प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई प्रकार के बदलाव आते हैं। इस दौरान शरीर में काफी सारी चीजों का मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो जाता है और हार्मोनल हेल्थ में एक बड़ा शिफ्ट होता है। डिलवरी के बाद शरीर अचानक एक नए शिफ्ट में चला जाता है और कई बदलावों से गुजरता है। इसके अलावा नई मां पर ब्रेस्टफीडिंग और शिशु की सेहत के साथ अपने शरीर की भी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में कुछ महिलाओं को डिलवरी के बाद कार्पल टनल सिंड्रोम की दिक्कत हो सकती है जिसमें कलाई के पास सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है। ये समस्या क्यों होती है और इसका उपाय क्या है इस बारे में हमने Dr. Jasleen Kaur Malhotra, Senior Consultant - Gynecologist and Obstetrician at Cloudnine Group of Hospitals, Dwarka से बात की।
प्रेग्नेंसी के बाद हाथ की कलाई में दर्द क्यों होता है?
Dr. Jasleen Kaur कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के बाद हाथ की कलाई में दर्द के मुख्य दो कारण है। पहला कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal Tunnel Syndrome) और दूसरा मदर्स रिस्ट (De Quervain's Tenosynovitis)। मदर्स रिस्ट (De Quervain's Tenosynovitis) में बच्चे को बार-बार गोद में उठाने, दूध पिलाने या एक ही स्थिति में कलाई का अधिक इस्तेमाल करने से कलाई के टेंडन में सूजन आ जाती है मदर्स रिस्ट की समस्या धीमे-धीमे कम होने लगती है लेकिन कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal Tunnel Syndrome) एक मेडिकल कंडीशन है जिसमें आपको डॉक्टर की मदद लेनी पड़ सकती है।
क्या है Postpartum Carpal Tunnel Syndrome?
यह समस्या डिलीवरी के बाद होने वाली सूजन की वजह से होती है, जो आपके हाथ की मीडियन नर्व (median nerve) पर दबाव डाल सकती है और लक्षण और हाथ की कलाई में दर्ज पैदा कर सकती है। The Archives of Bones and Joint Surgery के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान पीठ के निचले हिस्से में दर्द के बाद कार्पल टनल सिंड्रोम (CTS) दूसरी सबसे आम मस्कुलोस्केलेटल समस्या है। रिसर्च से पता चलता है कि लगभग 30 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कार्पल टनल की समस्या होती है और लगभग 15 प्रतिशत माताओं को बच्चे के जन्म के एक महीने बाद भी यह समस्या बनी रहती है आसान भाषा में समझें तो डिलीवरी के बाद होने वाला कार्पल टनल सिंड्रोम (CTS) तब होता है जब आपकी कलाई में 'कार्पल टनल' नाम के एक संकरे रास्ते से गुजरने वाली मीडियन नर्व (तंत्रिका) दब जाती है। स दबाव के कारण हाथों या उंगलियों में सुन्नपन, झुनझुनी, जलन और कमजोरी महसूस होती है।
Postpartum Carpal Tunnel Syndrome के क्या कारण हो सकते हैं?
Postpartum Carpal Tunnel Syndrome के कई कारण हो सकते हैं जैसे प्रेग्नेंसी के दौरान वजन ज्यादा बढ़ जाना, डायबिटीज और गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान हार्मोनल बदलाव, शरीर में तरल पदार्थ का जमा होना और कैल्शियम मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाने की वजह से भी हो सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं ये कारण
1. डिलीवरी के बाद शरीर में फ्लूइड का जमा होना (एडिमा)
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में काफी मात्रा में फ्लूइड जमा हो जाता है और डिलीवरी के तुरंत बाद यह फ्लूइड खत्म नहीं होता। जमा हुआ यह फ्लूइड शरीर के सभी हिस्सों, जिसमें कलाई भी शामिल है, इसमें टिश्यू की सूजन का कारण बनता है। सूजन के कारण कार्पल टनल के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे सीधे मीडियन नर्व दब जाती है।
इसे भी पढ़ें: नॉर्मल डिलीवरी के लिए महिला का वजन कितना होना चाहिए? जानिए डॉक्टर से
2. हार्मोन में बदलाव
प्रेग्नेंसी के दौरान और उसके बाद एस्ट्रोजन और रिलैक्सिन जैसे हार्मोन बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। खासकर रिलैक्सिन हार्मोन का उत्पादन डिलीवरी की तैयारी के लिए शरीर के लिगामेंट्स को नरम करने के लिए होता है। हालांकि, यह कलाई के कार्पल लिगामेंट को भी नरम और ढीला कर देता है। इस ढीलेपन के कारण जोड़ों में अस्थिरता, सूजन और बाद में मीडियन नर्व के दबने की समस्या हो सकती है।
3. बच्चे की देखभाल से जुड़ी बार-बार की जाने वाली गतिविधियां
नवजात शिशु की देखभाल में अचानक कई तरह के शारीरिक काम बार-बार करने पड़ते हैं। लगातार भारी होते बच्चे को उठाना, उसे झुलाकर सुलाना, डायपर बदलना और अतिरिक्त कपड़े धोना जैसे कामों में कलाई को लगातार मोड़ना और सीधा करना पड़ता है। बार-बार होने वाले इस घर्षण से कलाई के टेंडन में सूजन आ जाती है, जिससे नर्व के लिए जगह कम हो जाती है।
4. कलाई लंबे समय तक अजीब स्थिति में रखना
कई बार महिलाएं स्तनपान कराते समय, बोतल से दूध पिलाते समय या नवजात शिशु को गोद में लेते समय, देखभाल करने वाले अक्सर अनजाने में ही अपने हाथों को लंबे समय तक मुड़ी हुई स्थिति में रखती हैं। कलाई के मुड़े होने से कार्पल टनल के अंदर का दबाव काफी बढ़ जाता है और नर्व तक ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिससे CTS के लक्षण और गंभीर हो जाते हैं या शुरू हो जाते हैं।
इसे भी पढ़ें: हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए क्या सिर्फ डाइट काफी है? डॉक्टर से जानें जवाब
5. प्रेग्नेंसी का कार्पल टनल सिंड्रोम डिलीवरी के बाद बढ़ जाता
प्रेग्नेंसी में ही कुछ लोगों को ये समस्या हो जाती है और डिलीवरी के बाद बढ़ने लगती है। बच्चे को दूध पिलाने के साथ ये समस्या और बढ़ती जाती है। ऐसे में महिलाएं महसूस कर सकती हैं जो दिक्कत उन्हें पहले कम हो रही थी वो अब अचानक बढ़ गई है।
कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण
- अंगूठे और उंगलियों में सुन्नपन, झुनझुनी, जलन और दर्द होना
- बिजली के झटके जैसा महसूस होना जो बांहों से होते हुए अंगूठे और उंगलियों तक जाए
- कलाई और कोहनी के बीच के हिस्से में दर्द या झुनझुनी महसूस होना।
- दर्द का आमतौर पर रात में बढ़ जाना और नींद में भी खलल डालना।
- हाथ से चीजों का बार-बार गिरना और किसी भी सामान को उठाने में असमर्थ महसूस करना।
- हाथ में कमजोरी महसूस होना, जिससे कपड़े के बटन लगाने जैसे काम करने में मुश्किल होती है।
कार्पल टनल सिंड्रोम का उपाय
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान होने वाली ये समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है। तो कई बार बिना सर्जरी वाले इलाज, जैसे कि अंगूठे पर स्प्लिंट लगाना, नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं लेना और पहले एक्सटेंसर कम्पार्टमेंट में कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन लगवाने से ठीक हो जाती है। ब्रेस्टफीडिंग बंद करने के बाद इसके लक्षण आमतौर पर अपने आप खत्म हो जाते हैं।
निष्कर्ष:
अंत में डॉ. कौर कहती हैं कि कार्पल टनल सिंड्रोम की शुरुआत एक दिन में नहीं होती। ये महिलाओं को प्रेग्नेंसी की तिसरी तिमाही से ही महसूस हो सकती है। ऐसे में कोशिश करें कि जैसे ही कलाई में सूजन हो, दर्द हो या उस हाथ से काम करने में दिक्कत हो तो डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर आपको उचित इलाज के साथ इसे समस्या को बढ़ने से रोकने में मदद करेंगे।
FAQ
कार्पल टनल सिंड्रोम को कैसे ठीक किया जा सकता है?
कार्पल टनल सिंड्रोम को स्टेरॉयड इंजेक्शन या सर्जरी की मदद से ठीक किया जा सकता है। पर ध्यान देने वाली बात ये है कि स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाने के बाद आपके उस हड्डी के आस-पास का रंग उड़ सकता है।कार्पल टनल सिंड्रोम को ठीक करने में कितना समय लगता है?
कार्पल टनल सिंड्रोम को ठीक होने में 2 से 3 महीने लग सकते हैं। ये धीमे-धीमे ठीक होती है और अगर आपको लक्षण में बदलाव महसूस न हो तो डॉक्टर को दोबारा दिखाएं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 01, 2026 17:39 IST
Modified By : Pallavi Kumari Sep 01, 2026 17:39 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Jasleen Kaur Malhotra