Fri Sep 11, 2026 | 09:15 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

बुजुर्गों के लिए दूध फायदेमंद या नुकसानदायक? डाइटिशियन से जानें कब और कितना पीना है सही

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की जरूरतें बदलने लगती हैं, बुजुर्गों में हड्डियों की कमजोरी, मांसपेशियों का क्षय, पाचन से जुड़ी समस्याएं और इम्यूनिटी में गिरावट आम हो जाती है, ऐसे में खानपान में भी बदलाव जरूरी हो जाता है। यहां जानिए, बुजुर्गों को दूध कब और कितना पीना चाहिए?

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं, लेकिन हमारी खानपान की आदतें अक्सर वही रह जाती हैं। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि दूध सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है, हड्डियां मजबूत होती हैं, ताकत मिलती है और शरीर को सही पोषण मिलता है। यही वजह है कि जब बात बुजुर्गों की आती है, तो सबसे पहले यही सवाल उठता है कि क्या उन्हें रोज दूध पीना चाहिए या नहीं। कई घरों में आज भी बुजुर्गों को बिना सोचे-समझे सुबह-शाम दूध दिया जाता है, लेकिन क्या यह हर किसी के लिए सही है? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से बात की-

क्या बुजुर्गों को दूध पीना चाहिए? - Should elderly people drink milk

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि उम्र बढ़ने पर हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सीमित और सही मात्रा में दूध बुजुर्गों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

दूध कब पीना चाहिए? - When should old people drink milk

डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, बुजुर्गों के लिए दूध पीने का सही समय बेहद जरूरी है। रात में सोने से पहले दूध पीने से नींद बेहतर हो सकती है और शरीर को आराम मिलता है। वहीं, कुछ बुजुर्गों के लिए सुबह खाली पेट दूध पीना भारी पड़ सकता है, खासकर अगर उन्हें गैस, एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या रहती है। ऐसे में दूध को हल्के नाश्ते के बाद या शाम के समय लेना बेहतर रहता है।

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बुजुर्गों को कितना दूध पीना चाहिए? - How much milk should a 70 year old drink

अक्सर यह माना जाता है कि जितना ज्यादा दूध पिएंगे, उतना अच्छा होगा, लेकिन यह धारणा गलत है। डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि 70 साल बुजुर्गों के लिए रोजाना 1 कप दूध पर्याप्त होता है। इससे ज्यादा दूध पीने पर पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जरूरत से ज्यादा दूध लेने से कैल्शियम का असंतुलन और किडनी से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से किडनी की समस्या हो।

दूध के विकल्प क्या हो सकते हैं? - What are the alternatives to milk

अगर किसी बुजुर्ग को दूध सूट नहीं करता, तो उसके विकल्प मौजूद हैं। दही, पनीर, छाछ, सोया दूध, बादाम दूध और ओट्स मिल्क जैसे विकल्प कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, प्लांट-बेस्ड दूध लेते समय उसमें कैल्शियम और विटामिन D फोर्टिफिकेशन जरूर जांच लें।

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How much milk should a 70 year old drink a day

डाइटिशियन की सलाह

बुजुर्गों को दूध के साथ कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। दूध को भारी भोजन के तुरंत बाद या बहुत देर रात नहीं पीना चाहिए। साथ ही दूध में ज्यादा चीनी या मिठास मिलाने से बचना चाहिए। अगर दूध के साथ हल्दी या थोड़ी सी इलायची मिलाई जाए, तो यह पाचन और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष

डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, बुजुर्गों के लिए दूध फायदेमंद जरूर है, लेकिन तभी जब इसे सही समय, सही मात्रा और सही रूप में लिया जाए। हर व्यक्ति की सेहत अलग होती है, इसलिए दूध को डेली डाइट में शामिल करने से पहले अपनी पाचन क्षमता और मेडिकल कंडीशन को समझना जरूरी है। बैलेंस डाइट और एक्सपर्ट की सलाह के साथ लिया गया दूध बुजुर्गों की सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

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FAQ

  • 60 साल की उम्र में कितने कदम चलना चाहिए?

    बुजुर्गों को रोजाना 20-30 मिनट हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग करनी चाहिए, जो उनकी क्षमता के अनुसार हो।
  • उम्र बढ़ने पर भूख कम क्यों लगती है?

    उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, स्वाद और गंध की क्षमता कम होती है और पाचन एंजाइम घटते हैं, जिससे भूख कम लगती है।
  • किस उम्र में बूढ़ा माना जाता है?

    आमतौर पर 60 वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति को बुजुर्ग अवस्था में माना जाता है, हालांकि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 14, 2026 18:05 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jan 14, 2026 18:05 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Archana Jain

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