Sat Nov 7, 2026 | 11:21 AM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

प्रेग्नेंसी में पानी कम हो जाए तो क्या करें और क्या नहीं? जानिए गर्भ में एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ाने के तरीके

गर्भावस्था में एमिनोटिक फ्लूइड का कम होना शिशु के विकास के लिए जोखिम भरा हो सकता है। सही समय पर डॉक्टर की सलाह, पर्याप्त पानी, बच्चे की हलचल पर ध्यान और संतुलित आहार से इस स्थिति को मैनेज किया जा सकता है। 
प्रेग्नेंसी में पानी कम हो जाए तो क्या करें और क्या नहीं? जानिए गर्भ में एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ाने के तरीकेप्रेग्नेंसी में पानी कम हो जाए तो क्या करें और क्या नहीं? जानिए गर्भ में एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ाने के तरीके

प्रेग्नेंसी के दौरान एमिनोटिक फ्लूइड शिशु के विकास और पोषण के लिए बहुत जरूरी होता है। अगर इस फ्लूइडका लेवल कम हो जाता है तो इसे मेडिकल की भाषा में ऑलिगोहाइड्रासनिओस कहा जाता है। यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में समय रहते सही कदम उठाने और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी होता है, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रह सकें। Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant- Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida का कहना है कि एमिनोटिक फ्लूइड का कम होना हमेशा एक जैसी स्थिति नहीं होती है। इसका महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेग्नेंसी कितने हफ्ते की है, पानी कितना कम है, इसका कारण क्या है और बच्चे की सेहत कैसी है? इसलिए एमिनोटिक फ्लूइड कम होने पर आपको कई बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है।

गर्भावस्था में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने के क्या कारण हो सकते हैं?

Dr. Anju Suryapani के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-

  • प्रेग्नेंसी में शरीर में पानी की कमी डिहाइड्रेशन का कारण बन सकती है, जिससे एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा में कमी आ सकती है।
  • एमनियोटिक फ्लूइड में छोटा या बड़ा छेद होने से पानी धीरे-धीरे बाहर निकल सकता है।
  • प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या भी बच्चे तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड और पोषण नहीं पहुंचता है, जिससे पानी की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
  • प्रेग्नेंसी का तय समय से आगे बढ़ना भी एमनियोटिक फ्लूइड की कमी का कारण बन सकता है।
  • कुछ मामलों में गर्भ में पल रहे भ्रूण के किडनी या मूत्र मार्ग के विकास में समस्या होने से भी एमनियोटिक फ्लूइड में कमी हो सकती है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर और कुछ अन्य मेडिकल कंडीशन होने पर भी एमनियोटिक फ्लूइड की कमी हो सकती है।

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एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर क्या करें?

Indian Journal of Obstetrics and Gynecology Research की स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान एमनियोटिक फ्लूइड का लेवल कम होने पर Phelan की तकनीक द्वारा अल्ट्रासाउंड से सटीक आकलन किया जाता है और जरूरत के अनुसार नॉन-स्ट्रेस व फीटल डॉपलर से भ्रूण के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसलिए, अगर आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में एमनियोटिक फ्लूइड कम बताया गया है तो घबराने के बजाय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए-

1. नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराएं

सबसे जरूरी चीज है कि आप अपनी रिपोर्ट को डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर प्रेग्नेंसी के हफ्ते, एमनियोटिक फ्लूइड इंडेक्स या सिंगल डिपेस्ट पॉकेट, बच्चे की ग्रोथ और अन्य जांचों के आधार पर आगे की प्लानिंग तय कर सकते हैं।

2. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। अगर शरीर में पानी की कमी है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी की मात्रा बढ़ा सकती हैं। हालांकि, सिर्फ ज्यादा पानी पीने से हर मामले में एमनियोटिक फ्लूइड नॉर्मल नहीं होता है।

3. बच्चे की हलचल पर ध्यान दें

प्रेग्नेंसी के उस स्टेज में जब आपको नियमित रूप से बच्चे की हलचल महसूस होने लगती है, उसके नॉर्मल मूवमेंट पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए। अगर हलचल कम लगे या नॉर्मल से अलग महसूस हो तो तुरंत अस्पताल में कंसल्ट करना चाहिए।

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4. डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच समय पर कराएं

डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा अल्ट्रासाउंड, बच्चे की ग्रोथ या NST जैसे टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इनसे बच्चे की स्थिति और गर्भ में उसकी सेहत की निगरानी करने में मदद मिलती है।

5. संतुलित और पौष्टिक आहार लें

अपने खाने में फल, सब्जियां, दालें, प्रोटीन और अन्य पौष्टिक फूड्स शामिल करें। संतुलित आहार लेना मां और होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बहुत जरूरी है।

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एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर क्या नहीं करना चाहिए?

Dr. Anju Suryapani बताती हैं कि एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर आपको कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए, जैसे-

  • एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ाने के नाम पर कोई दवा या घरेलू इलाज खुद से शुरू करने से बचना चाहिए।
  • एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा बढ़ाने के लिए सिर्फ पानी की मात्रा बढ़ाना काफी है, इस गलत धारणा पर विश्वास न करें।
  • बच्चे की कम हलचल को नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है।
  • योनि से पानी जैसा तरल निकलने का इंतजार न करें, क्योंकि यह एमनियोटिक फ्लूइड का रिसाव हो सकता है, इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • अल्ट्रासाउंड और फॉलो-अप लेना न छोड़ें, नियमित जांच से बच्चे कि स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलती है।
  • निष्कर्ष

एमनियोटिक फ्लूइड कम होने घबराना नहीं चाहिए, बल्कि इसके पीछे के असल कारण के बारे में जानने के लिए डॉक्टर से तुरंत कंसल्ट करना चाहिए। हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है और हर महिला का इलाज भी अलग हो सकता है। ध्यान रहे, अगर बच्चे की हलचल कम हो जाए, यानि से पानी की रिसाव हो, ब्लीडिंग हो या पेट में तेज दर्द महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।
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FAQ

  • एमनियोटिक फ्लूइड कितना होना चाहिए?

    नॉर्मल प्रेग्नेंसी में एमनियोटिक फ्लूइड का लेवल आमतौर पर 8 से 18 सेंटीमीटर के बीच होना चाहिए, जो प्रेग्नेंसी के हफ्तों के साथ बदलता रहता है।
  • एमनियोटिक फ्लूइड कम होने से क्या होता है?

    एमनियोटिक फ्लूइड कम होने से गर्भ में पल रहे शिशु के फेफड़ों, अंगों और मांसपेशियों के विकास में रुकावट आ सकती है और डिलीवरी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 07, 2026 10:31 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani