लो मसल्स मास का मतलब है कि आपके शरीर में मांसपेशियों की मात्रा उतनी नहीं है, जितनी बेहतर स्वास्थ्य, ताकत और चलने-फिरने के लिए जरूरी होती है। जब लो मसल्स मास होता है, तो इसकी वजह से कई तरह परेशानियां होने लगती हैं, जैसे चलने में कमजोरी महसूस करना, संतुलन बनाए रखने में दिक्कत आना और गिरने पर फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाना है। बहरहाल, लो मसल्स मास की समस्या वैसे तो किसी को नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद, आपने देखा होगा कि कई महिलाओं को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल है, महिलाओं में लो मसल्स मास कब चिंता का विषय होता है और इसकी वजह से उन्हें किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? इस बारे में जानने के लिए हमने Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से बात की।
महिलाओं में लो मसल मास होने के क्या नुकसान हैं?
-1782818785908.jpg)
महिलाओं में लो मसल्स मास कई मायनों में चिंता का विषय बनता है, जैसे-
मेटाबॉलिज्म पर असर
न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी की मानें, तो मांसपेशियां शरीर में कैलोरी बर्न करने का मुख्य जरिया होती हैं। इसलिए, जब महिलाओं के शरीर में इसका स्तर कम हो जाता है, तो मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ता है। नतीजतन, शरीर बहुत कम कैलोरी खर्च कर पाता है, जिससे फैट तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे में महिलाओं को अपना वजन कंट्रोल करना किसी चुनौती से कम नहीं कर जाता है।
इसे भी पढ़ें: हर समय हेल्दी खाने की चिंता (Orthorexia) कैसे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है? जानें एक्सपर्ट से
कमजोर हड्डियां
निश्चित तौर पर जब महिलाओं को लो मसल्स मास की समस्या होने लगती है, तो इसका बुरा असर उनकी हड्डियों पर भी पड़ता है। असल में, मांसपेशियों की कमी के कारण बोन डेंसिटी घटने लगती है। ऐसे में महिलाओं को कम उम्र में ही ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिलाओं में संतुलन बिगड़ने, गिरने और कूल्हे या कलाई की हड्डी टूटने का जोखिम बहुत ज्यादा होता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस
आपको लग रहा होगा कि लो मसल्स मास का इंसुलिन रेजिस्टेंस से भला क्या संबंध है? न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी के अनुसार, मांसपेशियां ब्लड से ग्लूकोज (शुगर) को एब्जॉर्ब करने का काम करती हैं। जब मांसपेशियां कम होने लगें, तो इसकी वजह से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, मांसपेशियों की कमी से शरीर में हमेशा कमजोरी, सुस्ती और थकान जैसी समस्याएं भी बनी रहती हैं।
इसे भी पढ़ें: महिलाएं कैसे जानें उनकी डाइट में फाइबर की कमी हो रही है? एक्सपर्ट से जानें ये 5 संकेत
निष्कर्ष
वजन संतुलित रखना जरूरी होता है। ऐसा ही महिलाओं के साथ भी है, लेकिन अगर लो मसल्स मास की दिक्कत हो, तो इसे इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए। इसकी वजह से महिलाओं को चलने-फिरन या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जो कि भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा देती है। बहरहाल, मांसपेशियों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सही मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए।
All Image Credit: Freepik
FAQ
महिलाओं में मांसपेशियों के कम होने का मुख्य कारण क्या है?
अधिक उम्र, शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना और डाइट में प्रोटीन की कमी की वजह से महिलाओं में मांसपेशियां कम हो सकती हैं।मांसपेशियों को बढ़ाने के लिए महिलाओं को क्या खाना चाहिए?
बेहतर मांसपेशियों के लिए महिलाओं को प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, दालें, सोयाबीन, अंडे, चिकन आदि का सेवन करना चाहिए।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 30, 2026 20:50 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 30, 2026 20:50 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi