शाम ढलने के साथ मुंह का स्वाद भी बदलने लगता है और कुछ चटपटा और तीखा खाने का मन करता है। नमकीन, चाट, मोमोज, पकौड़े, चिप्स या कोई तीखी-चटपटी चीज खाने की क्रेविंग शाम के समय बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है। कई लोगों को दिन के समय नमकीन या मसालेदार खाने की तेज क्रेविंग महसूस होती है। इसका कनेक्शन सिर्फ स्वाद से नहीं, बल्कि रूटीन, नींद, तनाव और हार्मोन्स से भी होता है। शाम के समय शरीर में एनर्जी का लेवल और ब्लड शुगर लेवल कम होने लगता है, जिससे दिमाग में तुरंत एनर्जी पाने के लिए ऐसी चीजों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आइए, दिल्ली की क्लिनिकल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा से जानते हैं कि शाम को चटपटा खाने की क्रेविंग क्यों होती है?
शाम के समय नमकीन या चटपटा खाने की क्रेविंग के कारण
साल 2013 में Obesity Research Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, भूख का स्तर शाम के समय सबसे ज्यादा होता है, जबकि सुबह इसका लेवल सबसे कम होता है। इसी कारण कई लोग सुबह के समय कम और शाम को ज्यादा भोजन करते हैं। शाम के समय मीठे, नमकीन और स्टार्चयुक्त हाई एनर्जी वाले फूड्स खाने की इच्छा होती है। शाम के समय भूख का बढ़ना पुराने समय में फायदेमंद माना रहा होगा, लेकिन आज के समय में यह मोटापे के बढ़ते जोखिम का कारण बन सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, शाम को चटपटा खाने की क्रेविंग होने के ये कारण हो सकते हैं।
1. दिनभर कम खाना हो सकता है कारण
अगर सुबह का नाश्ता हल्का किया हो, दोपहर में खाना कम मात्रा में लिया या खाने के बीच लंबा गैप रहा हो तो शाम तक शरीर को एनर्जी की ज्यादा जरूरत महसूस हो सकती है। ऐसे समय में दिमाग जल्दी संतुष्टि देने वाले और स्वादिष्ट खाने की ओर आकर्षित हो सकता है।
खासकर अगर आपको दिनभर पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर नहीं मिले हैं तो शाम की भूख ज्यादा तेज लग सकती है। सिर्फ मन होने के कारण इसे रोकने के बजाय पूरे दिन भोजन को संतुलित करना ज्यादा सही तरीका है।
2. शाम की चाय और स्नैकिंग की आदत
कई घरों में शाम की चाय के साथ कुछ नमकीन या चटपटा खाने की आदत सालों से बनी होती है। ऐसे में दिमाग धीरे-धीरे एक खास समय को खाने के साथ जोड़ लेता है। ऐसे में शाम का समय संकेत बनता है, चाय या काम से ब्रेक ट्रिगर बनता है और नमकीन खाने से मिलने वाला स्वाद और संतुष्टि प्रतिक्रिया बन जाती है। इसलिए, कई बार भूखा न होने पर भी स्नैक्स खाने का मन करता है।
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3. तनाव और मानसिक थकान
दिनभर काम, पढ़ाई, ट्रैफिक या घरेलू जिम्मेदारियों के बाद शाम तक मानसिक थकान बढ़ सकती है। तनाव की स्थिति में कुछ लोगों को ज्यादा स्वादिष्ट, नमकीन, मीठे या फैट से भरपूर फूड्स खाने की क्रेविंग हो सकती है। चटपटा खाना खाने से कुछ समय के लिए मूड और संतुष्टि का अनुभव बढ़ सकता है। यही कारण है कि तनाव में व्यक्ति नॉर्मल भोजन की तुलना में स्नैक्स ज्यादा खाना पसंद करता है।
4. नींद की कमी का असर
अगर आपकी नींद लगातार कम हो रही है तो भूख और खाने की क्रेविंग को कंट्रोल करने वाली प्रणालियां प्रभावित हो सकती हैं। नींद की कमी को ज्यादा कैलोरी वाले फूड्स की बढ़ी हुई क्रेविंग से जोड़ा गया है। इसलिए, अगर रोज शाम को बहुत तेज क्रेविंग होती है, तो सिर्फ खाने की आदत पर फोकस न करें। यह भी देखें कि आप रात में कितने घंटे सो रहे हैं और आपकी नींद की क्वालिटी कैसी है।

क्या नमक की क्रेविंग का मतलब सोडियम की कमी है?
न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा का कहना है कि नमकीन खाने की इच्छा को तुरंत शरीर में सोडियम की कमी का संकेत मानना सही नहीं है। आमतौर पर, हेल्दी लोगों में सिर्फ नमकीन खाने की क्रेविंग का मतलब यह नहीं होता है कि शरीर को ज्यादा नमक की जरूरत है। इसके विपरीत, पैकैज्ड नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और कई प्रोसेस्ड फूड्स में सोडियम काफी ज्यादा हो सकता है। बार-बार ऐसे फूड्स खाने से कुल सोडियम सेवन बढ़ सकता है।
क्रेविंग को कैसे कंट्रोल करें?
न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, शाम की क्रेविंग को पूरी तरह दबाने के बजाय आप उसे बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं, जैसे-
- दोपहर के भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर शामिल करें।
- दो टाइम के खाने के बीच में अंतर बहुत ज्यादा न रखें।
- शाम के लिए पहले से पौष्टिक विकल्प तैयार करें, जिसमें भुना चना, मखाना, बिना ज्यादा नमक वाले नट्स, दही और फल खाएं।
- अगर चटपटा खाने का मन हो तो नींबू, धनिया, जीरा और सीमित मसालों से स्वाद बढ़ाया जा सकता है।
- पैकेट से सीधे नमकीन खाने के बजाय एक छोटी कटोरी में सीमित मात्रा निकालें। इससे अनजाने में ज्यादा खाने की संभावना कम हो सकती है।
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डॉक्टर से सलाह कब लेनी चाहिए?
कभी-कभी नमकीन या चटपटा खाने की क्रेविंग होना नॉर्मल होता है। हालांकि, अगर क्रेविंग बहुत ज्यादा, लगातार या असामान्य हो और इसके साथ ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब आना, कमजोरी, चक्कर, वजन में अचानक बदलाव या अन्य परेशानियां हों तो डॉक्टर से बात करना सही है। इसी तरह अगर खाने की क्रेविंग के कारण बार-बार बहुत ज्यादा खाना या भोजन को लेकर कंट्रोल खोने जैसी स्थिति बन रही हो तो एक्सपर्ट की मदद लेना जरूरी हो सकता है।
निष्कर्ष
न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा का कहना है कि शाम की नमकीन या चटपटी चीजें खाने की क्रेविंग के पीछे एक ही कारण नहीं होता है। दिनभर कम खाना, भोजन के बीच लंबा अंतर, तनाव, मानसिक थकान, नींद की कमी और स्नैकिंग की आदत इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं। सिर्फ नमक की कमी को इसका कारण मानना सही नहीं है। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद लेना, नियमित रूप से पानी पीना और पहले से तैयार हेल्दी स्नैक्स इस क्रेविंग को संभालने में मदद कर सकते हैं। कभी-कभार पसंद की चीज सीमित मात्रा में खाना भी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है।
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FAQ
क्या शाम की क्रेविंग का संबंध शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी से है?
हां, कई बार यह शरीर में मिनरल्स या पानी की कमी का संकेत हो सकता है। अगर आपने दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया है या संतुलित डाइट नहीं लिया है तो इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाने के लिए नमकीन चीजों को खाने की इच्छा बढ़ जाती है।शाम की अनहेल्दी क्रेविंग से बचने के लिए क्या खाया जा सकता है?
नमकीन या चटपटा खाने की क्रेविंग को शांत करने के लिए आप कुछ हेल्दी और टेस्टी विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें मखाने, भुने हुए चने या मूंगफली, रोस्टेड सीड्स आदि का सेवन कर सकते हैं।
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Aug 14, 2026 16:54 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Aug 14, 2026 16:54 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dt Rakshita Mehra