Why You Suffer From Recurrent Tonsillitis?: बार-बार बैक्टीरिया या वायरस के कारण गले में इंफेक्शन होना, खासकर स्ट्रेप्टोकोकल इंफेक्शन (Streptococcal Infection), टॉन्सिल के बार-बार बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। यह स्ट्रेप्टोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक जीवाणु संक्रमण है। इसके अलावा, एलर्जी, प्रदूषण, दूसरे लोगों के सिगरेट के धुएं के संपर्क में आना, एसिड रिफ्लक्स और प्राकृतिक रूप से टॉन्सिल का बड़ा होना भी इसकी वजह हो सकती हैं। आइए जानते हैं बार-बार टॉन्सिल बढ़ने के लक्षण और इलाज क्या है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Kamalesh A, Senior Consultant Physician At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
टॉन्सिलाइटिस के शुरुआती लक्षण
- गले में दर्द
- गले में खराश और निगलने में परेशानी होना
- टॉन्सिल में सूजन
- कुछ लोगों को बुखार, सिरदर्द, थकान
- बच्चों में भूख कम लगना, चिड़चिड़ापन और पेट दर्द
टॉन्सिल बढ़ने का इलाज कैसे किया जाता है?
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टॉन्सिल के बढ़ने का कारण और लक्षण देखकर इलाज तय किया जाता है। वायरल संक्रमण में-
- आराम करना,
- पर्याप्त तरल पदार्थ पीना,
- गुनगुने नमक के पानी से गरारे करना और
- दर्द कम करने के लिए पैरासिटामोल जैसी दवाएं लेना आमतौर पर फायदेमंद होता है।
- अगर जांच में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि होती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स लेना जरूरी हो सकता है।
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टॉन्सिल के दर्द से राहत के घरेलू उपाय
टॉन्सिल के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं। जैसे-
- गुनगुने तरल पदार्थ या सूप का सेवन करें।
- नरम खाद्य पदार्थ खाएं, ताकि निगलने में परेशानी कम हो।
- दलिया, खिचड़ी जैसी हल्की चीजें खाएं। बहुत गर्म, तीखे और खट्टे खाद्य पदार्थों से बचें।
- गले में दर्द होने पर ज्यादा जोर से बोलने या चिल्लाने से बचें। इससे गले में होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।
- हवा में नमी बनाए रखने के लिए साफ ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे गले का सूखापन कम हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह: कब पड़ती है टॉन्सिल सर्जरी की जरूरत?
अगर टॉन्सिल बढ़ने के कारण बार-बार संक्रमण हो रहा है, खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस रुकती है, निगलने में परेशानी होती है या सांस लेने में दिक्कत होती है, तो डॉक्टर टॉन्सिल निकालने की सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर एक साल में 7 से 8 बार, लगातार दो साल तक, हर साल 5 बार या लगातार तीन साल तक हर साल 3 बार टॉन्सिल संक्रमण होने पर सर्जरी का विचार किया जाता है।
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सर्जरी के बाद घटी दोबारा टॉन्सिल होने की संभावना: अध्ययन
साल 2026 में Ear, Nose & Throat Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, सर्जरी कराने वाले मरीजों में दोबारा लक्षण होने का खतरा 72% कम पाया गया। बिना सर्जरी के इलाज की तुलना में टॉन्सिल निकालने वाले मरीजों में गले का संक्रमण दोबारा होने का खतरा कम था। सर्जरी कराने वाले मरीजों में गले में दर्द के कुल एपिसोड और लक्षणों वाले दिनों की संख्या भी कम पाई गई।
गले के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
- गले के संक्रमण (टॉन्सिल) से बचने के लिए हाथों की सफाई रखें। खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन से हाथ धोएं। इससे कीटाणुओं का खतरा कम होता है।
- दूसरों की निजी चीजें इस्तेमाल न करें। संक्रमित व्यक्ति के साथ गिलास, चम्मच, तौलिया या टूथब्रश शेयर करने से बचें।
- धूम्रपान और धुएं से बचें। सिगरेट का धुआं और वायु प्रदूषण गले में जलन पैदा कर सकते हैं और लक्षण बढ़ा सकते हैं।
- पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें। इससे गले में नमी बनी रहती है और सूखेपन से राहत मिल सकती है।
- संतुलित आहार लें। फल, सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं।
- बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें। हर गले का संक्रमण बैक्टीरिया से नहीं होता। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक असर नहीं करतीं इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनका सेवन न करें।
टॉन्सिल की समस्या को नजरअंदाज करना क्यों है खतरनाक?
टॉन्सिलाइटिस को नजरअंदाज करने से-
- गले में दर्द, बुखार और निगलने में परेशानी बढ़ सकती है।
- कुछ मामलों में टॉन्सिल के आस-पास मवाद जमा हो सकता है।
- गंभीर सूजन के कारण सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है।
- स्ट्रेप्टोकोकल इंफेक्शन का सही इलाज न होने पर कुछ लोगों में रूमेटिक फीवर या किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर एक तरफ का टॉन्सिल लगातार सूजा हुआ है,
- मुंह से लार टपक रही है,
- शरीर में पानी की कमी हो रही है या
- सांस लेने अथवा निगलने में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
बार-बार टॉन्सिल बढ़ने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे स्ट्रेप्टोकोकल इंफेक्शन, एलर्जी, प्रदूषण, दूसरे लोगों के सिगरेट के धुएं के संपर्क में आना, एसिड रिफ्लक्स और प्राकृतिक रूप से टॉन्सिल का बड़ा होना वगैरह। गले में दर्द, खराश, निगलने में परेशानी, टॉन्सिल में सूजन इसके लक्षण हैं। टॉन्सिल बढ़ने पर आराम करें, तरल पदार्थ लें, गुनगुने पानी से गरारे करें, डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल लें, बैक्टीरियल संक्रमण होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक्स खाने की सलाह दे सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी की जाती है। बार-बार टॉन्सिल बढ़ने पर, खर्राटे अधिक आने पर, सोते समय सांस रुकने पर, निगलने में परेशानी होने पर या सांस की दिक्कत होने पर डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं। गले के संक्रमण से बचने के लिए हाथों की सफाई रखें, दूसरों की निजी चीजों का इस्तेमाल न करें, म्रपान और धुएं से बचें, पर्याप्त पानी पिएं, फल, सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर आहार लें, बिना सलाह एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें। अगर एक तरफ टॉन्सिल सूजा हुआ है, मुंह से लार टपक रही है, शरीर में पानी की कमी है या सांस की तकलीफ है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
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FAQ
बार-बार टॉन्सिल बढ़ने पर कौन सी जांच की जाती है?
थ्रोट स्वैब या रैपिड स्ट्रेप टेस्ट क या जा सकता है। लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है।टॉन्सिल स्टोन और टॉन्सिलाइटिस में क्या अंतर है?
टॉन्सिल की छोटी दरारों में पदार्थ जमा होने के कारण टॉन्सिल स्टोन बनते हैं जबकि टॉन्सिलाइटिस होने पर टॉन्सिल में सूजन आ जाती है।
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Oct 29, 2026 18:45 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Kamalesh A
