Mon Sep 21, 2026 | 08:04 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

डायपर रैश से बच्चे को कैसे बचाएं? डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट से जानें आसान ट‍िप्‍स

अगर डायपर गीला है, टाइट है या लंबे समय तक गंदा है, तो डायपर रैश हो सकते हैं। डायपर रैश, इंफेक्‍शन में भी बदल सकता है इसल‍िए जानें इससे बचाव के आसान ट‍िप्‍स।
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बच्‍चों में होने वाली एक कॉमन समस्‍या है डायपर रैश यानी डायपर पहनने से होने वाले रैशेज। डायपर रैशेज के कारण श‍िशु बार-बार रोता है, उसे च‍िड़च‍िड़ापन महसूस होता है, सोने में परेशानी भी होती है। ज्‍यादातर श‍िशुओं में डायपर रैश का कारण त्‍वचा का ज्‍यादा देर पेशाब, मल और पसीने के संपर्क में आना होता है ज‍िससे जलन हो सकती है। डायपर रैश होने पर रेडनेस, खुजली, त्‍वचा का छ‍िलना, त्वचा पर पपड़ी या परत बनने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। अगर डायपर टाइट है, तो इससे डायपर के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता है, जहां बैक्टीरिया और फंगस आसानी से बढ़ सकते हैं और रैश का कारण बन सकते हैं। डायपर में इस्‍तेमाल क‍िए गए फ्रेगरेंस या केम‍िकल्‍स भी डायपर रैश का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं श‍िशु की त्‍वचा को डायपर रैश से बचाने के आसान ट‍िप्‍स। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक,
डायपर रैश डर्मेटाइटिस का एक प्रकार है। इसमें बच्चे के ह‍िप्‍स, जांघों और जननांगों के आस-पास की त्वचा पर लाल या सूजे हुए चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। यह समस्या आमतौर पर बच्चों में होती है, लेकिन जो लोग नियमित रूप से डायपर पहनते हैं, उन्हें भी यह हो सकती है।

साल 2018 में Pediatric Dermatology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, डायपर डर्मेटाइटिस यानी डायपर रैश बच्चों में अध‍िकतर शुरुआती महीनों में होता है। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत और सुरक्षित रखने और रैश को रोकने के ल‍िए बैरियर क्रीम और मॉइश्चराइजर प्रोडक्‍ट्स असरदार साब‍ित हो सकते हैं।

1. बच्‍चे के डायपर को हर घंटे चेक करें

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ज्‍यादा गीला हो या गंदा हो गया हो, तो उसे बदल दें। हर दो से तीन घंटे में डायपर को बदल भी सकते हैं। अगर बच्‍चे की त्‍वचा पर ऑयल या क्रीम लगाया हो, तो उस दौरान डायपर न पहनाएं।

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2. कैसा डायपर चुनें?

अच्‍छी क्वालिटी वाले डायपर को चुनें। अच्‍छी ब्रैंड चुनें। डायपर लाइट वेट होना चाह‍िए ताक‍ि हवा आर-पार हो जाए। इससे बच्‍चे की त्‍वचा में नमी जमा नहीं होगी। श‍िशु की त्‍वचा के ल‍िए कॉटर डायपर का इस्‍तेमाल करें। इससे रैशेज होने की संभावना कम हो जाती है।

3. डायपर को हटाना न भूलें

बच्‍चे की त्‍वचा सेंस‍िट‍िव होती है। कोश‍िश करें क‍ि बच्‍चा ज्‍यादातर समय डायपर के बगैर ब‍िताएं क्‍योंक‍ि डायपर पहनाने से त्‍वचा में नमी लॉक हो जाती है। ज्‍यादा नमी के कारण त्‍वचा छ‍िल जाती है और रैशेज हो जाते हैं।

4. बच्‍चे की त्‍वचा को साफ रखें

  • कॉटन और गुनगुने पानी की मदद से त्‍वचा को साफ करें।
  • अल्‍कोहल फ्री वाइप्‍स को भी यूज कर सकते हैं।
  • त्‍वचा को ड्राई करने के बाद ही डायपर पहनाएं।
  • अगर श‍िशु की त्‍वचा पर रैशेज द‍िख रहे हैं, तो एलर्जी ठीक होने तक डायपर का इस्‍तेमाल न करें। माइल्‍ड केस में रैशेज ठीक होने के कम से कम 48 घंटे बाद तक डायपर का इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए।

