डिस्लेक्सिया में पढ़ने और लिखने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इस कंडीशन से पीड़ित माता-पिता अक्सर डॉक्टर के पास यह शिकायत लेकर आते हैं कि बच्चा पढ़ने में कमजोर है, परिणाम में बच्चे के मार्क्स अच्छे नहीं है और वह पढ़ने की कोशिश नहीं करता। अगर आपके आस-पास भी कोई ऐसा बच्चा है, तो वह डिस्लेक्सिया का शिकार हो सकता है। ऐसे बच्चों को पढ़ने-लिखने और बोलने में समस्या महसूस होती है। इस समस्या से पीड़ित बच्चे शब्दों को समझ नहीं पाते हैं। यह समस्या आमिर खान की फिल्म 'तारे जमीन पर' में भी देखी गई है। फिल्म में दिखाया गया है कि ईशान नाम के बच्चे को भाषा की परेशानी होती है और वह अपनी समस्या किसी को समझा नहीं पाता है। आइए जानते हैं डिस्लेक्सिया के लक्षण, जांच और इसे मैनेज करने के उपाय। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
Mayo Clinic के मुताबिक,
- डिस्लेक्सिया कम बुद्धिमत्ता, सुनने या देखने की समस्या के कारण नहीं होता है।
- डिस्लेक्सिया वाले ज्यादातर बच्चे सही ट्यूशन, पढ़ाई में मदद मिलने से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
- डिस्लेक्सिया का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन अगर इसकी पहचान जल्दी हो जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
- कई बार डिस्लेक्सिया की पहचान बचपन में नहीं हो पाती और व्यक्ति को कई वर्षों तक इसके बारे में पता नहीं चलता। कुछ लोगों में इसकी पहचान वयस्क होने के बाद भी हो सकती है।
डिस्लेक्सिया में क्या परेशानी होती है?
what-is-dyslexia-in-hindi
- डिस्लेक्सिया पीड़ित बच्चों को शब्दों की स्पेलिंग लिखने में परेशानी होती है।
- डिस्लेक्सिया वाले बच्चों या वयस्कों की बुद्धि और आंखों की रोशनी सामान्य हो सकती है, फिर भी उन्हें पढ़ने और लिखने में परेशानी हो सकती है।
- ऐसे बच्चे धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।
- इन्हें नए शब्द या एक जैसे बोले जाने वाले शब्दों को समझने में भी परेशानी होती है।
- ऐसे बच्चों को लिखी हुई जानकारी को समझने में भी परेशानी हो सकती है।
यह भी पढ़ें- परीक्षा के दौरान बच्चा तनाव में है-कैसे पहचानें? लक्षण जानें और मानें एक्सपर्ट के दिए सुझाव
डिस्लेक्सिया को आलस या मेहनत की कमी न समझें
माता-पिता शुरुआती समय में यह समझ नहीं पाते कि बच्चे की पढ़ने-लिखने की क्षमता आखिर क्यों कमजोर हो रही है? कई बार उन्हें लगता है कि बच्चा आलसी है। कई बार वे उसे कम मेहनत करने का ताना देते हैं, तो कई बार वे अपनी ही परवरिश पर सवाल उठाते हैं। जबकि डिस्लेक्सिया से पीड़ित एक बच्चे के साथ इनमें से कोई कारण नहीं होता। डिस्लेक्सिया आदतों से संबंधित कंडीशन नहीं है। इस कंडीशन में व्यक्ति या बच्चे का दिमाग, भाषा को समझने और उसका इस्तेमाल करने में परेशानी महसूस करता है।
ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया और ADHD में अंतर
ऑटिज्म और डिस्लेक्सिया दोनों न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन हैं, लेकिन डिस्लेक्सिया में केवल पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता कमजोर होती है जबकि ऑटिज्म में पढ़ने और लिखने की क्षमता कमजोर होने के साथ-साथ मिलने-जुलने और बातचीत करने में भी परेशानी महसूस होती है।
ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर) से पीड़ित व्यक्ति को ध्यान लगाने में परेशानी होती है। ऐसे बच्चे या लोग हाइपरएक्टिव हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें- आपसे दूर होते ही रोने लगता है बच्चा? डॉक्टर से जानें बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के कारण और निपटने के उपाय
डिस्लेक्सिया की पहचान कैसे होती है?
डिस्लेक्सिया की पहचान के लिए बच्चे की पढ़ने-लिखने की क्षमता, उसकी सीखने और समझने की क्षमता और स्पीच-लैंग्वेज से जुड़ी जांच की जाती है।
डिस्लेक्सिया की पहचान के लिए IQ टेस्ट किया जाता है
डिस्लेक्सिया के लक्षण दिखने पर डॉक्टर बच्चे का IQ टेस्ट करने की सलाह देते हैं। कई बार डॉक्टर के लिए माता-पिता को यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि बच्चे का IQ आखिर क्यों जरूरी है? डॉक्टर अक्सर यह कहते हैं कि बच्चे का IQ, डिस्लेक्सिया होने के बाद भी नॉर्मल ही आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लर्निंग डिसेबिलिटी की जांच पूरी तरह से संभव नहीं है। कई बार माता-पिता को भी यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि आखिर IQ टेस्ट क्यों किया जा रहा है? जबकि IQ टेस्ट बच्चे की बुद्धि की क्षमता को जांचने के लिए नहीं बल्कि यह देखने के लिए किया जाता है कि बच्चे के ब्रेन का कौन सा एरिया ज्यादा अच्छा है या कौन सा हिस्सा कमजोर है?
एजुकेशन असेसमेंट की मदद ली जाती है
IQ टेस्ट के बाद बच्चे का एजुकेशन असेसमेंट किया जाता है। इसमें बच्चे के पढ़ने और लिखने की क्षमता की जांच की जाती है। इसके बाद बच्चे को रिमेडियल क्लॉसेज दी जाती हैं। यानी बच्चे को अलग रचनात्मक ढंग से बच्चे को अलग-अलग विषय सिखाए जाते हैं। रिमेडियल क्लॉसेज की जरूरत कुछ महीनों से लेकर सालों तक बनी रह सकती है।
डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को मिलती है रीडिंग ट्रेनिंग
डिस्लेक्सिया एक क्रॉनिक कंडीशन है यानी यह लंबे समय तक रहती है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि डिस्लेक्सिया के साथ बच्चा बिल्कुल पढ़-लिख नहीं सकता। अगर डिस्लेक्सिया पीड़ित बच्चे के पढ़ने के तरीके, रीडिंग ट्रेनिंग वगैरह पर गौर किया जाए, तो उसके लिखने और पढ़ने की क्षमता में सुधार आ सकता है।
डिस्लेक्सिया होने पर माता-पिता क्या करें?
- बच्चे को छोटी उम्र से ही किताबें पढ़कर सुनाएं।
- बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, तो कहानी सुनने के बाद उसके साथ किताब पढ़ें।
- बच्चे की जरूरतों को समझकर शिक्षक के साथ मिलकर काम करना फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष:
डिस्लेक्सिया एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो मुख्य रूप से पढ़ने और लिखने की क्षमता को प्रभावित करता है। डिस्लेक्सिया की पहचान के लिए IQ टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा, पढ़ने-लिखने की क्षमता, उसकी सीखने और समझने की क्षमता और स्पीच-लैंग्वेज से जुड़ी जांच भी होती है। इसके बाद एजुकेशन असेसमेंट किया जाता है और रिमेडियल क्लॉसेज दी जाती हैं। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को भले ही पढ़ने-लिखने में समस्या हो, लेकिन वे भी रीडिंग ट्रेनिंग की मदद से पढ़-लिख सकते हैं। डिस्लेक्सिया में केवल पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता कमजोर होती है जबकि ऑटिज्म में पढ़ने और लिखने की क्षमता कमजोर होने के साथ-साथ मिलने-जुलने और बातचीत करने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।
image credit: netflix, bollywoodbubble.com
FAQ
क्या डिस्लेक्सिया ठीक हो सकता है?
डिस्लेक्सिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर पहचान करके पढ़ने-लिखने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है।क्या डिस्लेक्सिया के साथ ऑटिज्म भी हो सकता है?
हां, कुछ लोगों को डिस्लेक्सिया के साथ ऑटिज्म भी हो सकता है। कई बार ये दोनों न्यूरो कंडीशन एक साथ हो जाती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 22, 2026 18:21 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra
