Thu Oct 8, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

कान के वैक्स से तेज बदबू क्यों आती है, क्या यह किसी बीमारी के कारण हो सकता है?

कान के मैल से तेज बदबू आना किसी अंदरूनी समस्या, जैसे बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। यह कान के इंफेक्शन, पर्दे में छेद, पुराने मैल या बाहरी वस्तु के फंसने जैसी कई गंभीर स्थितियों के कारण हो सकता है।
कान के वैक्स से तेज बदबू क्यों आती है, क्या यह किसी बीमारी के कारण हो सकता है?कान के वैक्स से तेज बदबू क्यों आती है, क्या यह किसी बीमारी के कारण हो सकता है?

कान में मैल यानी ईयरवैक्स हमारे कानों की सुरक्षा के लिए नेचुरल तरीके से बनता है, लेकिन अगर इसमें से तेज और अजीब बदबू आने लगे तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। आमतौर पर वैक्स से बदबू नहीं आती है। कान से बदबू आने का कारण बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन हो सकता है, जो नमी जमने या गंदगी के कारण पनपता है। ऐसे में आइए इस लेख में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं कि कान के वैक्स से तेज बदबू क्यों आती है?

कान के वैक्स से तेज बदबू आने के कारण

साल 2009 में BMC Genetics में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कान के मैल से तेज बदबू आने का एक बड़ा कारण हमारे शरीर की जेनेटिक बनावट है। हमारे शरीर में एक खास जीन होता है, जिसके कारण कुछ लोगों का कान का मैल नेचुरल तरीके से गीला और चिपचिपा बनता है। जब कान के ग्लैंड्स से निकलने वाले कुछ नेचुरल तत्व स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं, तो वे उन्हें तोड़कर तेज बदबूदार केमिकल में बदल देते हैं। यही कारण है कि गीले कान के मैल और शरीर या पसीने की बदबू में सीधा कनेक्शन होता है।

Dr. Akshay Chugh के अनुसार, कान के वैक्स में बदबू पैदा होने का कारण बैक्टीरिया, फंगल या कान की नली में रुकावट होती है।

1. कान का इंफेक्शन

कान का इंफेक्शन कान के मैल में बदबू आने का सबसे आम कारण होता है। नहाते या तैरते समय कान में पानी चला जाता है तो कान में नमी बनी रहती है। यह नमी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए एक माहौल बनाती है। कान के अंदर सड़न जैसी बदबू आना, खुजली होना, कान लाल होना और छूने पर तेज दर्द महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसे भी पढ़ें: कान में लगातार बजती है सीटी? न करें नजरअंदाज, जानें इसके कारण और राहत के उपाय

2. कान के पर्दे में छेद होना या मध्य कान का इंफेक्शन

अगर मध्य कान में इंफेक्शन हो जाए या कान का पर्दा फट जाए तो वहां से मवाद बहकर बाहरी कान में आ जाता है। जब यह मवाद कान के मैल यानी वैक्स के साथ मिलता है तो उसमें से बहुत तेज और असहनीय बदबू आती है। इसके साथ ही मरीज को सुनने में कमी महसूस होती है और कान में भारीपन रहता है।

3. कान में बहुत पुराना या इम्पैक्टेड वैक्स

जब महीनों तक कान की सफाई नहीं होती है या मरीज बड्स डालकर मैल को अंदर धकेलता है तो मैल खुलकर सख्त और बहुत गहरा जमा हो जाता है। यह सख्त वैक्स कान की नली को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। ऐसे में पसीना, डेड स्किन सेल्स और नमी इकट्ठा होने लगती हैं,जिससे वैक्स सड़ने लगता है और उसमें से तेज बदबू आने लगती है।

4. कान में किसी बाहरी चीज का फंस जाना

खासकर छोटे बच्चों में अक्सर खेलते-खेलते कान में रुई, कागज का टुकड़ा, छोटे स्टोन्स या अन्य चीजें डाल लेते हैं। यह चीजें कई दिनों तक कान के अंदर पड़ी रहती हैं और शरीर के लिक्विड से मिलकर सड़ने लगती हैं, जिससे वैक्स और कान से बहुत तेज बदबू आने लगती है।

earwax-have-bad-odorearwax-have-bad-odor

5. कोलेस्टेटोमा

कोलेस्टेटोमा एक गंभीर लेकिन दुर्लभ स्थिति है। इस समस्या में कान के पर्दे के पीछे स्किन सेल्स की एक असामान्य थैली या गांठ बनने लगती है। यह गांठ धीरे-धीरे कान की छोटी हड्डियों को नुकसान पहुंचाती है। इसमें से लगातार गाढ़ा, बदबूदार लिक्विड निकलता रहता है, जो वैक्स के साथ मिलकर तेज बदबू पैदा करता है।

गलत आदतें जो कान के वैक्स से बदबू आने की समस्या को बढ़ाती हैं?

