Wed Oct 14, 2026 | 04:06 PM IST

Medically Reviewed by Dr Brunda M S , Internal Medicine

मैग्नीशियम की कमी शरीर में कैसे दिखती है? इन 7 संकेतों को न करें नजरअंदाज

शरीर में मैग्नीशियम की कमी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, क्योंकि यह एक जरूरी मिनरल है, जो सैकड़ों शारीरिक प्रक्रियाओं में शामिल होता है। इसके लक्षणों में मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, सुन्नपन और अनियमित दिल की धड़कन शामिल हैं, जिसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मैग्नीशियम की कमी शरीर में कैसे दिखती है? इन 7 संकेतों को न करें नजरअंदाज
मैग्नीशियम की कमी शरीर में कैसे दिखती है? इन 7 संकेतों को न करें नजरअंदाज

शरीर को ठीक से कार्य करने के लिए कई जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में से एक है मैग्नीशियम। शरीर में इसकी कमी होने पर व्यक्ति को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है और कई परेशानियां होती हैं। ऐसे में आइए Dr. Brunda M S, Sr. Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें मैग्नीशियम की कमी के लक्षणों के बारे में।

शरीर में मैग्नीशियम क्यों जरूरी है?

Dr. Brunda के अनुसार, मैग्नीशियम एक जरूरी मिनरल है, जो शरीर की सैकड़ों प्रक्रियाओं में शामिल होता है, जैसे मांसपेशियों और नसों का नॉर्मल कामकाज, एनर्जी बनाना और ब्लड ग्लूकोज व ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना। मैग्नीशियम की हल्की कमी से शायद कोई साफ लक्षण न दिखें, लेकिन ज्यादा कमी कई अंगों पर असर डाल सकती है।

शरीर में मैग्नीशियम की कमी के लक्षण

Dr. Brunda का कहना है, शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर इसके वॉर्निंग संकेतों (warning signs) में कई लक्षण शामिल हैं। जैसे, कमजोरी या थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, भूख कम लगना, हाथों-पैरों में झुनझुनी और दिल की धड़कन का अनियमित होना।

1. मांसपेशियों में ऐंठन या बार-बार खिंचाव

मैग्नीशियम की कमी के कारण मांसपेशियों में ऐंठन, कंपन या झटके जैसी समस्या हो सकती है, क्योंकि मैग्नीशियम न्यूरोमस्कुलर फंक्शन (तंत्रिका और मांसपेशियों के कामकाज) में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन ध्यान रहे ऐसा जरूरी नहीं कि हर बार यह समस्या मैग्नीशियम की कमी के कारण हो।

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2. कमजोरी और थकान

मैग्नीशियम की कमी से कुछ लोगों को असामान्य थकान या कमजोरी भी महसूस हो सकती है, क्योंकि मैग्नीशियम एनर्जी मेटाबॉलिज्म में शामिल होता है, लेकिन यह समस्या शरीर में खून की कमी और थायराइड जैसी स्थितियों के कारण भी हो सकती है।

3. हाथों-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी होना

मैग्नीशियम तंत्रिका तंत्र के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। ऐसे में इसकी गंभीर कमी के कारण व्यक्ति को हाथों या पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी भी महसूस हो सकती है।

4. भूख न लगना

कई बार शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण लोगों को भूख कम लगने की समस्या हो सकती है। यह इसकी कमी के शुरुआती लक्षणों में से एक है।

5. जी मिचलाना या उल्टी

मैग्नीशियम की कमी के कारण व्यक्ति को जी मिचलाने और उल्टी आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। अगर बार-बार यह समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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6. दिल की धड़कन का असामान्य या अनियमित होना

गंभीर मामलों में, मैग्नीशियम की कमी दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स, खासकर पोटैशियम और कैल्शियम के बैलेंस को बिगाड़ सकती है, जिससे दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है।

7. नींद न आना

कई बार शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण व्यक्ति को नींद न आने या रात में बार-बार आंख खुलने की समस्या हो सकती हैं।

Dr. Brunda कहती हैं, ये लक्षण सिर्फ मैग्नीशियम की कमी के ही नहीं हैं, बल्कि कई दूसरी स्थितियों में भी हो सकते हैं। इसलिए, सिर्फ इनके आधार पर कमी का पता नहीं लगाया जाना चाहिए।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2024 में Cureus में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मैग्नीशियम शरीर की अलग-अलग बायोलॉजिकल प्रोसेस जैसे कि सेल्स के कामकाज, मांसपेशियों और नसों की एक्टिविटी, दिल की सेहत और हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। हाइपोमैग्नेसिमिया (मैग्नीशियम की कमी) खासकर बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और सही पोषण न मिलने वाले व्यक्तियों में बहुत आम है।

मैग्नीशियम की कमी का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?

Dr. Brunda का कहना है, मैग्नीशियम की कमी के ज्यादा खतरे वाले लोगों में वे लोग शामिल हो सकते हैं, जिन्हें पहले से स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं हैं या दवाइयां ले रहे हैं।

  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिजीज
  • लंबे समय तक दस्त होना
  • किडनी की कुछ समस्याएं
  • अल्कोहल की लत
  • मैग्नीशियम के स्तर को प्रभावित करने वाली कुछ दवाइयों को लंबे समय तक लेना

मैग्नीशियम युक्त फूड्स

Dr. Brunda का कहना है, यह मान लेना सही नहीं है कि ऐंठन या थकान का मतलब आपको मैग्नीशियम की कमी ही है, लेकिन इसकी कमी होने पर इससे राहत के लिए बैलेंस डाइट में नट्स, सीड्स, साबुत अनाज, फलियां और हरी पत्तेदार सब्जियों को लिया जा सकता है। इन फूड्स से मैग्नीशियम मिलता है।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

Dr. Brunda बताती हैं, अगर लक्षण लगातार बने रहते हैं, गंभीर होते हैं या एक साथ होते हैं, तो डॉक्टर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और डाइट की जांच कर सकते हैं और तय कर सकते हैं कि टेस्ट करवाना सही है या नहीं। गंभीर कमजोरी, दौरे, बहुत ज्यादा उलझन या दिल की धड़कन का काफी अनियमित होने पर तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है।

मैग्नीशियम सप्लीमेंट भी बिना सोचे-समझे नहीं लेने चाहिए, खासकर किडनी की समस्या वाले लोगों को, क्योंकि शरीर में ज्यादा मैग्नीशियम जमा हो सकता है। मैग्नीशियम की कमी के मूल कारण की पहचान करना और उसका इलाज करना सिर्फ सप्लीमेंट लेने से ज्यादा जरूरी है।

निष्कर्ष

शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर व्यक्ति को मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, थकान, हाथों-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी, भूख न लगने, जी मिचलाने या उल्टी, नींद न आना और दिल की धड़कन के अनियमित होने की समस्या हो सकती है। मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों, फलियां, साबुत अनाज, सीड्स और नट्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। ध्यान रहे, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए क्या खाएं?

    मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए डाइट में कद्दू के बीज, चिया सीड्स, बादाम, काजू, पालक, मेथी, ओटमील, क्विनोआ, केला, एवोकाडो, डार्क चॉकलेट, दूध, दही और टोफू को डाइट में शामिल किया जा सकता है।
  • मैग्नीशियम की कमी से कौन सा रोग होता है?

    मैग्नीशियम की कमी के कारण व्यक्ति को मांसपेशियों में ऐंठन, इनके कमजोर होने, दिल की धड़कन के अनियमित होने और हाइपोमैग्नेसीमिया जैसी स्थितियां हो सकती हैं।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 14, 2026 14:34 IST

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