Fri Oct 30, 2026 | 12:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

वर्क फ्रॉम होम में पीठ दर्द से हैं परेशान? कहीं आपका पोस्चर तो नहीं है इसका कारण

वर्क फ्रॉम होम के दौरान गलत पोस्चर पीठ दर्द का मुख्य कारण बन सकता है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। सही एर्गोनॉमिक्स, नियमित ब्रेक और कोर मसल्स को मजबूत करके इस समस्या से बचा जा सकता है।
वर्क फ्रॉम होम में पीठ दर्द से हैं परेशान? कहीं आपका पोस्चर तो नहीं है इसका कारणवर्क फ्रॉम होम में पीठ दर्द से हैं परेशान? कहीं आपका पोस्चर तो नहीं है इसका कारण

कोविड-19 के बाद से कई ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम का कल्चर काफी ज्यादा बढ़ गया है। ऑफिस में कंप्यूटर टेबल और कंफर्टेबल चेयर पर बैठकर काम करने के दौरान अपने शरीर का पोश्चर बेहतर रखना आसान होता है। वर्क फ्रॉम होम में काम करना भले ही आरामदायक होता है, लेकिन ये आपकी कमर और पीठ दर्द का कारण बन सकता है। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida बताते हैं कि सोफे पर लैपटॉप रखकर काम करना आसान लगता है, लेकिन घंटों खराब पोश्चर में बैठकर काम करने पर पीठ दर्द की समस्या हो सकती है।

गलत पोस्चर रीढ़ की हड्डी पर क्या असर डालता है?

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि हमारी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह से सीधी नहीं होती है, बल्कि यह अंग्रेजी के 'S' आकार की होती है। इसमें नेचुरल कर्व्स होते हैं, जो शरीर का वजन बराबर बांटने और झटके सहने का काम करते हैं। जब आप सोफे, बिस्तर या किसी नॉर्मल कुर्सी पर झुककर काम करते हैं तो आपको यह समस्याएं हो सकती हैं-

  • डिस्क पर ज्यादा प्रेशर- सीधे बैठने की तुलना में आगे झुककर बैठने से हमारी रीढ़ की हड्डी की गद्दियों पर 1.5 से 2 गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने से डिस्क खिसकने या बल्ज होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मांसपेशियों का असंतुलन- घंटों झुककर बैठने से पीठ की मांसपेशियां लगातार खिंची रहती हैं और कमजोर हो जाती हैं, जबकि सीने और पेट की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। इसे मेडिकल भाषा में अपर एंड लोअर सिंड्रोम कहा जाता है।
  • साइटिका और नस दबना- जब कमर के निचले हिस्से की डिस्क पर लगातार बिना कारण प्रेशर पड़ता है तो वह वहां से गुजरने वाली नसों करो दबाने लगती है। इससे पीठ दर्द के साथ-साथ पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या तेज दर्द होने लगता है।

साल 2024 में Journal of Occupational and Environmental Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, ऑफिस का काम करने के दौरान कमर दर्द का मुख्य कारण बैठने की गलत मुद्रा है। सीधे पीठ टिकाकर बैठने की तुलना में धड़ को थोड़ा आगे झुकाकर बैठने से कमर के निचले हिस्से में दर्द का जोखिम 2.9 गुना ज्यादा पाया गया है।

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वर्कफ्रॉम होम के दौरान की जाने वाली गलतियां

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि घर से काम करते समय लोग जाने-अनजाने में कुछ गलतियां करते हैं, जो उनकी रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाती हैं-

  1. बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करना- घर पर काम करने के दौरान बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करना सबसे आम और खतरनाक गलती होती है। बिस्तर या सोफे पर आपकी कमर को कोई टेक नहीं मिलती है, जिससे आपकी रीढ़ की हड्डी 'C' शेप में झुक जाती है।
  2. लैपटॉप को नीचे रखकर देखना- जब लैपटॉप आपकी आंखों के लेवल से नीचे होता है, तो आपकी गर्दन लगातार नीचे झुकी रहती है। गर्दन का 60 डिग्री झुकना रीढ़ की हड्डी पर लगभग 27 किलो का ज्यादा दबाव डालता है।
  3. लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना- इंसान का शरीर गतिशीलता के लिए बना है। ऐसे में लगातार 3 से 4 घंटे बिना ब्रेक लिए बैठने से रीढ़ की हड्डियों के बीच ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है।
  4. सॉफ्ट स्पंज वाली कुर्सियों का इस्तेमाल- ज्यादा मुलायम गद्देदार कुर्सियां शुरू में आरामदायक लगती हैं, लेकिन वे आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देतीं।

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वर्कफ्रॉम होम में पीठ दर्द से बचने के उपाय

Dr. Akshay Chugh के अनुसार, अगर आप भी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं और पीठ दर्द से बचना चाहते हैं तो आपको दवाओं की नहीं, बल्कि अपनी आदतों में थोड़ बदलाव करने की जरूरत होती है।

1. सही इरगोनॉमिक वर्कस्टेशन बनाएं

ऐसी कुर्सी का इस्तेमाल करें, जो आपकी कमर के निचले हिस्से को नेचुरल सपोर्ट दे। अगर कुर्सी सीधी है तो अपनी कमर के पीछे एक छोटा तकिया या टॉवल रोल करके लगाएं। लैपटॉप या मॉनिटर की स्क्रीन आपकी आंखों के ठीक सामने होनी चाहिए ताकि आपकी गर्दन सीधी रहे। इसके लिए लैपटॉप स्टैंड या किताबों का सहारा लें और अलग से कीबोर्ड व माउस का इस्तेमाल करें।
कुर्सी पर बैठते समय आपके घुटने, हिप्स और कोहनियां 90 डिग्री के कोण पर होनी चाहिए। आपके पैर जमीन पर पूरी तरह टिके रहने चाहिए।

2. 20-20-20 नियम और माइक्रो ब्रेक लें

हर 30 से 45 मिनट के काम के बाद 2 से 3 मिनट का माइक्रो-ब्रेक लें। खड़े हों, थोड़ा टहलें, अपनी पीठ और गर्दन को पीछे की ओर हल्का सा स्ट्रेच करें। इससे मांसपेशियों को तुरंत ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो मिलता है।

3. कोर मसल्स को मजबूत बनाएं

आपकी पीठ का असली सपोर्ट आपकी पेट और कमर की मांसपेशियां हैं। रोजाना 15 से 20 मिनट भुजंगासन, मर्कटासन प्लैंक और हल्की वॉक करें। मजबूत कोर मसल्स रीढ़ की हड्डी का आधा वजन खुद संभाल लेती हैं।

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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर आपका पीठ दर्द लगातार कई दिनों तक बना हुआ है, पैरों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही है या रात में सोते समय दर्द बढ़ जाता है तो इसे सिर्फ साधारण थकान न समझें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी अच्छी न्यूरोलॉजिस्ट या स्पाइन स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए।

निष्कर्ष
पीठ का दर्द सिर्फ एक शारीरिक असुविधा नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का आपको दिया गया एक शुरुआती चेतावनी संकेत है कि आपकी रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा प्रेशर पड़ रहा है। अगर आप शुरुआती स्टेज पर ही अपने पोस्चर और लाइफस्टाइल में सुधार कर लेते हैं तो आप भविष्य में होने वाली गंभीर स्पाइन सर्जरी और क्रोनिक बीमारियों से बच सकते हैं।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • पीठ में दर्द किसकी कमी से होता है?

    पीठ में दर्द होना मुख्य रूप से विटामिन डी, कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी के साथ-साथ मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होता है।
  • पीठ में दर्द होना कौन सी बीमारी का लक्षण है?

    पीठ में दर्द साइटिका, डिस्क हर्निएशन यानी स्लिप डिस्क, अर्थराइटिस या किडनी से जुड़ी समस्याओं का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 30, 2026 11:22 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh