Fri Oct 9, 2026 | 08:16 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

ठंड न होने पर भी हाथ-पैर ठंडे क्यों रहते हैं? डॉक्टर से जानें

नॉर्मल मौसम में भी हाथ-पैर ठंडे रहने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शरीर की टेंपरेचर को नेचुरली बैलेंस करने की प्रक्रिया और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं, लेकिन ध्यान रहे लगातार ऐसी स्थिति बनी रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
ठंड न होने पर भी हाथ-पैर ठंडे क्यों रहते हैं? डॉक्टर से जानेंठंड न होने पर भी हाथ-पैर ठंडे क्यों रहते हैं? डॉक्टर से जानें

कई लोगों को नॉर्मल मौसम होने या गर्मी के मौसम के बाद भी हाथों-पैरों के ठंडे होने की समस्या होती है। इसको लेकर कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर बिना ठंड के हाथ-पैर ठंडे क्यों रहते हैं? बता दें, कुछ लोगों में यह आम परेशानी हो सकती है, जबकि कुछ स्थितियों में लोगों को ये समस्या स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। ऐसे में आइए Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV hospital, Bengaluru से जानें इसके कारणों के बारे में।

बिना ठंडे मौसम के हाथ-पैर ठंडे क्यों रहते हैं?

डॉ. अरविंद के अनुसार, हाथ-पैर ठंडे होने का मतलब हमेशा कोई बीमारी नहीं होती है। शरीर नेचुरली अपने तापमान को नियंत्रित करता है। इसके लिए वह शरीर के बाहरी हिस्सों (जैसे हाथ-पैर) की ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है, जिससे वहां ब्लड फ्लो कम हो जाता है और शरीर के मुख्य हिस्से (कोर बॉडी) की ओर ज्यादा ब्लड भेजा जाता है। इसी वजह से कुछ लोगों के हाथ-पैर नॉर्मल तापमान में भी दूसरों के मुकाबले में ज्यादा ठंडे महसूस हो सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: हाथ-पैर का नीला पड़ना: डॉक्टर से जानें ऐसा होना नॉर्मल है या नहीं

बिना ठंड के हाथ-पैर ठंडे होने के कारण

डॉ. अरविंद कहते हैं, बिना ठंडे मौसम के हाथ-पैरों के ठंडे होने की समस्या कुछ मेडिकल कंडीशन्स के कारण हो सकती हैं। जैसे -

1. रेनॉड्स फेनोमेनन के कारण

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने से कभी-कभी किसी छिपी हुई समस्या का संकेत मिल सकता है, जैसे रेनॉड फेनोमेनन (Raynaud's phenomenon) की समस्या।

इस समस्या के कारण उंगलियों और पैर की उंगलियों की ब्लड वेसल्स बहुत ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। लोगों को महसूस हो सकता है कि उनकी उंगलियां या पैर की उंगलियां असामान्य रूप से ठंडी हो रही हैं और उनका रंग बदल रहा है - अक्सर सफेद, नीला या बैंगनी और ब्लड फ्लो बेहतर होने पर वे नॉर्मल हो जाती हैं। स्ट्रेस या तापमान में बदलाव से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते हैं। ऐसे में बार-बार ऐसे बदलाव होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

Cleveland Clinic के अनुसार, कई बार रेनॉड फेनोमेनन की समस्या में हाथ-पैरों के ठंडे होने, रंग में बदलाव होने, हाथ-पैरों में झनझनाहट होने और सुन्नपन होने जैसी समस्याएं होती हैं।

why does vision appear blurry for a few seconds after opening eyes in the morning  1why does vision appear blurry for a few seconds after opening eyes in the morning 1

2. थायराइड के कारण

थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म और तापमान को नियंत्रित करने में अहम भूमिता निभाता है। ऐसे में अंडरएक्टिव थायराइड (थायराइड का कम एक्टिव होने) की स्थिति में कुछ लोगों को नॉर्मल टेंपरेचर के कारण भी ठंड ज्यादा महसूस हो सकती है।

अगर ठंडे हाथ-पैर के साथ लगातार थकान, कमजोरी या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

3. एनीमिया की वजह से

खून की कमी यानी एनीमिया के कारण भी कभी-कभी लोगों को हाथों-पैरों के ठंडे होने की समस्या हो सकती है, खासकर अगर इसके साथ थकान, कमजोर या चक्कर आने जैसे लक्षण दिखते हैं। एनीमिया की समस्या अधिक होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

इसे भी पढ़ें: ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर रखने के लिए नहाने से पहले सिर्फ 10 मिनट करें शरीर की मालिश, मिलेंगे कई फायदे

4. ब्लड सर्कुलेशन की कमी

शरीर में ब्लड सर्कुलेशन की कमी के कारण भी लोगों को हाथ-पैर ठंडे हो सकते हैं। ब्लड सर्कुलेशन की कमी, जिसमें पेरिफेरल आर्टरीज (शरीर के बाहरी हिस्सों की धमनियों) को प्रभावित करने वाली स्थितियां शामिल हैं। इनके कारण भी हाथ-पैर ठंडे हो सकते हैं।

डॉ. अरविंद के अनुसार, हाथ और पैरों तक पर्याप्त ब्लड सर्कुलेशन न पहुंचने पर ये हिस्से नॉर्मल से ज्यादा ठंडे महसूस हो सकते हैं।

5. नसों के कमजोर होना के कारण

नसों के कमजोर होने या ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याएं होने के कारण शरीर के किसी भी हिस्से में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इसके कारण भी हाथ-पैर ठंडे हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को ठंडापन के साथ-साथ दर्द, सुन्नपन या त्वचा के रंग में बदलाव भी दिखाई दे सकता है। ध्यान रहे, अगर समस्या बार-बार हो रही हो या धीरे-धीरे बढ़ रही हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अरविंद के अनुसार, कभी-कभार हाथ-पैर ठंडे होना और कुछ समय बाद नॉर्मल रूप से गर्म हो जाना आमतौर पर गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता है, लेकिन अगर गर्म वातावरण में रहने के बाद भी हाथ-पैर लगातार ठंडे रहते हैं, गर्म होने में बहुत ज्यादा समय लेते हैं, सुन्न होने या उनमें दर्द होता है या रंग में काफी बदलाव दिखने जैसी कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

खासकर, अगर अचानक से बहुत अधिक ठंडा महसूस होने, किसी एक अंग में दर्द, पीलापन या सुन्नपन होने की स्थिति में डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति ब्लड सर्कुलेशन में आई गंभीर रुकावट का संकेत हो सकती है।

निष्कर्ष

गर्मी या नॉर्मल तापमान में भी हाथ-पैर ठंडे रहने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार यह समस्या शरीर में तापमान को नियंत्रित करने की प्रक्रिया हो सकती हैं, तो कई बार यह रेनॉड्स फेनोमेनन, थायराइड, नसों के कमजोर होने और एनीमिया या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या के कारण हो सकती है। ध्यान रहे, अगर हाथों-पैरों के ठंडे रहने के साथ-साथ दर्द, सुन्नपन और त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, ताकि किसी भी गंभीर समस्या से समय रहते बचा जा सके।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • हाथ पैर ठंडे रहने के क्या कारण हैं?

    शरीर के अंगों में ठीक से ब्लड सर्कुलेशन न होने, एनीमिया, थायराइड या विटामिन की कमी होने जैसी समस्याओं के कारण हाथ पैर के ठंडे होने की समस्या हो सकती है।
  • हाथों-पैरों में दर्द क्यों होते हैं?

    हाथों-पैरों में दर्द होने की समस्या पोषण की कमी, मांसपेशियों में खिंचाव, गठिया, नसों की कमजोरी, थकान, डायबिटीज, थायराइड और नसों में कमजोरी की समस्या के कारण हो सकता है।

Read Next

→ शराब पीने से सेक्स परफॉर्मेंस बेहतर होती है या खराब? डॉक्टर से जानें अल्कोहल और यौन क्षमता का पूरा सच

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 21, 2026 18:43 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr. Aravinda S N