मलद्वार में दर्द होने पर लोगों के उठना-बैठना और कुछ गंभीर मामलों में चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है? यह चिंता का विषय तब हो जाता है, जब मलद्वार में हो रहे दर्द के कारण रोजमर्रा की जीवनशैली तक प्रभावित होने लगती है। वास्तव में, मलद्वार में दर्द होने के पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
इस बारे में Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi का कहना है, "मलद्वार में दर्द को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसा पाइल्स, एनल फिशर, संक्रमण आदि के कारण हो सकता है। मलद्वार में दर्द होने पर इसका इलाज क्या होगा, यह उसके मूल कारण पर निर्भर करता है।"
मलद्वार में दर्द के कारण
Rectal Pain Causes And Home Remedies
1. बवासीर
Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, "पाइल्स या बवासीर मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्से या गुदा (एनस) की नसों में सूजन और जलन होने को कहा जाता है। बाहरी बवासीर या अंदरूनी बवासीर, इनमें खून का थक्का जमने पर तेज दर्द, जलन, खुजली और दर्दभरी गांठ या सूजन महसूस होती है।"
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2. एनल फिशर
इस समस्या में गुदा मार्ग की अंदरूनी त्वचा में छोटी और दर्दनाक दरारें बन जाती हैं। ऐसा आमतौर पर कब्ज की समस्या के कारण होता है। एनल फिशर की वजह से मलत्याग प्रक्रिया काफी कठिन हो जाती है, इस दौरान दर्द, चुभन भरा एहसास होता है। NCBI से भी स्पष्ट होता है कि एनल फिशर होने पर मलद्वार में तीव्र दर्द हो सकता है।
3. फिस्टुला
यह एक छोटी नली या सुरंग होती है, जो संक्रमित ग्रंथि को त्वचा से जोड़ती है, जिससे लगातार रिसाव होता रहता है। इस स्थिति में मरीज को बहुत ज्यादा दर्द और बेचैनी होती है। कई बार दर्द असहनीय हो जाता है। National Center for Biotechnology Information (NCBI) के StatPearls डेटाबेस पर प्रकाशित एक विस्तृत मेडिकल समीक्षा के अनुसार, एनोरेक्टल फिस्टुला गुदा क्षेत्र में स्थित ग्रंथियों के संक्रमण और फोड़े के बिगड़ने से बनते हैं। ऐसे में गुदा की मांसपेशियों (anal sphincter) को नुकसान पहुंचता है और प्रभावित हिस्से में दर्द भी होता है।
4. कब्ज
Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, "उन लोगों को भी अक्सर मलद्वार में दर्द की शिकायत रहती है, जिन्हें कब्ज की दिक्कत होती है। असल में, कब्ज के कारण व्यक्ति के लिए मल त्याग करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। साथ ही मल त्याग करने के लिए काफी जोर लगाना पड़ता है। वैसे भी कब्ज के कारण मल काफी सख्त हो जाता है। ऐसे में मल निकलते वक्त गुदा क्षेत्र में दर्द की वजह बन सकता है और कुछ मामलों में प्रभावित हिस्से की त्वचा छिल भी सकती है।"
5. प्रोक्टाइटिस और इंफेक्शन
मलाशय की अंदरूनी परत में सूजन आने को प्रोक्टाइटिस कहते हैं। यह इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज या यौन संचारित संक्रमणों (जैसे क्लैमाइडिया या सिफलिस) के कारण हो सकता है। नतीजतन, दर्द, मवाद/म्यूकस और ब्लीडिंग जैसी परेशानी भी व्यक्ति को झेलनी पड़ती है।
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मलद्वार में हो रहे दर्द से राहत पाने के 5 घरेलू उपाय
- गर्म पानी से सिकाई करें: मलद्वार में हो रहे दर्द से राहत पाने के लिए सिट्ज बाथ बहुत ही उपयोगी और कारगर तरीका है। इसके लिए एक टब में हल्का हल्का गर्म पानी भरें। 10 से 15 मिनट के लिए इस पानी में बैठें। इससे गुदा की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, सूजन में कमी आती है और धीरे-धीरे दर्द भी कम होने लगता है।