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5. डायपर हटाने के बाद त्‍वचा पर क्रीम लगाएं

  • श‍िशु की त्‍वचा को डायपर रैशेज से बचाने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर क्रीम का इस्‍तेमाल करें।
  • नार‍ियल तेल या बादाम के तेल का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। कई बच्‍चों की त्‍वचा ज्‍यादा सेंस‍िट‍िव होती है इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर इसका इस्‍तेमाल करें।
  • डॉक्‍टर की सलाह पर एलोवेरा जेल भी लगाया जा सकता है।

6. श‍िशु को टाइट कपड़े न पहनाएं

बच्चे को ढीले और आरामदायक कपड़े पहनाएं। बहुत टाइट कपड़ों से पसीना और त्वचा की रगड़ बढ़ सकती है, खासकर डायपर वाली जगह पर।

7. त्वचा की सिलवटों को सूखा रखें

गर्दन, बगल और जांघों के बीच की त्वचा को धीरे से साफ करके अच्छी तरह सुखाएं। त्वचा की सिलवटों में नमी जमा होने से जलन और रैश हो सकते हैं।

8. बच्चे की त्वचा को रगड़ें नहीं

बच्चे की त्वचा को जोर से रगड़ने या स्क्रब करने की जरूरत नहीं होती। नहाने या साफ करने के बाद मुलायम तौलिए से त्वचा को धीरे-धीरे थपथपाकर सुखाएं।

9. बच्चे को ज्यादा गर्मी से बचाएं

बहुत ज्यादा गर्मी और पसीने से घमौरियां या अन्य तरह के रैश हो सकते हैं। कमरे का तापमान आरामदायक रखें और मौसम के अनुसार ही बच्चे को कपड़े पहनाएं।

10. बच्चे के नाखून छोटे रखें

बच्चे के नाखून नियमित रूप से काटते रहें, ताकि वह त्वचा को ज्यादा न खरोंच सके। खरोंचने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

श‍िशु की त्‍वचा पर रेडनेस, दाने, सूजन, त्वचा छिलने या घाव जैसे बदलावों पर ध्यान दें। अगर रैश तेजी से फैल रहा है, दर्द हो रहा है, छाले पड़ रहे हैं, बुखार के साथ है या ठीक नहीं हो रहा है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

निष्‍कर्ष:

बच्‍चे को डायपर रैश से बचाने के ल‍िए कुछ आसान ट‍िप्‍स की मदद ले सकते हैं जैसे डायपर को हर घंटे चेक करें, कॉटन डायपर चुनें, डायपर के ल‍िए अच्‍छी क्वालिटी और ब्रैंड को चुनें। डायपर लाइट वेट होना चाह‍िए। समय-समय पर श‍िशु की त्‍वचा को डायपर फ्री रखें और साफ कॉटन और पानी से श‍िशु की त्‍वचा को साफ रखें। श‍िशु की त्‍वचा को साफ करने के बाद सुखाएं। गीली त्‍वचा पर डायपर न पहनाएं। सफाई के ल‍िए कॉटन और गुनगुने पानी का इस्‍तेमाल करें, अल्‍कोहल फ्री वाइप्‍स का इस्‍तेमाल करें। अगर श‍िशु को डायपर रैश हो गए हैं, तो रैश ठीक होने के कम से कम 48 घंटे बाद ही डायपर दोबारा पहनाएं। श‍िशु को टाइट कपड़े न पहनाएं, त्‍वचा की स‍िलवटों को ड्राई रखें, बच्चे की त्वचा को रगड़ें नहीं और बच्‍चे की त्‍वचा को ज्‍यादा गर्मी से बचाएं। इस तरह आप श‍िशु को डायपर रैश से बचा सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या डायपर रैश सिर्फ गंदे डायपर की वजह से होता है?

    नहीं। नमी, सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन, प्रोडक्‍ट से एलर्जी और कुछ इंफेक्‍शन के कारण भी डायपर रैश की समस्‍या हो सकती है।
  • क्या डायपर रैश में पाउडर लगाना चाहिए?

    अगर डायपर रैश हो गया है, तो खुशबू युक्‍त पाउडर से इंफेक्‍शन बढ़ सकता है इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह से एंटीसेप्‍ट‍िक पाउडर या क्रीम का इस्‍तेमाल करें। टैल्‍कम पाउडर का इस्‍तेमाल करने से बचें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 21, 2026 19:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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