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कैसे पता चला कि मलेरिया एक मादा मच्छर के काटने से होता है? जानें इस खोज पर नोबेल मिलने की कहानी

बरसात में मलेरिया का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और ऐसे में इस बीमारी के बारे में जानकारी रखना बेहद जरूरी है। हालांकि, आज हम जानेंगे कि कौन है वो जिसने सबसे पहले पता किया कि मलेरिया मादा मच्छर के काटने से होता है?

बरसात में मलेरिया के मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस मौसम में इस मच्छर जनित बीमारी से बचना बेहद जरूरी है। हालांकि, आज हम मलेरिया मच्छर के इतिहास के बारे में जानेंगे। दरअसल, मलेरिया मच्छर के काटने से होता है, ये जानकारी तो सबके पास है लेकिन ये मादा मच्छर के काटने से फैलती है इसके बारे में लोगों के अंदर जानकारी की कमी है। आज हम इसी के इतिहास के बारे में जानेंगे कि कैसे पता चला कि मलेरिया एक मादा मच्छर के काटने से होता है (Who discovered malaria is transmitted by Anopheles)।

कैसे पता चला कि मलेरिया एक मादा मच्छर के काटने से होता है?

सर रोनाल्ड रॉस मुख्य रूप से मलेरिया फैलने के तरीके की खोज के लिए जाने जाते हैं। इस रिसर्च के लिए उन्हें 1902 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था। दरअसल, मलेरिया का मच्छर मादा है इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है।

भारत में हुई खोज

रॉस का जन्म 13 मई, 1857 को अल्मोड़ा, नेपाल में हुआ था। वे भारत में तैनात ब्रिटिश अधिकारी जनरल सर कैंपबेल क्ले ग्रांट रॉस की दस संतानों में सबसे बड़े थे। सर रोनाल्ड रॉस की रुचि बैक्टीरियोलॉजी में थी और इसी दौरान उन्होंने मलेरिया के कारणों पर रिसर्च की, जो उस समय भारत में बड़े पैमाने पर फैली बीमारी थी। उन्होंने पता लगाया कि यह बीमारी मच्छरों में पाए जाने वाले एक पैरासाइट से फैलती है, जिससे इसके इलाज और रोकथाम के बेहतर तरीके विकसित हो सके।

ऐसे पता चला कि मादा Anopheles के काटने से होता है मलेरिया

पहले माना जाता था कि बीमारियां दुर्गंध से फैलती हैं और मलेरिया दलदल से निकलने वाली गैसों के कारण होता है। लेकिन 1880 में चार्ल्स लुई अल्फोंस लैवरन ने मलेरिया के मरीजों के खून में परजीवियों (parasites) की खोज की।

1894 में, सर पैट्रिक मैनसन ने रोनाल्ड रॉस को यह दिखाया और सुझाव दिया कि इन परजीवियों को इंसानों तक फैलाने के लिए मच्छर जिम्मेदार हो सकते हैं। इस सिद्धांत को परखने के लिए 16 अगस्त 1897 को रॉस ने 'एनोफिलीज' (Anopheles) मच्छरों को एक मलेरिया रोगी का खून चूसने दिया।

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20 अगस्त को हुआ ऐतिहासिक खोज

20 अगस्त को, जब रॉस लगभग निराश हो चुके थे, तब एक मच्छर के पेट की जांच करते समय उन्हें मलेरिया के परजीवी काले कणों के रूप में मिले। यह इंसान और मच्छर के बीच की अहम कड़ी थी। इस खोज के कारण उन्होंने 20 अगस्त को "मॉस्किटो डे" यानी मच्छर दिवस का नाम दिया।

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कैसे पता चला कि मलेरिया का संक्रमण फैलता है?

बाद में, पिंजरे में बंद पक्षियों और 'क्यूलेक्स' (Culex) मच्छरों का उपयोग करके, रॉस ने साबित किया कि परजीवी मच्छर के पेट से उसकी लार ग्रंथियों (salivary glands) में जाते हैं और फिर काटने से दूसरे जीवों में फैलते हैं। 1898 में जियोवानी ग्रासी ने 'एनोफिलीज' मच्छरों और मनुष्यों के बीच भी इसी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक साबित किया।

रॉस के इस सिद्धांत के लिए मिला उन्हें Noble Prize in Medicine

रॉस ने मलेरिया को खत्म करने के लिए यह सिद्धांत दिया कि मच्छरों को संक्रमित इंसानों से दूर रखा जाना चाहिए। उनके इस शानदार काम के लिए उन्हें 1902 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला (Nobel prize for malaria) और 1911 में 'नाइट' (Knight) की उपाधि से सम्मानित किया गया।

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प्रोफेसर तू ने बदली मलेरिया के इलाज की कहानी

जर्नल Springer Nature में प्रकाशित इस रिसर्च पेपर से जानकारी मिलती है कि प्रोफेसर तू (Professor Tu) और उनकी टीम ने ही सबसे पहले मलेरिया के इलाज के लिए पौधे से 'आर्टेमिसिनिन' (artemisinin) नाम की दवा खोजी और इंसानों पर इसका सबसे पहला सफल परीक्षण किया। इस दवा का आम लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा और तुरंत असर दिखा है। इसके इस्तेमाल से दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकी है। इस खोज ने मलेरिया के इलाज और इस पर होने वाली रिसर्च का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है।

निष्कर्ष:

तो इस तरह पता चला कि मलेरिया एक मादा मच्छर के काटने से फैलता है। हालांकि, हर किसी को मच्छरों के मौसम में इस बीमारी से बचना चाहिए जो कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। इसलिए घर के आस-पास सफाई रखें, कहीं भी साफ पानी भरने न दें और बरसात में दिन के समय किसी भी ज्यादा घने पेड़-पौधों वाले इलाके में जा रहे हैं तो मच्छर भगाने वाली क्रीम (Repellent Cream) लगाकर जाएं।

FAQ

  • मलेरिया बुखार कितने दिनों तक रहता है?

    मलेरिया बुखार आमतौर पर 2 से 5 दिनों तक रहता है और इलाज शुरू होने के बाद भी पूरी तरह ठीक होने में 7 से 14 दिन लग सकते हैं। 
  • मलेरिया रोग से शरीर का कौन सा अंग प्रभावित होता है?

    मलेरिया रोग से मुख्य रूप से रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन को प्रभावित करता है। इससे प्लीहा (Spleen) और लिवर भी प्रभावित होते हैं।

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Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 04, 2026 19:49 IST

    Published By : Pallavi Kumari

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