- फाइबर युक्त डाइट लें: मलद्वार में दर्द हो, तो ऐसी चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए, जिसमें फाइबर हो। ध्यान रखें कि डाइट में फाइबर युक्त चीजों को शामिल न करने से कब्ज की समस्या ट्रिगर हो सकती है। ऐसे में मल त्याग प्रक्रिया कठिन हो जाती है, जिससे मलद्वार का दर्द बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए आप अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सलाद और साबुत अनाज शामिल करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: चूंकि, कब्ज को नियंत्रित करके मलद्वार में हो रहे दर्द को भी कम किया जा सकता है। इसलिए, दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। इससे मल नरम बनता है और कब्ज की समस्या दूर होती है।
- बर्फ की सिकाई करें: मलद्वार में हो रहे दर्द को कम करने के लिए आप प्रभावित हिस्से में बर्फ की सिकाई भी कर सकते हैं। यह भी काफी कारगर तरीके से काम करता है। अगर प्रभावित हिस्से में दर्द या सूजन बहुत ज्यादा हो, तो एक साफ सूती कपड़े में बर्फ लपेटकर गुदा क्षेत्र पर 10 मिनट के लिए उससे सिकाई करें। इससे वहां की नसों को ठंडक मिलती है और सूजन में कमी आएगी।
- मल त्याग के समय अधिक जोर लगाने से बचें: मलद्वार में दर्द और जलन है, तो लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर न बैठें और न ही मल त्याग के दौरान अनावश्यक दबाव या जोर लगाएं। अगर मल त्याग करना मुश्किल हो रहा है, तो बेहतर है कि आप डाॅक्टर की सलाह पर स्टूल सॉफ्टनर का उपयोग करें।
कब जाएं डाॅक्टर के पास?
मलद्वार में दर्द हो तो उसकी हाइजीन का पूरा ध्यान रखें, जैसे मल त्याग के बाद टॉयलेट पेपर की जगह हल्के गुनगुने पानी से सफाई करें और उस हिस्से को सूखा रखें। हमेशा ढीले और सूती अंडरवियर पहनें, ताकि किसी भी तरह का संक्रमण न हो। इसके बावजूद गुदा में दर्द हो रहा है, तो आप इसे हल्के में न लें। इसके साथ-साथ अन्य लक्षणों पर गौर करें और तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं-
- मल त्याग के दौरान हैवी ब्लीडिंग होने पर।
- मलद्वार में तीव्र दर्द के साथ-साथ बुखार और कंपकंपी छूटने पर।
- काले रंग का मल निकलने पर।
- दो-तीन दिन से अधिक समय तक दर्द होने पर।
- मलद्वार में कोई नई गांठ नजर आने पर।
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निष्कर्ष
मलद्वार में हो रहे दर्द को हल्के में न लें। यह सही नहीं है। अगर मल त्याग करते हुए तकलीफ बढ़ रही है, ब्लीडिंग हो रही है और बुखार भी आ रहा है, तो समझ जाएं कि डाॅक्टर के पास जाने का समय आ गया है। बेहतर होगा कि आप मलद्वार में हो रहे दर्द का कारण समझें। इस लेख में हमने कुछ उपाय बताए हैं, जिनकी मदद से मलद्वार के दर्द को कम किया जा सकता है।
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FAQ
क्या ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठे रहने से मलद्वार में दर्द हो सकता है?
हां, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों में खिंचने लगती हैं और गुदा की नसों पर दबाव बढ़ जाता है। इसी वजह से मलद्वार में दर्द होने लगता है।मलद्वार के दर्द और अकड़न से राहत पाने के लिए कौन-सा योगासन फायदेमंद होता है?
तितली आसन (बटरफ्लाई पोज) और मलासन पेल्विक मांसपेशियों के तनाव को कम करने और ब्लड फ्लो को सुधारने में काफी मदद करते हैं।
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Oct 27, 2026 13:09 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon