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि कई बार मरीज खुद ही जाने-अनजाने में अपनी आदतों से कान के इंफेक्शन और बदबू को बढ़ावा देते हैं-

  1. कॉटन बड्स या माचिस की तीली का इस्तेमाल- जब आप कॉटन बड या चाभी से कान खुजलाते हैं तो कान की नाजुक स्किन में खरोंच आ जाती है। इस खरोंच से बैक्टीरिया अंदर जाते हैं और इंफेक्शन फैलाने का काम करते हैं।
  2. कान में तेल डालना- बहुत से लोग कान में सरसों का तेल या लहसुन का तेल डालते हैं। नमी और तेल मिलकर फंगल इंफेक्शन का कारण बनते हैं, जिससे कान के वैक्स से बदबू और बढ़ जाती है।
  3. ईयरफोन या ईयरप्लग का ज्यादा इस्तेमाल- लंबे समय तक इन-ईयर ईयरफोन लगाने से कान में हवा का वेंटिलेशन रुक जाता है और पसीने के कारण नमी जम जाती है।

इस समस्या से कैसे बचें?

अगर आप या आपके परिवार में कोई कान के वैक्स से बदबू की समस्या से जूझ रहा है तो इन बातों पर तुरंत ध्यान दें-

  • कान को सूखा रखें- नहाते समय कान में पानी जाने से बचाएं। अगर पानी कान में चला जाए तो सिर को तिरछा करके पानी बाहर निकालें और बाहर से तौलिए से पोंछें।
  • बड्स का इस्तेमाल करना बंद करें- कान में कोई भी नुकीली चीज, बड्स या तीली डालने से बचना चाहिए। कान अपना मैल खुद बाहर निकालने में सक्षम होता है।
  • खुद से कोई भी ड्रॉप न डालें- बिना डॉक्टर से पूछे केमिस्ट से लेकर कोई भी पेनकिलर या एंटीबायोटिक ईयर ड्रॉप कान में न डालें, खासकर तब जब कान का पर्दा फटा हो।

इसे भी पढ़ें: Ear Health: सावधान! तेज आवाज में ईयरफोन सुनना कर सकता है बहरा, जानें कानों को कैसे बचाएं

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर कान के वैक्स से बदबू आने के साथ-साथ आपको ये लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए ईएनटी स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए-

  • कान से पीला, हरा या खून मिला बदबूदार पानी बहना।
  • कान में तेज दर्द या टीस उठना।
  • कम सुनाई दे रहा हो या कान बंद महसूस हो रहा हो।
  • कान के साथ-साथ चक्कर आ रहे हों या बुखार महसूस हो रहा हो।

निष्कर्ष
कान के वैक्स से तेज बदबू आना किसी भी तरह से नॉर्मल नहीं होता है। यह इस बात का साफ इशारा है कि कान के अंदर बैक्टीरिया, फंगस या इंफेक्शन बढ़ रहा है। इसे घरेलू नुस्खों या बड्स से साफ करने की कोशिश बिल्कुल न करें। किसी ईएनटी डॉक्टर से मिलकर ओटोस्कोप से कान की जांच करवाएं और सिरिंजिंग या सक्शन द्वारा कान की सुरक्षित सफाई करवाकर सही ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या कान का मैल निकालना चाहिए?

    कान का मैल निकालना आमतौर पर जरूरी नहीं होता है, क्योंकि कान खुद को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं।
  • कान में मैल जमने के क्या लक्षण हैं?

    कान में मैल जमने पर कान में दर्द या चुभन, कम सुनाई देना, कान में भारीपन, कान में घंटी बजना या खुजली की समस्या जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

Read Next

→ मुंह का कैंसर सिर्फ तंबाकू-सिगरेट से नहीं होता, ये 5 कारण भी बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरा

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 08, 2026 16:20 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh