हर माता-पिता अपने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उनके स्वास्थ्य पर खास ध्यान रखते हैं, लेकिन कई बार छोटी-छोटी आदतें बच्चों के दांतों की सेहत पर बड़ा असर डाल सकती है। पेरेंट्स बच्चों के स्वास्थ्य पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उनके दांतों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं। जिसके कारण कई बच्चों में दांतों की सड़न की समस्या हो सकती है। यह परेशानी धीरे-धीरे शुरु होती है और समय पर ध्यान न देने से दांतों के नॉर्मल विकास पर असर डाल सकती है। ऐसे में कई बार पेरेंट्स के मन में सवाल आता है कि इससे बचने के लिए क्या करें? ऐसे में आइए देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डेंटल सर्जन डॉ. लोकेश बहादुर सिंह से जानें।
बेबी बॉटल टूथ डिके क्या है?
डॉ. लोकेश बताती हैं, बेबी बॉटल टूथ डिके छोटे बच्चों में होने वाली दांतों की सड़न की एक समस्या है। यह तब होती है, जब बच्चे के दांत लंबे समय तक दूध, फॉर्मूला मिल्क और किसी भी मीठे ड्रिंक के संपर्क में रहते हैं। खासकर जब बच्चा बोतल मुंह में लेकर सो जाता है, तब दांतों पर मौजूद तरल लंबे समय तक बना रहता है और सड़न का खतरा बढ़ जाता है।
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बच्चों को बेबी बॉटल टूथ डिके की समस्या क्यों होती है?
डॉ. लोकेश के अनुसार, "बच्चों के बोतल से दांत खराब होना एक ऐसी चीज हैं, जो मैं अक्सर बहुत छोटे बच्चों में देखता हूं और अच्छी बात यह है कि इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। ऐसा नॉर्मली तब होता है, जब बच्चे के दांत लंबे समय तक दूध, फॉर्मूला, जूस या दूसरी मीठी ड्रिंक्स के संपर्क में रहते हैं, खासकर अगर वे बोतल लेकर सोते हैं। दूध हेल्दी होता है, लेकिन इसमें नेचुरल शुगर होती है। मुंह में रहने वाले बैक्टीरिया इन शुगर को खाते हैं और एसिड बनाते हैं। ये एसिड धीरे-धीरे दांतों की बाहरी परत (जिसे इनेमल कहते हैं) को कमजोर कर देते हैं, जिससे कैविटी हो जाती है। जिससे बच्चों के दांत धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं।"
साल 2022 में International Journal of Clinical Pediatric Dentistry में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, छोटे बच्चों के दांतों में होने वाली सड़न को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है- जैसे बेबी बॉटल टूथ डिके, बॉटल कैरीज, रैम्पेंट कैरीज या बच्चों की कैरीज। इन सभी नामों का मतलब एक ही समस्या से है। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बच्चों के खाने-पीने और दूध पीने की गलत आदतों की वजह से ही उनके दांतों में सड़न (कैरीज) की समस्या होती है।
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क्या सिर्फ परमानेंट दांत हैं जरूरी?
डॉ. लोकेश आगे कहते हैं, कई माता-पिता यह सोचते हैं कि दूध के दांत तो कुछ सालों बाद अपने आप गिर जाएंगे और ये टेम्परेरी हैं, इसलिए उनमें कैविटी होना ज्यादा चिंता की बात नहीं है, लेकिन यह सोचना सही नहीं है। बच्चों के दांत उनको ठीक से चबाने, साफ बोलने और पक्के दांतों के लिए जगह बनाने में मदद करते हैं। अगर वे बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं, तो यह आगे चलकर बच्चे की ओरल हेल्थ पर असर डाल सकता है।
किन आदतों से बढ़ सकता है दांतों के खराब होने का खतरा?
डॉ. लोकेश आगे बताती हैं, कुछ आदतों के कारण बेबी बॉटल टूथ डिके का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों को दूध, फॉर्मूला मिल्क या मीठी ड्रिंक्स की बॉटल के साथ सुलाना। इसके कारण मुंह में मौजूद बैक्टीरिया धीरे-धीरे बच्चों के दांतों को कमजोर और मसूड़ों सड़न पैदा होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
बच्चों के दांतों को नुकसान से बचाने के लिए क्या करें?
डॉ. लोकेश का कहना है, बेबी बॉटल टूथ डिके की समस्या से बचाव के लिए पेरेंट्स को बच्चों से जुड़ी कुछ आसान बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। इनसे बच्चों के दांतों को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
बच्चे को सोते समय बोतल न दें, अगर किसी कारण से बोतल देना जरूरी हो, तो उसमें सिर्फ सादा पानी रखें।
बच्चे के दांत निकलने से पहले भी उसके मसूड़ों की नियमित सफाई करनी चाहिए। इससे मुंह की सफाई बनी रहती है।
जैसे ही बच्चे का पहला दांत निकलता है, तो उसे उम्र के हिसाब से फ्लोराइड टूथपेस्ट से हल्के हाथों से ब्रशिंग शुरू करें।
ध्यान रहे, बच्चे के सही तरीके से रोजाना दांत साफ करने की आदत आगे चलकर में दांतों की सुरक्षा में मदद करती है।
नियमित दांतों की जांच कराना है जरूरी?
डॉ. लोकेश बताते हैं, बच्चे के पहले जन्मदिन के आसपास नियमित रूप से डेंटल विजिट भी समस्याओं का पता लगाने में मदद करती है। शुरुआती जांच के दौरान अगर कोई समस्या बढ़ रही हो, तो उसे समय रहते पहचाना जा सकता है। इससे परेशानी बढ़ने, दर्द होने या ज्यादा कॉम्प्लिकेशन इलाज की जरूरत पड़ने की संभावना कम हो सकती है।
डॉ. लोकेश आगे कहते हैं, अगर माता-पिता शुरुआत से ही बच्चों के दांतों की सफाई, सही खान-पान और नियमित देखभाल पर ध्यान दें, तो बच्चे की ओरल हेल्थ बेहतर बनी रह सकती है। बच्चों से जुड़ी छोटी-छोटी सावधानियां आगे चलकर बड़ी समस्याओं से बचाने में मदद करती हैं।
निष्कर्ष
छोटे बच्चों के दांतों के खराब होने की समस्या को बेबी बॉटल टूथ डिके कहा जाता है। इस समस्या को सही समय से अपनाई गई अच्छी आदतों से रोका जा सकता है। ये समस्या से बचने के लिए बच्चे को बोतल के साथ सोने की आदत से बचाना, दांत आने से पहले मुंह की सफाई शुरू करना और पहले जन्मदिन से नियमित दांतों की जांच कराने जैसी आदतों को अपनाने से बच्चे के दांतों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, बच्चे में दांतों से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
बच्चे को बोतल से दूध पिलाने के क्या नुकसान हैं?
बच्चे को बोतल से दूध पिलाने से इंफेक्शन का खतरा होने, दांतों में सड़न होने और पाचन से जुड़ी समस्या होने जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में बच्चे को लंबे समय तक दूध न पिलाएं।बच्चे के दांतों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
बच्चों के दांतों को स्वस्थ रखने के लिए 6 महीने से उनके मुंह और मसूड़ों की सफाई शुरु करें, सोते वक्त बोतल न दें, खान-पान का ध्यान रखें और डेंटिस्ट से सलाह लें।
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Jul 29, 2026 23:54 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Lokesh Bahadur Singh