
इंसान प्राकृतिक रूप से मीठे के प्रति आकृष्ट होता है, लेकिन इसका ज्यादा प्रयोग इसके अधिक सेवन से मानसिक सेहत बिगड़ जाती है और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव होता है। अटलांटा की एमरॉय यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर माना है कि शुगर में पाया जाने वाला फ्रुक्टोज मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। उनका मानना है कि इसके अधिक सेवन से दिमाग की तनाव को लेकर प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए ये लेख पढ़ें।
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ज़्यादा मीठा बन सकता है ज़हर
शोधकर्ताओं के अनुसार शक्कर के इस्तेमाल से बने मीठे आहार खाकर पेट उतना भरने का एहसास नहीं होता, जितना समान कैलोरी वाली दूसरी चीज़ें खाकर होता है। सामान्य शक्कर फ्रूक्टोज़ से मीठे बनाए गए खाद्य और पेय पदार्थ उस तरह भरे होने का भाव पैदा नहीं करते जैसे कि उतनी ही कैलोरी वाले अन्य खाद्य पदार्थ करते हैं।शोध में पाया गया कि दिमाग़ दिमाग का वो भाग जो हमें खाने को प्रेरित करता है, ग्लूकोज़ से तो दब जाता है लेकिन फ्रूक्टोज़ से नही। संबंधित परीक्षण ऐसे ही एक और शोध में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने ग्लूकोज़ लेने के बाद फ्रूक्टोज़ के मुकाबले ज़्यादा संतुष्टि महसूस की।इन निष्कर्षों को साथ देखें तो ज़्यादा खाने का खतरा बढ़ता हुआ दिखता है।
कमजोर याददाश्त और डिमेंशिया का खतरा
चूहों पर किये गए अध्ययन में दावा किया गया है कि ज्यादा फ्रूक्टोज का सेवन मस्तिष्क की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इससे याददाश्त में गिरावट और सीखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं होती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक ज्यादा चीनी इन्सुलिन को प्रभावित करती है और यह हार्मोन मस्तिष्क कोशिकाओं के कामकाज में मदद करता है। यानी इन्सुलिन उत्सर्जन में गड़बड़ी होते ही मस्तिष्क पर भी असर पड़ने लगता है। एक अन्य शोध में पता चला है कि ज्यादा शक्कर वाले आहार से अल्जाइमर्स और डिमेंशिया जैसी बिमारियों की आशंका बढ़ जाती है। दरअसल मीठे से डायबिटीज़ होता है , जो अल्जाइमर्स का बड़ा कारण हैं। इसीलिए अल्जाइमर्स को डायबिटीज़ टाइप -3 भी कहा जाता है।

डिप्रेशन का खतरा और ज्यादा मीठे की तलब
अगर आपको मीठा खाने की तलब लगती है , तो आपका ब्लड शुगर स्तर भी कम हो सकता है। ब्लड शुगर में यह उत्तर उतार -चढ़ाव बेचैनी , मूड बदलने और थकान का कारण बनता है। फ़ास्ट- फ़ूड फास्ट-फूड या मीठा खाने में तो अच्छा लगेगा , लेकिन बाद में ब्लड शुगर कम होते ही बेचैनी होने लगेगी। ये स्थिति बार- बार हो तो डिप्रेशन होना लाजमी है। विशेषज्ञ जॉर्डन ग्रेन लेविस के मुताबिक मीठा खाने से मस्तिष्क खुशियों वाले हार्मोन का उत्सर्जन करता है। इससे दिमाग का भावनात्मक हिस्सा पुरस्कार पाने जैसी खुशी का एहसास करता है। इसीलिए ज्यादा मीठा खाने वाले लोगों को बार- बार इसे खाने का मन करता है।
अध्ययन के आधार पर डाइट और दिमाग के संबंध से जुड़ी नई जानकारी हासिल की है जिसकी मदद से किशोरों में पोषण संबंधी सुधार हो सकते हैं।
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