।'

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