बारिश के मौसम में शाम होते ही मच्छर घर में आने लगते हैं और इन मच्छरों को भगाने के लिए लोग अगरबत्ती या कॉइल जलाना शुरू कर देते हैं। इसकी मदद से कुछ समय के लिए मच्छरों से राहत मिल जाती है, लेकिन इससे निकलने वाला धुआं सेहत पर कितना असर डाल सकता है? यह जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या कॉइल के धुएं से आंखों और सांस की नली में जलन हो सकती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी समस्याएं हैं, तो इसका इस्तेमाल खास सावधानी से करना चाहिए।
कॉइल या अगरबत्ती का धुआं सेहत के लिए नुकसानदायक क्यों है?
Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या कॉइल जलने पर सिर्फ खुशबू ही नहीं, बल्कि धुआं भी निकलता है। इस धुएं में बहुत छोटे कण और जलने के दौरान बनने वाले दूसरे पदार्थ मौजूद हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति इस धुएं को सांस के साथ अंदर लेता है, तो कुछ लोगों को गले में खराश, खांसी या आंखों में जलन महसूस हो सकती है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि अगरबत्ती से मच्छर तो भागते हैं, लेकिन उसका धुआं सेहत को बिगाड़ सकता है।
क्या बंद कमरे में कॉइल जलाने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं?
Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, “अगर कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद हो, तो धुआं आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। ऐसे में कमरे में सो रहे व्यक्ति को आंखों में पानी आने, गले में जलन या खांसी की शिकायत हो सकती है। अगर पहले से सांस की बीमारी है, तो धुआं लक्षणों को बढ़ा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को कॉइल जलाने से गंभीर बीमारी हो जाएगी, लेकिन बंद कमरे में लंबे समय तक धुएं से जरूर बचना चाहिए।”
International Journal of Multidisciplinary Research and Growth Evaluation (IJMRGE) के मुताबिक, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या कॉइल जलने से निकलने वाला धुआं सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। कॉइल से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कण और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसे हानिकारक तत्व सांस लेने, हार्ट और न्यूरोलॉजिकल से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है।

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कॉइल से किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या कॉइल के धुएं से कुछ लोगों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा परेशानी हो सकती है।
- अस्थमा या सांस से जुड़ी समस्याएं
- एलर्जी से पीड़ित लोग
- बच्चे
- बुजुर्ग
- ऐसे लोग जिन्हें धुएं से पहले भी खांसी या आंखों में जलन हुई हो
कॉइल जलाने पर इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है कि अगर मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या कॉइल जलाने के बाद ये लक्षण महसूस हों, तो कॉइल न जलाएं और कमरे में ताजी हवा आने दें। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- लगातार खांसी या गले में खराश
- आंखों में जलन या पानी आना
- सांस लेने में परेशानी
- सीने में जकड़न या भारीपन
मच्छरों से बचने के लिए क्या करें?
Dr. Vineeta Singh Tandon सलाह देती हैं कि मच्छरों से बचाव के लिए सिर्फ धुआं करने वाली कॉइल या अगरबत्ती पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। घर और आसपास मच्छरों के पनपने की जगहों को कम करना भी जरूरी है।
- घर के आसपास गमलों, कूलर, बाल्टी या दूसरे बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
- पानी जमा हो तो उसे नियमित रूप से खाली करें या साफ करें।
- खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाने से भी मच्छरों को घर के अंदर आने से रोकने में मदद मिल सकती है।
- सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- जरूरत पड़ने पर ऐसे मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट लगाए जा सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Vineeta Singh Tandon सलाह देती हैं कि अगर कोई मच्छर भगाने के लिए कॉइल या अगरबत्ती इस्तेमाल करते हैं, तो उसे बंद कमरे में लंबे समय तक जलाकर रखने से बचें। कमरे में हवा के आने-जाने का इंतजाम रखें और धुएं के सीधे संपर्क से बचें। ऐसी चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना जरूरी है। कॉइल ऐसी जगह बिल्कुल न जलाएं, जहां आग लगने का खतरा हो। अगर इस्तेमाल के बाद किसी को खांसी, आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी होती है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है कि मच्छरों से बचाव जरूरी है, लेकिन घर में हवा की क्वालिटी का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कॉइल या अगरबत्ती जलाते समय धुएं को हल्के में लें। अगर किसी को कॉइल जलाने में परेशानी होती है, तो कॉइल या अगरबत्ती का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा, मच्छरों को पनपने की जगहों को खत्म करना, जाली और मच्छरदानी जैसे तरीकों को अपनाना चाहिए।
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FAQ
हर्बल या आयुर्वेदिक मच्छर अगरबत्ती क्या कॉइल से ज्यादा सुरक्षित होती हैं?
भले ही उनमें प्राकृतिक तेलों का इस्तेमाल दावा किया जाता हो, लेकिन जलने के बाद जो धुआं निकलता है, वह कार्बन मोनोऑक्साइड और बारीक राख होती है, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता ही है।लिक्विड वेपोराइजर (Liquid Vaporizers) और कॉइल में से फेफड़ों के लिए कौन कम हानिकारक है?
लिक्विड वेपोराइजर कम हानिकारक हैं, क्योंकि उनसे धुआं और कार्बन पार्टिकल्स नहीं होते। हालांकि, इनमें मौजूद सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स के कारण लंबे समय तक बंद कमरे में सांस लेने से सिरदर्द या माइग्रेन हो सकता है।
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Sep 17, 2026 19:31 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon