Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Lokesh Bahadur Singh , Sr. Consultant Dental Surgeon

दांत के सड़ने पर रूट कैनाल की जरूरत कब पड़ती है? बता रहे हैं देहरादून के डॉ. लोकेश

दांतों की सड़न के पल्प तक पहुंचने पर रूट कैनाल की जरूरत होती है, जबकि छोटी कैविटी का इलाज सिंपल फिलिंग से संभव है। नियमित डेंटल चेकअप और सही देखभाल से दांतों को हेल्दी रखा जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

आज के समय में दांतों की समस्या आम हो चुकी है। यह समस्या अक्सर अधिक मीठा खाने, सही तरीके से ब्रश न करने, दांतों की सफाई न करने और दांतों में सड़न होने की समस्या हो सकती है। शुरुआत में ये समस्याएं छोटी लग सकती हैं, लेकिन इनके लंबे समय तक बने रहने और इसका इलाज न कराने से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में दांतों की समस्या से राहत के लिए लोगों को कई बार रूट कैनाल जैसे इलाज को कराने की सलाह दी जाती है, लेकिन इससे किस स्थिति में कराना चाहिए? और क्या इसको कराना जरूरी है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है। आइए इस बारे में देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, डेंटल सर्जन डॉ. लोकेश बहादुर सिंह से जानें।

दांतों की सड़न में रूट कैनाल कब जरूरी होती है?

डॉ. लोकेश आगे कहते हैं, रूट कैनाल की जरूरत तभी होती है, जब दांतों की सड़न पल्प तक पहुंच गई हो, जो दांत के अंदर का सॉफ्ट टिशू होता है, जिसमें नसें और खून की नसें होती हैं। इसलिए नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराने की सलाह दी जाती है। समय से जांच कराने से छोटी कैविटी का इलाज कराना आसान हो जाता है और रूट कैनाल जैसी प्रक्रिया से बचा जा सकता है।

डॉ. लोकेश आगे कहते हैं, जब बैक्टीरिया पल्प वाले हिस्से तक पहुंच जाते हैं, तो वहां इंफेक्शन या सूजन हो सकती है। ऐसी स्थिति में सिर्फ फिलिंग करना पर्याप्त नहीं होता है, क्योंकि इंफेक्शन दांत के अंदर तक फैल चुका होता है। ऐसे इंफेक्शन से बचने के लिए सड़े हुए हिस्से को हटाकर दांत को बचाने के लिए रूट कैनाल का इलाज किया जाता है।

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रूट कैनाल कराने से क्या होता है?

साल 2025 में Brazilian Oral Research में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, रूट कैनाल का इलाज (RCT) करवाने से मरीजों की ओरल हेल्थ और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ।

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क्या हर कैविटी में रूट कैनाल की जरूरत होती है?

डॉ. लोकेश बहादुर सिंह के अनुसार, "हर कैविटी में रूट कैनाल की जरूरत नहीं होती है। अगर दांतों की सड़न का शुरुआत में पता लगा लिया जाए, तो ज्यादातर कैविटी का इलाज सिंपल फिलिंग से किया जा सकता है। इस स्थिति में सड़े हुए हिस्से को हटाकर उस हिस्से में फिलिंग की जाती है, जिससे दांत सुरक्षित रहते हैं और आगे नुकसान नहीं होता है।"

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. लोकेश बताते हैं, जब दांत के अंदर इंफेक्शन बढ़ जाता है, तब शरीर कुछ संकेत देने लगता है, लेकिन हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में बहुत कम लक्षण हो सकते हैं। जैसे -

  • दांत में लगातार या तेज दर्द होना।
  • खाना चबाते समय या दांत पर दबाव पड़ने पर दर्द महसूस होना।
  • गर्म या ठंडी चीज के प्रति सेंसिटिविटी होना।
  • दांत या मसूड़ों के आसपास सूजन आना।
  • कभी-कभी मसूड़ों पर छोटा सा दाना या फुंसी बनना, जिससे कभी-कभी मवाद निकल सकता है।

कुछ मामलों में इंफेक्शन होने के बाद कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए सिर्फ दर्द न होने का मतलब यह नहीं कि दांत पूरी तरह हेल्दी हैं।

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नियमित जांच और एक्स-रे क्यों हैं जरूरी?

डॉ. लोकेश के अनुसार, दांतों की कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें सिर्फ देखकर पहचानना आसान नहीं होता है। कई बार दांत के अंदर सड़न बढ़ रही होती है, लेकिन व्यक्ति को दर्द महसूस नहीं होता है। ऐसी स्थिति में नियमित रूप से डेंटल चेकअप और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार एक्स-रे की मदद से यह पता लगा सकते हैं कि सड़न कितनी गहराई तक पहुंच गई है। अगर समस्या समय रहते पकड़ में आ जाए, तो इलाज भी आसान और कम परेशानियां होती है।

रूट कैनाल कैसे किया जाता है?

डॉ. लोकेश का कहना है, रूट कैनाल के इलाज के दौरान इंफेक्शन वाले पल्प को हटा दिया जाता है, दांत के अंदर के हिस्से को ध्यान से साफ और डिसइंफेक्ट किया जाता है और फिर बैक्टीरिया को वापस आने से रोकने के लिए उसे सील कर दिया जाता है। अक्सर दांत को बाद में उसकी मजबूती वापस लाने के लिए क्राउन से ढक दिया जाता है।

क्या रूट कैनाल में दांत निकाला जाता है?

डॉ. लोकेश बताते हैं, रूट कैनाल का मतलब आपके असली दांत को निकालना नहीं, बल्कि उसे बचाना होता है। दांतों की सड़न का इलाज जितनी जल्दी होगा, उतनी ही ज्यादा संभावना है कि एक सिंपल फिलिंग ही काफी होगी और रूट कैनाल से बचा जा सकेगा। ऐसे में दांत को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें।

दांतों को सड़न से बचाने के लिए क्या करें?

दांतों को हेल्दी रखने और इनको सड़न से बचाने के लिए कुछ आसान आदतों को अपनाया जा सकता है। जैसे -

  • दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करें
  • मीठी और चिपचिपी चीजों का ज्यादा सेवन करने से बचें।
  • खाने के बाद मुंह की सफाई का ध्यान रखें।
  • नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं।
  • किसी भी तरह का दर्द, सेंसिटिविटी या सूजन होने पर इलाज में देरी न करें।

इन छोटी-छोटी सावधानियों से दांतों की सड़न को शुरुआत में ही रोका जा सकता है और दांतों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

निष्कर्ष

हर कैविटी का इलाज रूट कैनाल नहीं होता। अगर दांतों की सड़न समय रहते पहचान ली जाए, तो सिंपल फिलिंग से ही दांतों का इलाज किया जा सकता है, लेकिन जब इंफेक्शन दांत के अंदर मौजूद पल्प तक पहुंच जाता है, तब रूट कैनाल की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए दांतों में दर्द, लंबे समय तक सेंसिटिविटी रहने, सूजन या अन्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दांतों से जुड़ी समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं, ताकि आगे चलकर किसी भी गंभीर समस्या से समय रहते बचा जा सके। इसके अलावा, दांतों से जुड़ी समस्या महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • रूट कैनाल क्यों करवाई जाती है?

    दांतों के अंदरूनी हिस्से (जिसे पल्प कहा जाता है) में गंभीर इंफेक्शन, सूजन और नुकसान से होने की स्थिति में इस समस्या से राहत के लिए रूट कैनाल करवाई जाती है।
  • दांतों की सड़न के लक्षण क्या हैं?

    दांतों की सड़न की समस्या होने पर दांतों के रंग में बदलाव आने, दांतों में सेंसिटिविटी होने, दांत में दर्द होने, चबाने में परेशानी, मुंह में सूजन आने और मुंह से बदबू आने जैसी समस्याएं हो सकती है।

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 31, 2026 09:27 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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