Sun Sep 27, 2026 | 11:02 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

क्या आप भी शेयर करते हैं ईयरफोन? डॉक्टर से जानें इसके नुकसान

किसी और व्यक्ति से ईयरफोन शेयर करने से कान में इंफेक्शन और सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर से जानते हैं कि ईयरफोन शेयर करने से इंफेक्शन का खतरा क्यों रहता है और कैसे बचाव करें?
क्या आप भी शेयर करते हैं ईयरफोन? डॉक्टर से जानें इसके नुकसानक्या आप भी शेयर करते हैं ईयरफोन? डॉक्टर से जानें इसके नुकसान

वर्तमान में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स के साथ ईयरफोन का इस्तेमाल बहुत आम हो गया है। ट्रैवलिंग के दौरान, पढ़ाई करते समय या संगीत सुनने के लिए लोग अक्सर अपने ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कई बार दोस्त, परिवार के सदस्य या सहकर्मियों के साथ आपस में ईयरफोन शेयर करना बहुत ही नॉर्मल बात है। यह आदत सुविधाजनक जरूर लग सकती है, लेकिन कानों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। आइए इस लेख में विस्तार से Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, Consultant, MedFirst ENT Centre, New Delhi से जानते हैं कि दूसरे व्यक्ति के ईयरफोन शेयर करने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

किसी और के ईयरफोन लगाने के नुकसान

Dr. Rajesh Bhardwaj के अनुसार, ईयरफोन कान के सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए उन्हें शेयर करने से एक व्यक्ति के कान से दूसरे व्यक्ति के कान तक बैक्टीरिया और इंफेक्शन फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

साल 2025 में Scientific Reports स्टडी के अनुसार, ईयरफोन शेयर करने का सीधा कनेक्शन कान से जुड़ी समस्याओं से हैं, जिसके कारण कान में दर्द, खुजली, सिरदर्द, सुनने की क्षमता में कमी, कान में मैल का जमा होना और स्किन इंफेक्शन होना शामिल हैं।

1. कान में इंफेक्शन का खतरा

ईयरफोन शेयर करने से कान में इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। हमारे कानों में सामान्य रूप से कुछ बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। अगर किसी व्यक्ति के कान में इंफेक्शन है और वह अपने ईयरफोन किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर करता है तो ईयरफोन की सतह पर मौजूद बैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति के कान तक पहुंच सकते हैं।

इससे बाहरी कान के इंफेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है। खासतौर पर इन-ईयर ईयरफोन कान की नली के अंदर जाते हैं और स्किन के सीधे संपर्क में रहते हैं। इसलिए, उन्हें शेयर करते समय हाइजीन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

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2. बैक्टीरिया और फंगस का फैलना

कान में नमी और गर्म वातावरण बैक्टीरिया तथा फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकता है। एक्सरसाइज या गर्म मौसम में लंबे समय तक ईयरफोन इस्तेमाल करने से उनमें पसीना और नमी जमा हो सकती है। अगर ऐसे ईयरफोन को बिना साफ किए कोई दूसरा व्यक्ति इस्तेमाल करता है तो बैक्टीरिया के संपर्क में आने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, सिर्फ ईयरफोन को देखने में साफ होना काफी नहीं होता है, बल्कि बैक्टीरिया फ्री होना भी जरूरी है।

3. कान में खुजली और जलन

दूसरे व्यक्ति के ईयरफोन इस्तेमाल करने के बाद कुछ लोगों को कान में खुजली, रेडनेस या जलन की समस्या महसूस हो सकती है। इसका कारण इंफेक्शन के अलावा कान की सेंसिटिव स्किन पर गंदगी, पसीना या अन्य पदार्थों के संपर्क में आना भी हो सकता है।
अगर ईयरफोन बहुत कसकर लगाए जाएं या लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो कान की स्किन पर प्रेशर और घर्षण भी बढ़ सकता है। इस कारण असुविधा या जलन महसूस हो सकती है।

4. ईयरवैक्स से जुड़ी समस्या

ईयरफोन कान के अंदर मौजूद ईयरवैक्स को आगे की ओर धकेल सकते हैं। जब एक ही ईयरफोन कई लोग इस्तेमाल करते हैं तो उस पर ईयरवैक्स और स्किन के कण भी लग सकते हैं। इससे हाइजीन की समस्या बढ़ सकती है। बहुत ज्यादा ईयरवैक्स जमा होने पर कान बंद महसूस होना या सुनने में कुछ समय के लिए परेशानी महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

5. स्किन से जुड़ी समस्याएं

कुछ लोगों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है। ऐसे लोगों में गंदे या शेयर किए गए ईयरफोन के कारण कान के आस-पास जलन, रेडनेस या छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं। अगर ईयरफोन पर किसी तरह का कॉस्मेटिक प्रोडक्ट, तेल या पसीना लगा हो तो स्किन में जलन की संभावना और ज्यादा बढ़ सकती है।

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ईयरफोन शेयर करने से होने वाले नुकसान से बचने के उपाय

Dr. Rajesh Bhardwaj का कहना है कि ईयरफोन शेयर करने से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए आप इन सावधानियों को अपना सकते हैं-

  • ईयरफोन इस्तेमाल करने के कारण होने वाली समस्याओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप पर्सनल ईयरफोन का ही इस्तेमाल करें।
  • अगर ईयरफोन शेयर करना जरूरी है तो इस्तेमाल करने से पहले और बाद में उसे अच्छी तरह सैनिटाइजर से साफ जरूर करें।
  • इन-ईयर ईयरफोन के सिलिकॉन या रबर टिप्स में मैल जल्दी जमता है, इसलिए इन्हें खासतौर पर साफ करें।
  • गीले या सैनिटाइजर किए हुए ईयरफोन को तुरंत कान में न लगाएं, उन्हें हवा में अच्छी तरह सूखने दें।
  • अगर कान में दर्द, खुजली, किसी तरह का डिस्चार्ज या सुनने में कमी महसूस हो तो तुरंत ईयरफोन का इस्तेमाल करना बंद कर दें।

निष्कर्ष
ईयरफोन शेयर करना एक सामान्य और छोटी-सी आदत लग सकती है, लेकिन इससे पर्सनल हाइजीन और कानों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने का जोखिम रहता है। बैक्टीरिया, फंगस और अन्य बैक्टीरिया के फैलने की संभावना को कम करने के लिए पर्सनल ईयरफोन का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर विकल्प है। नियमित रूप से ईयरफोन की सफाई, सही रखरखाव और लंबे समय तक लगातार ईयरफोन न लगाने जैसी सावधानियां अपनाकर कानों को हेल्दी रखा जा सकता है।
Image Credit: Freepik 

FAQ

  • कान में ईयरफोन लगाने से कौन सी बीमारी होती है?

    कान में लंबे समय तक या तेज आवाज में ईयरफोन लगाने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके कारण टिनिटस और कान में इंफेक्शन जैसी बीमारियां या समस्याएं हो सकती हैं।
  • ईयरफोन कितने समय तक लगाना चाहिए?

    एक दिन में ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल 1 से 2 घंटे से ज्यादा नहीं करना चाहिए। ईयरफोन पर संगीत या कोई ऑडियो हमेशा ज्यादा से ज्यादा 60 प्रतिशत आवाज पर ही सुनें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 27, 2026 21:46 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj

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