आपके सोने का तरीका बताता है आपकी मानसिक सेहत का हाल, जानें 5 स्लीपिंग पैटर्न और इनका मेंटल हेल्थ पर प्रभाव

रोजाना अच्छी नींद लेने से आप कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं, इन 5 स्लीपिंग पैटर्न से जानें अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Sep 22, 2021
आपके सोने का तरीका बताता है आपकी मानसिक सेहत का हाल, जानें 5 स्लीपिंग पैटर्न और इनका मेंटल हेल्थ पर प्रभाव

इंसान को स्वस्थ रहने के लिए जितना जरूरी अच्छा भोजन और व्यायाम है उतनी ही जरूरी नींद भी है। नियमित रूप से पर्याप्त नींद न लेने का असर आपके सेहत पर पड़ता है। जो लोग सही ढंग से पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं उन्हें इसकी वजह से कई तरह की मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। आज के समय में असंतुलित भोजन और आधुनिक जीवनशैली के कारण एक तिहाई लोग नींद से जुड़ी समस्याओं के शिकार हैं। नींद न पूरी होने का सबसे बड़ा कारण अब मोबाइल फोन और इंटरनेट भी बन रहा है। एक अध्ययन की मानें तो आज के समय में सोने से पहले या सोते वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की वजह से तमाम लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। सही ढंग से नींद न लेना आपकी मानसिक सेहत पर भारी पड़ सकता है। नींद न पूरी होने पर आपको कई तरह की मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। नींद के पैटर्न यानी सोने के तरीके से आप अपनी मानसिक सेहत के बारे में जान सकते हैं। आइये विस्तार से जानते हैं स्लीप पैटर्न से मानसिक सेहत के राज।

इन 5 स्लीपिंग पैटर्न (नींद लेने की आदत) से जानें मानसिक सेहत का हाल (Sleep Pattern And Mental Health)

आपके सोने का आपकी मानसिक सेहत पर सीधा असर करता है। स्लीपिंग पैटर्न बिगड़ने पर आपको कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। आप जिस तरह से सोते हैं और सोते वक्त क्या-क्या एक्टिविटी होती है उसे ही स्लीपिंग पैटर्न कहा जाता है। इंसान दिन भर की थकान, स्ट्रेस, चिंता, एंग्जायटी और डिप्रेशन से गुजरने के बाद अच्छी नींद लेना चाहता है लेकिन सोचिए इतना सब कुछ झेल रहा व्यक्ति रात को अच्छी तरह से न सोये तो अगले दिन उठने पर उसका क्या हाल होगा। कोरोनावायरस महामारी के कारन हुए लॉकडाउन के बाद एक तो लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और नींद पर बुरा असर हुआ ही है लेकिन अब ये समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आपके सोने के तरीके यानी स्लीपिंग पैटर्न से आपकी मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ रहा है तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। आइये जानते हैं स्लीपिंग पैटर्न से मानसिक स्वास्थ्य का राज।

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1. जरूरत से ज्यादा सोना (Taking Too Much Sleep)

जरूरत से अधिक नींद लेना ही सेहत के लिए उसी तरह से हानिकारक माना जाता है जिस प्रकार कम नींद लेना। अगर आप भी दिन या रात में जरूरत से अधिक नींद लेते हैं या बहुत ज्यादा सोते हैं तो इसका एक प्रमुख कारण डिप्रेशन और स्ट्रेस भी हो सकता है। अमेरिका के सीडीसी द्वारा की गयी एक स्टडी के मुताबिक जरूरत से अधिक नींद लेना या बहुत ज्यादा सोना डिप्रेशन से जुड़ा हो सकता है। इसकी वजह से आपको कई हार्ट से जुड़ी समस्या और याददाश्त की दिक्कत हो सकती है। अगर आप बहुत ज्यादा नींद लेते हैं तो इसकी वजह से आप दिन भर थके हुए या बोझिल महसूस कर सकते हैं।

2. सोते समय खर्राटे मरना (Snoring)

बहुत से लोगों को सोते समय खर्राटे लेने की आदत होती है। यह समस्या सांस से जुड़ी दिक्कतों के कारण भी होती है। सोते समय खर्राटे मारने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कई लोगों को खर्राटे लेने की समस्या साइनस, एलर्जी, ठंड लगने की वजह से और वजन अधिक होने की वजह से भी हो सकता है। खर्राटे लेने से आपकी नींद सही ढंग से पूरी नहीं होती है। इसकी वजह से आपके शरीर को सही ढंग से आराम नहीं मिल पाता है। यह समस्या आपकी मानसिक सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। नींद न पूरी होने और शरीर को ठीक ढंग से आराम न मिलने के कारण आपको कई तरह की मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। अगर आप सोते वक्त बहुत ज्यादा खर्राटे लेते हैं तो आपको डॉक्टर से इस समस्या का इलाज जरूर कराना चाहिए।

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3. गहरी नींद में सोना (Deep Sleep)

आपने ऐसे बहुत से लोगों को देखा होगा जो बहुत गहरी नींद लेते हैं। हमारे देश में बहुत गहरी नींद में सोने को लेकर एक कहावत भी काफी प्रचलित है ' घोड़े बेचकर सोना'। घोड़े बेचकर सोना का मतलब है कि आप बहुत गहरी नींद में सुकून के साथ सो रहे हैं। ऐसे लोग जिन्हें रात के समय बहुत गहरी नींद आती है उन्हें इसका बहुत फायदा मिलता है। गहरी नींद लेने से उनके शरीर को पर्याप्त आराम भी मिलता है और इसे डॉक्टर्स एक अच्छी आदत मानते हैं। गहरी नींद लेने वाले लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।

4. कच्ची नींद में सोना (Not Getting Good Sleep)

कच्ची नींद का मतलब यह है कि आप सोते समय गहरी या अच्छी नींद में नहीं है। इस स्थिति में आपकी नींद हल्की सी आवाज से या सोते समय आपके पास कोई एक्टिविटी होने से खुल सकती है। इस तरह की नींद लेने वाले लोग अक्सर रात में नींद के बीच कई बार जाग जाते हैं। कच्ची नींद के सबसे बड़े दो कारण माने जाते हैं, पहला स्ट्रेस और दूसरा एंग्जायटी। इसकी वजह से आपकी नींद नहीं पूरी हो पाती है और आप हमेशा कच्ची नींद में सोते हैं। इसी वजह से आपके शरीर की थकान तो दूर हो जाती है लेकिन आप दिन भर बोझिल और बार-बार झपकी लेने जैसा महसूस कर सकते हैं। अगर आपको यह समस्या काफी दिनों से हो रही है तो एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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5. नींद के दौरान बार-बार करवट बदलना (Changing Position During Sleep)

नींद के दौरान बार-बार करवट बदलने की आदत को अच्छा नहीं माना जाता है। जो लोग नींद के दौरान बार-बार करवटें बदलते रहते हैं या नींद में बार-बार अपनी पोजीशन को बदलते रहते हैं उन्हें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। इसे अनकम्फर्टेबल पोजीशन में सोना भी कहते हैं। इस तरह की नींद के दौरान आपके दिमाग का आधा हिस्सा एक्टिव रहता है। नींद के दौरान बार-बार करवट बदलते रहना मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का संकेत है। इसकी वजह से भी आपको कई समस्याएं हो सकती हैं। 

अच्छी नींद लेने के टिप्स (Tips For Getting A Good Night's Sleep)

अच्छी नींद पाने के लिए आपको अपनी दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देना होगा। नींद से जुड़ी ज्यादातर समस्या खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से होती है। अच्छी नींद पाने के लिए आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं।

  • रात में सोने का एक समय निर्धारित करें और हमेशा उसी समय पर सोएं।
  • दोपहर के बाद कभी भी बीच में सोने से बचें।
  • कैफीन और शराब का सेवन न करें।
  • स्मोकिंग करने से बचें।
  • दिन में खुद को हाइड्रेटेड रखें।
  • स्वस्थ और संतुलित भोजन का सेवन करें।
  • स्लीपिंग एनवायरनमेंट अच्छा होना चाहिए।
  • सोने से पहले टीवी, फोन से दूरी बनाएं।

इन आदतों को अपनाकर आप अपनी नींद और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। आपकी नींद का मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। तमाम एक्सपर्ट्स और शोध के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 6 से 7 घंटे की अच्छी नींद की आवश्यकता होती है। आप भी रोजाना 6 से 7 घंटे की अच्छी नींद लेने का प्रयास जरूर करें। नींद और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर आप चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।

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