बॉडी शेमिंग: क्या आपके बच्चे को भी लोग उसके लुक और बॉडी के लिए चिढ़ाते हैं? ऐसे सिखाएं उन्हें डील करना

अगर आपके बच्चे को भी लोग उसके रंग, रूप या शारीरिक बनावट के लिए चिढ़ाते हैं, तो इन तरीकों से आप उसे इस स्थिति से डील करना सिखा सकते हैं।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jul 02, 2022Updated at: Jul 02, 2022
बॉडी शेमिंग: क्या आपके बच्चे को भी लोग उसके लुक और बॉडी के लिए चिढ़ाते हैं? ऐसे सिखाएं उन्हें डील करना

बॉडी शेमिंग का अर्थ है किसी की शारीरिक बनावट, रंग, रूप, लंबाई, वजन आदि के आधार पर उसका मजाक बनाना। किसी भी सभ्य समाज में बॉडी शेमिंग की जगह नहीं होनी चाहिए, लेकिन अफसोस! कि हर समाज और हर समुदाय में इस तरह की चीजें सदियों से चली आ रही हैं। आप भी अपने आसपास लोगों को छोटू, लंबू, कालिया, मोटू, पतलू आदि कहकर दूसरों को चिढ़ाते हुए जरूर सुनते होंगे। बड़े तो कई बार इन कमेंट्स को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बच्चों के मन पर ऐसे बॉडी शेमिंग के कमेंट्स बुरा असर डालते हैं। कई बार तो बच्चों को घर-परिवार में ही ऐसे कमेंट्स का सामना करना पड़ता है। अगर आपके बच्चे को भी दूसरे बच्चे या लोग उसके लुक, कलर या बॉडी शेप के लिए चिढ़ाते हैं और वो आपको इस बारे में बताता है, तो इन तरीकों से आप अपने बच्चे को इस स्थिति से डील करना सिखा सकते हैं।

body shaming in kids

1. बच्चे से बात करें

इस स्थिति को संभालने का सबसे पहला स्टेप यही है कि आप बच्चे से बात करें और उसमें उसके लुक्स के प्रति कॉन्फिडेंस जगाएं। बच्चे को समझाएं कि दुनिया में हर इंसान एक-दूसरे से अलग है और अलग होना ही उन्हें खास बनाता है। बच्चों को बचपन से ही सिखाएं कि अपने रंग, रूप, बनावट, मोटाई, लंबाई आदि को स्वीकार करें और किसी के कमेंट से अपने कॉन्फिडेंस को कम न होने दें।

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2. बच्चे को दूसरों का सम्मान करना सिखाएं

अक्सर बच्चे बॉडी शेमिंग के कमेंट पर जवाब के रूप में सामने वाले पर भी वैसा ही कमेंट कर देते हैं। अपने बच्चे को बताएं कि इस तरह कमेंट करके वो भी दूसरों का मजाक उड़ाने का ही काम कर रहे हैं। इसलिए उन्हें अपने आप में कॉन्फिडेंट रहना चाहिए और दूसरों का भी सम्मान करना चाहिए। बच्चे को यह भी समझाएं कि स्किन का रंग, लंबाई, चौड़ाई और अंगों की बनावट आदि प्रकृति तय करती है न कि कोई इंसान।

3. बच्चे को उसकी यूनीक क्वालिटीज बताएं

बच्चे को उसकी उन क्षमताओं के बारे में बताएं, जो उसमें दूसरों से अलग है। हर बच्चे में कुछ न कुछ यूनीक जरूर होता है। अपने बच्चे की उस यूनीक स्किल को समझें और उस स्किल के जरिए उनमें कॉन्फिडेंस भरें, ताकि वो दूसरों के कमेंट्स या बुली करने से घबराने के बजाय अपने अंदर पॉजिटिव एनर्जी महसूस कर सके। 

4. बच्चे को खुद की तारीफ करना सिखाएं

दुनिया में कोई भी मोटिवेशनल स्पीकर आपको उतना मोटिवेट नहीं कर सकता, जितना आप स्वयं को कर सकते हैं। यह सिद्धांत सभी पर लागू होता है। इसलिए बच्चों को खुद की तारीफ करना सिखाएं। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा अपने लुक्स या बॉडी को लेकर ज्यादा कॉन्शियस है, तो उसकी तारीफ करें और उसे खुद की तारीफ करना सिखाएं। लेकिन ध्यान रहे कि खुद की तारीफ करते हुए कहीं बच्चा दूसरों का मजाक न बनाना शुरू कर दे। अगर बच्चे की हाइट छोटी है, तो उसे छोटी हाइट वाले महान लोगों के बारे में बताएं और समझाएं कि लंबाई का जीवन की सफलता से कोई लेना-देना नहीं। इसी तरह रंग, वजन, विकलांगता आदि की चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ने वाले लोगों की भी हजारों कहानियां मौजूद हैं।

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5. बच्चे को हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए प्रेरित करें

अगर बच्चे की समस्या लाइफस्टाइल में बदलाव से ठीक हो सकती है, तो ऐसे कमेंट्स को पॉजिटिव दिशा देते हुए आप उन्हें हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जैसे- बच्चे के वजन या लंबाई को लेकर किए गए कमेंट के बाद आप उन्हें वजन घटाने, हेल्दी खाने और एक्सरसाइज करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी आपको उन्हें खुद को एक्सेप्ट करना और दूसरों का सम्मान करना जरूर सिखाना चाहिए।

इस तरह आप बॉडी शेमिंग और फैट शेमिंग से अपने बच्चे को लड़ना सिखा सकते हैं। ये आदतें पूरे जीवन बच्चे के बहुत काम आने वाली हैं।

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