कई लोगों को आदत होती है कि वे अक्सर बालों को कलर करवाते हैं। आमतौर पर हेयर कलर कराने को लोग अपनी पर्सनैलिटी से जोड़कर देखते हैं। खासकर, महिलाओं को लगता है कि हेयर कलर कराने से उनके बाल अधिक अच्छे लगते हैं और उनका काॅन्फिडेंस भी बढ़ता है। बहरहाल, क्या आप जानते हैं कि बार-बार कलर कराने से बालों को नुकसान हो सकता है?
इस बारे में दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित Advanced Skin Clinic की Founder, Aesthetic Physician, Cosmetologist And Skin Specialist डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "हमारे बाल काफी सेंसिटिव होते हैं, इसलिए केमिकल युक्त चीजों का उपयोग कम से कम करना चाहिए। वहीं, अगर कोई बार-बार हेयर कलर का इस्तेमाल करता है, तो इसकी वजह से बाल पतले हो सकते हैं, बालों का टेक्सचर बदल सकता है और स्कैल्प में इरिटेशन हो सकती है। नतीजतन, हेयर फॉल बढ़ सकता है।"
बार-बार हेयर कलर करने से बालों पर असर
What Are The Side Effects Of Frequent Hair Coloring
1. हेयर टेक्सचर पर असर
बालों में पर्मानेंट या सेमी-पर्मानेंट डाई लगाने से क्यूटिकल्स खुल जाते हैं, जिससे बालों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। नतीजतन, बाल बेहद रूखे व बेजान हो जाते हैं। बार-बार केमिकल के इस्तेमाल करने से बाल कमजोर, खुरदुरे और दोमुंहे होकर बीच से टूटने लगते हैं। हालांकि, डाई सीधे बालों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाती। लेकिन हेयर डाई में केमिकल्स होते हैं, जिससे स्कैल्प में जलन या सूजन हो सकती है। वास्तव में डाई हेयर शाफ्ट के प्रोटीन बॉन्ड्स को तोड़ती है, जिससे ब्रेकेज होता है।
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2. एलर्जी का रिस्क
मेडिकल जर्नल International Scholarly Research Notices में प्रकाशित एक मेडिकल केस रिपोर्ट के अनुसार, हेयर डाई में मौजूद PPD (Para-phenylenediamine) जैसे केमिकल्स से एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस होने का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में स्कैल्प पर तेज खुजली, रेडनेस, सूजन, जलन या छाले पड़ सकते हैं। इसके अलावा, हेयर डाई में मौजूद अन्य केमिकल स्कैल्प को जला सकते हैं। इसे केमिकल बर्न कहा जाता है। इसकी वजह से स्कैल्प पर घाव हो सकता है और जलन भी बढ़ सकती है।
3. हेयर थिनिंग का जोखिम
वैसे तो डाई सीधे तौर पर स्कैल्प को नुकसान नहीं पहुंचाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अधिकतर हेयर डाई बालों की जड़ों पर नहीं लगाए जाते हैं। इसके बावजूद, जब कोई बार-बार और लंबे समय तक बालों पर केमिकल्स का यूज करता है, तो इससे बालों का टूटना बढ़ जाता है। नतीजतन, हेयर थिनिंग की समस्या होने लगती है।
स्कैल्प एलर्जी और डर्मेटाइटिस का बढ़ता जोखिम
जब कोई बार-बार हेयर डाई लगाता है, तो इसकी वजह से स्कैल्प एलर्जी के साथ-साथ डर्मेटाइटिस का जोखिम भी बढ़ जाता है-
- पर्मानेंट और गहरे रंग वाले डाई में तेज केमिकल्स होते हैं, जो त्वचा पर रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। ऐसे में एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस होने का रिस्क बढ़ जाता है।
- आमतौर पर एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस होने पर इसके लक्षण दिखने में कुछ घंटों से लेकर 72 घंटे तक का समय लग सकता है।
- एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस होने का मुख्य कारण डाई में मौजूद PPD होता है। यह बालों को पक्का रंग देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- इसके अलावा, हेयर डाई में अमोनिया, रिसोर्सिनॉल, खुशबू और प्रिजर्वेटिव्स भी एलर्जी का कारण बन सकते हैं।
हेयर कलर के कारण बालों का झड़ना और टूटना
Side Effects Of Frequent Hair Coloring
Journal of Cutaneous Medicine and Surgery में प्रकाशित रिसर्च स्टडी के अनुसार, बार-बार हेयर कलर या हेयर डाई करवाने से बालों का झड़ना और टूटना भी बढ़ने लगता है। ज्यादातर महिलाओं में दोमुंहे बाल, अत्यधिक बाल झड़ना, बालों का सूखापन परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसा होने के पीछे कई कारण हैं, जैसे-
- बालों के क्यूटिकल्स पर असरः पर्मानेंट डाई और ब्लीच में कई तरह के हानिकारक केमिकल्स होते हैं। ये बालों के क्यूटिकल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और बालों के प्रोटीन स्ट्रक्चर को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं। विशेषकर, बाल जड़ों से कमजोर होने लगते हैं।
- स्कैल्प में जलनः चूंकि, आप यह जानते हैं कि हेयर डाई या कलर में पीपीडी जैसे तत्व होते हैं, जिसकी वजह से एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, लालिमा, खुजली या केमिकल बर्न जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में स्कैल्प में जलन, सूजन या बार-बार खुजली होने की समस्या पैदा हो जाती है। बार-बार खुजलाने से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे हेयर फाॅल बढ़ता है।
- बालों पर खिंचावः कलर करते समय बालों पर बार-बार कंघी करनी पड़ती है, ब्रश चलाना पड़ता है और हेयर वॉश करना पड़ता है। ऐसे में बालों में काफी दबाव और खिंचाव पड़ता है। यह स्थिति भी बालों की जड़ों को कमजोर कर सकती है।
डॉक्टर की सलाहः बालों को कलर डैमेज से कैसे बचाएं
अगर हेयर कलर या डाई का इस्तेमाल सीमित मात्रा में किया जाए, तो हेयर फाॅल को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, डाॅक्टर द्वारा बताए गए टिप्स को भी अपनाएं, जैसे-
- बार-बार कलर करने से बचेंः फ्रिक्वेंटली कलर करवाना बालों के लिए सही नहीं होता है। इससे बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। हमेशा दो बार कलर कराने के बीच एक से दो महीनों का गैप करना जरूरी होता है।
- पैच टेस्ट जरूर करेंः किसी भी नए प्रोडक्ट को लगाने से पहले 48 घंटे का स्किन पैच टेस्ट जरूर करें। इससे आपको पता चलेगा कि प्रोडक्ट आपको सूट कर रहा है या नहीं? वैसे तो इस्तेमाल किए हुए प्रोडक्ट्स का भी पैच टेस्ट ले लेना चाहिए।
- सुरक्षित विकल्प चुनेंः एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जितना हो सके अमोनिया-फ्री, सेमी-पर्मानेंट या हर्बल प्रोडक्ट (जैसे मेंहदी) का इस्तेमाल करना बालों के लिए सेफ होता है। तेज केमिकल वाले प्रोडक्ट यूज करने से बचें।
- बालों की केयर करेंः बार-बार हेयर कलर करवाने से बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं। इससे बालों की नमी भी कम हो जाती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए हेयर कलर के बाद बालों की अच्छी केयर करें। बालों में नमी लौटाने के लिए सल्फेट-फ्री शैम्पू और हफ्ते में एक बार डीप-कंडीशनिंग हेयर मास्क का इस्तेमाल करें।
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हेयर कलरिंग के बीच कितना गैप होना चाहिए
डाॅ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "हेयर कलरिंग के बीच कम से कम 6-8 सप्ताह का गैप होना जरूरी है। हालांकि, आप किस तरह के हेयर कलर का उपयोग करते हैं, इससे भी हेयर कलर करवाने की फ्रिक्वेंसी तय की जा सकती है। जैसे टेंप्रेरी कलर अक्सर पहली बार वाॅश के बाद फीके पड़ जाते हैं। इसलिए, इस तरह के हेयर कलर की फ्रिक्वेंसी ज्यादा होती है। वहीं, पर्मानेंट हेयर कलर करवाने के बीच 6-8 सप्ताह का गैप उचित माना जाता है।"
निष्कर्ष
हेयर कलर करवाने में कोई बुराई नहीं है। इससे खूबसूरती बढ़ती है, पर्सनैलिटी बेहतर नजर आती है और काॅन्फिडेंस भी बूस्ट होता है। हालांकि, बार-बार हेयर कलर करने से बचना चाहिए। जब कोई बार-बार हेयर कलर करता है, तो इससे बाल कमजोर, रूखे और बेजान हो जाते हैं। यहां तक कि हेयर फाॅल भी बढ़ जाता है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए हेयर कलर के बाद भी अपने बालों की अच्छी देखभाल करें।
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FAQ
क्या बालों को बार-बार कलर करने से सिर में डैंड्रफ की समस्या बढ़ सकती है?
डाई के केमिकल्स स्कैल्प के pH स्तर और सीबम को नष्ट कर देते हैं, जिससे स्कैल्प अधिक ड्राई हो जाते हैं और फ्लेकी डैंड्रफ का शिकार हो जाता है।क्या बार-बार ब्लीच कराने से बालों की प्राकृतिक इलास्टिसिटी खत्म हो सकती है?
हां, ऐसा हो सकता है। असल में, ब्लीच में मौजूद हाइड्रोजन पेरोक्साइड बालों के आंतरिक कॉर्टेक्स में डाईसल्फाइड बॉन्ड्स (Disulfide bonds) को तोड़ देता है, जिससे बाल खिंचते ही रबर की तरह टूट जाते हैं।
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Oct 25, 2026 08:36 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra
