दूसरों की पसंद और नापसंद को खुद पर न होने दें हावी, जानें डिप्रेशिंग थॉट्स से बाहर निकलने का आसान तरीका

दिमाग में लगातार आ रहे डिप्रेशिंग थॉट्स से बाहर आना आसान नहीं है। पर कुछ ऐसे तरीके हैं जो मस्तिष्क के सोचने के ढ़ंग में बदलाव ला सकते हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Jun 30, 2020
दूसरों की पसंद और नापसंद को खुद पर न होने दें हावी, जानें डिप्रेशिंग थॉट्स से बाहर निकलने का आसान तरीका

अवसाद आपकी ऊर्जा को खत्म कर सकता है, जिससे आप खाली और थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इससे उपचार की तलाश करने की ताकत या इच्छा भी पूरी तरह से खत्म हो सकती है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि आप अपने दिमान और इनमें पैदा होते हुए विचारों पर रोक लगाएं। अगर आप विचारों पर रोक नहीं लगा पा रहें हैं, तो कम से कम अच्छा सोचें। पर ये कहने में जितना आसान है, असल में अवसाद में जा रहे व्यक्ति के लिए ये मुश्किल काम है। दरअसल अवसाद यानी कि डिप्रेशन में जा रहा व्यक्ति छोटी-छोटी बातों से परेशान होता है, उसे हर किसी की बात, पसंद और नापसंद सबसे फर्क पड़ता है। वो खुद के बारे में या खुद से जुड़े लोगों के विचारों के बारे में ज्यादा सोचता है और परेशान होता है। ऐसे में सबसे जरूरी चीज यही है कि आप खुद पर लोगों के विचारों को हावी न होने दें। इसके बाद कोशिश करें कि आप अपने डिप्रेशिंग थॉट्स (Depressive Thoughts) से बाहर निकलें।

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डिप्रेशिंग थॉट्स से बाहर निकलने का तरीका (way to get out of depression thoughts)

डिप्रेशिंग थॉट्स से परेशान हैं तो रचनात्मक रूप से थोड़ा सोचें

अपनी भावनाओं को दबाना अवसाद के नकारात्मक लक्षणों से निपटने के लिए एक रणनीतिक तरीके की तरह लग सकता है। लेकिन यह तकनीक अंततः अस्वस्थ है। ये आपको अंदर ही अंदर मार सकता है। अगर आप लॉ और निराश ज्यादा महसूस कर रहे हैं, तो भागे नहीं बल्कि अपने आप को भावनाओं को महसूस करने दें। बस इसमें थोड़ा सा बदलाव करें।आप जो भी अनुभव कर रहे हैं, उसके बारे में लिखने या जर्नल करने पर विचार करें। फिर, जब भावनाएं उठती हैं, तो उसके बारे में भी लिखें। आप महसूस करेंगे कि आप मन से खाली हो रहें हैं। फिर अपने लिखे हुए को पढ़े आपको समझ आएगा कि आप कहां गलत हैं और कहां सही। या फिर रहने दें। इस तरह आप खुद को हील कर सकते हैं।

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खुद को नई शुरुआत के लिए जोश से भरें

आज का मूड, भावनाएं, या विचार कल के लिए नहीं हैं। अगर आप महसूस कर रहे हैं कि आप अवसादग्रस्त हो रहे हैं, तो सोचें कि जो आप आज महसूस कर रहे हैं, वो कल नहीं होगा। अगर आज आप आज बिस्तर से उठने या अपने लक्ष्यों को पूरा करने में असफल थे, तो याद रखें कि आपने कल फिर से प्रयास करने का अवसर नहीं गवाया है। खुद को इसके लिए मनाएं कि कुछ दिन मुश्किल होंगे, वहीं कुछ दिन शानदार भी होंगे। कल की नई शुरुआत के लिए तत्पर रहें।

डिप्रेशनिंग थॉट्स जो आपसे कह रहे हैं उसका बिलकुल उल्टा करें

आपके सिर में नकारात्मक, तर्कहीन आवाज आपको सहायता या रास्ता दिखाने वाली महसूस हो सकती है पर ऐसा है नहीं। हालांकि, अगर आप इसे पहचानना सीख सकते हैं, तो आप इसे बदलना सीख सकते हैं। तर्क को हथियार की तरह इस्तेमाल करें। प्रत्येक विचार के उल्ट व्यक्तिगत रूप से काम करें। जैसे कि आत्महत्या जैसा मन हो तो दोस्त के पास जबरदस्ती चले जाएं। किसी से मिलने का मन न हो तो भीड़ वाली जगह में जाएं।

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लक्ष्य निर्धारित करें

एक लंबी-टू-डू सूची इतनी वजनदार हो सकती है कि आप कुछ भी नहीं करते हैं। कार्यों की एक लंबी सूची को संकलित करने के बजाय, एक या दो छोटे लक्ष्य निर्धारित करने पर विचार करें। आपको बहुत ज्यादा नहीं करना है, पर इतना करना है कि आप बिजी रहें और खुश रहें। उदाहरण के लिए:

  • -घर को साफ मत करो, बस कचरा बहार निकाल दो।
  • -सभी कपड़े धोने का काम न करें बस कपड़े छांट कर अलग कर लें।
  • -अपना संपूर्ण ईमेल इनबॉक्स साफ न करें और संवेदनशील संदेशों को रखें और खुश हो जाएं।
  • -पुरानी तस्वीरों को देखें और लोगों से बात करें।

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