जटामांसी को मानसिक तनाव (Stress) और एंग्जाइटी (Anxiety) को कम करने के लिए असरदार माना जाता है इसलिए इसे आयुर्वेद में दिमाग और तंत्रिका तंत्र को शांत करने वाली (Sedative) औषधि कहा गया है। प्राचीन काल से जटामांसी का तेल और चूर्ण आयुर्वेद में इस्तेमाल होता रहा है। इस लेख में एक्सपर्ट की मदद से हम जानेंगे कि जटामांसी, स्ट्रेस और एंग्जाइटी को कैसे दूर करता है और इसका सेवन कैसे करें? इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
जटामांसी क्या है?
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जटामांसी एक खुशबूदार और कड़वे स्वाद वाली जड़ी-बूटी है। यह हिमालय के पहाड़ों में पाई जाती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए इसे फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें दिमाग को शांत करने वाले गुण होते हैं।
आयुर्वेद में इसका महत्व क्या है?
Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने बताया कि जटामांसी का सेवन करने से नाड़ी तंत्र पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। हाइपरएक्टिव लोगों के दिमाग को शांत करने के लिए यह एक फायदेमंद जड़ी-बूटी है।
- जटामांसी से पित्त दोष के कारण होने वाली एंग्जाइटी दूर होती है।
- जो लोग रिलैक्स नहीं हो पाते हैं, वो दिमाग की शांति के लिए जटामांसी का सेवन कर सकते हैं।
- जटामांसी से मसल्स में होने वाली स्टिफनेस दूर होती है।
- जटामांसी का सेवन करने से मसल्स रिलैक्स होती हैं।
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तनाव और एंग्जाइटी कम करने में जटामांसी की भूमिका
जटामांसी के सेवन आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से स्ट्रेस कम करने के लिए किया जाता है। कुछ स्टडीज में कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए भी इसके फायदे देखे गए हैं। जटामांसी में एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए गए हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी जटामांसी अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जटामांसी के सेवन से चिंता, नींद में परेशानी और एकाग्रता से जुड़ी समस्याओं में भी सुधार देखा गया है।
तनाव में सुधार के वैज्ञानिक प्रमाण
साल 2017 में ESSENCE (International Journal Of Environment, Rehabilitation And Conservation) में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जटामांसी की जड़ का अर्क स्ट्रेस के असर को कम करने में मदद कर सकता है। इसका संभावित कारण इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण बताए गए।
साल 2009 में Indian Journal Of Biochemistry & Biophysics में प्रकाशित एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जटामांसी के हाइड्रो-इथेनॉलिक अर्क में तनाव कम करने वाले गुण हो सकते हैं। इसका संभावित कारण इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण हैं, जो तनाव के दौरान होने वाले जैविक बदलावों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
अनिद्रा और नींद की गुणवत्ता में सुधार के वैज्ञानिक प्रमाण
साल 2015 में AYU (An International Quarterly Journal of Research in Ayurveda) में प्रकाशित एक अध्ययन में जटामांसी चूर्ण के सेवन से प्राथमिक अनिद्रा के मरीजों में नींद आने, नींद की अवधि और नींद में रुकावट जैसी समस्याओं में सुधार देखा गया। जिन लोगों ने इस अध्ययन में जटामांसी का सेवन किया उनकी नींद की अवधि में 48.25% तक सुधार देखा गया।
जटामांसी के सेवन का सही तरीका क्या है?
- Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने बताया कि वयस्कों को हम 2 से 4 ग्राम जटामांसी का सेवन करने की सलाह देते हैं। जटामांसी का सेवन काढ़ा या चूर्ण के रूप में किया जा सकता है। जटामांसी के चूर्ण को भिगोकर रात में रखें और सुबह गुनगुने पानी में मिलाकर काढ़ा बनाकर पिएं।
- जटामांसी को गुनगुने पानी और घी के साथ भी ले सकते हैं।
- जटामांसी का इस्तेमाल लंबे समय तक भी किया जा सकता है, लेकिन क्रोनिक बीमारियों के मरीजों को इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।
जटामांसी के उपयोग से जुड़े विशेषज्ञ सुझाव
जटामांसी का सेवन करने से पहले इन बातों का खास ख्याल रखें-
- Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने बताया कि अच्छी कंपनी की जटामांसी ही खरीदना चाहिए क्योंकि बाजार में नकली जटामांसी भी मिलता है जिसमें से तेल हटा दिया जाता है जिससे जड़ी-बूटी का असर कम हो जाता है।
- पुरुष और महिला दोनों ही इसका सेवन कर सकते हैं, लेकिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को जटामांसी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- लंबे समय तक केवल डॉक्टर की सलाह पर ही जटामांसी का सेवन किया जा सकता है।
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क्या जटामांसी के कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
- जटामांसी के सेवन से कुछ लोगों को पाचन समस्याएं जैसे अपच, गैस, पेट दर्द हो सकता है।
- किसी भी जड़ी-बूटी की तरह जटामांसी से भी कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है। त्वचा पर खुजली, चकत्ते या सूजन जैसे लक्षण नजर आएं, तो सेवन बंद कर दें।
- कुछ लोगों को जटामांसी के सेवन से लो बीपी की समस्या हो सकती है इसलिए बीपी के मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए।
जटामांसी को स्ट्रेस या एंग्जाइटी के इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि विशेषज्ञ की सलाह से इस्तेमाल की जाने वाली एक पारंपरिक औषधि के रूप में देखना चाहिए। इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।
निष्कर्ष:
जटामांसी का इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से मानसिक तनाव, बेचैनी और नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इसके तनाव कम करने वाले और एंटीऑक्सिडेंट गुणों के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। हालांकि, इसके प्रभावों की पुष्टि के लिए अभी और बड़े स्तर पर मानव अध्ययन की जरूरत है। जटामांसी का सेवन चूर्ण या काढ़े के रूप में किया जा सकता है। एक व्यक्ति 2 से 4 ग्राम मात्रा तक का सेवन कर सकता है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी क्रोनिक बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
FAQ
क्या जटामांसी का इस्तेमाल थायराइड में फायदेमंद है?
थायराइड हार्मोन के असंतुलन को ठीक करने में जटामांसी की प्रभाव को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। अगर आप थायराइड के मरीज हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर जटामांसी का सेवन करें।क्या जटामांसी को लंबे समय तक स्टोर करके रख सकते हैं?
जटामांसी के चूर्ण और जड़ को नमी, धूप और अधिक गर्मी से बचाकर रखना चाहिए। इसे साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। उत्पाद की पैकेजिंग पर दी गई एक्सपायरी डेट का पालन करें।
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Oct 02, 2026 17:11 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma
