डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को बवासीर यानी पाइल्स हो जाता है। यह न सिर्फ दर्दभरा अनुभव होता है, बल्कि महिला की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है। ऐसा नहीं है कि इस समस्या से बचा नहीं जा सकता है। डिलीवरी के बाद बवासीर क्यों होता है, इसके मुख्य कारणों को जानकर इसका समाधान कर सकती हैं।
इस बारे में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता का कहना है, "यह सच है कि डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को पाइल्स हो जाता है और यह बहुत कॉमन है। ऐसा होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे प्रसव के दौरान बहुत ज्यादा जोर लगाना और पोस्टपार्टम कब्ज की समस्या होना। दरअसल, डिलीवरी के बाद महिलाओं को मल त्याग प्रक्रिया में परेशानी होने लगती है, जिस वजह से कब्ज हो जाता है। ऐसे में पाइल्स का जोखिम भी बढ़ता है।"
डिलीवरी के बाद बवासीर होने के 5 कारण
reasons for developing hemorrhoids after delivery
प्रसव के दौरान तेज जोर लगाना
नाॅर्मल डिलीवरी के दौरान महिलाओं को बहुत जोर लगाना पड़ता है। दूसरे चरण का भारी और लगातार नीचे की ओर पड़ने वाला दबाव खून को गुदा की नसों में धकेलता है, जिससे वे खिंच जाती हैं और बाहर की ओर गुब्बारे की तरह फूल जाती हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद पाइल्स का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इस स्थिति में महिलाओं के लिए मल त्याग प्रक्रिया भी काफी मुश्किल हो जाती है।
इसे भी पढ़ें: डिलीवरी के बाद नई मां को कब्ज की समस्या क्यों होती है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और घरेलू इलाज
बढ़ते गर्भाशय का दबाव
प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे दिन चढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे गर्भाशय का भार बढ़ता जाता है। ऐसे में शरीर के सभी अंगों पर दबाव पड़ता है। Women and Birth में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, गर्भाशय का आकार बढ़ने से पेल्विक वेन्स की प्रमुख नसों (जैसे Inferior Vena Cava) पर दबाव बनने लगता है। ऐसे में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है और रेक्टल एरिया पर भी यह प्रभाव देखने को मिलता है। डिलीवरी के बाद स्थिति को सामान्य होने में समय लगता है। इसलिए, अक्सर शिशु के जन्म के बाद भी महिला को कब्ज की समस्या बनी रहती है।
कब्ज की समस्या का बढ़ना
प्रसव के बाद अक्सर महिलाओं के लिए अपनी डाइट और जीवनशैली को मैनेज करना बहुत मुश्किल हो जाता है। वहीं, उन्हें अपने शिशु को स्तनपान कराना होता है। इसके जरिए उनके शरीर से काफी मात्रा में तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है। ऐसे में मल सख्त हो जाता है और पेट साफ करने में दिक्कतें आने लगती हैं। साल 2022 में Frontiers in Surgery में प्रकाशित मेडिकल रिव्यू आर्टिकल लगभग 40% महिलाओं को गर्भावस्था और डिलीवरी के 1-2 दिन बाद बवासीर की समस्या होती है। कब्ज होना इसका सबसे बड़ा कारण है।
दवाओं का असर
कई महिलाओं को शारीरिक समस्याओं के कारण सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है। इससे रिकवरी के लिए महिलाओं को कई तरह की मेडिसिन लेनी पड़ती है। इसमें दर्द निवारक दवाएं या आयरन सप्लीमेंट्स भी होते हैं। ये मेडिसिन कब्ज को और बढ़ा सकते हैं, वहीं पेरिनेल चीरे/टांके की जगह पर खिंचाव के डर से पेल्विक हिस्से में तनाव बढ़ जाता है। यह भी पाइल्स का एक बड़ा कारण होता है।
शारीरिक गतिविधि न करना
डिलीवरी के बाद महिलाओं को रिकवरी के लिए कम से कम 40 दिनों तक रेस्ट करने की जरूरत होती है। ऐसे में उनके लिए फिजिकल एक्टिविटी करना या शारीरिक रूप से सक्रिय रहना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, वजाइनल डिलीवरी के बाद कई महिलाएं महज 15-20 दिन में चलने-फिरने लगती हैं। लेकिन सिजेरियन के बाद रिकवरी में समय लग सकता है। साथ ही, हर महिला का शरीर अलग होता है। नतीजतन, एक जैसे लंबे समय तक बैठे रहने से निचले शरीर में रक्त संचार धीमा हो जाता है, जिससे मलाशय की नसों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में पाइल्स जैसी समस्या ट्रिगर हो जाती है।
इसे भी पढ़ें: सिजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओंं को डाइजेशन की समस्या क्यों होती है? डॉक्टर से जानें कारण और उपाय
डिलीवरी के बाद पाइल्स से बचाव के लिए क्या करें?
- डाइट में सुधार करेंः इन दिनों फाइबर युक्त भोजन का सेवन अधिक करें। इसके लिए, डाइट में साबुत अनाज, दलिया, हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।
- पर्याप्त पानी पिएंः डिलीवरी के बाद महिलाओं को कब्ज से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
- शौच की आदत सुधारेंः रोजाना मल त्याग करें। मल त्याग प्रक्रिया के दौरान अधिक जोर न लगाएं और जब भी प्रेशर महसूस हो, उसे रोकने की कोशिश न करें।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहेंः अगर आपकी रिकवरी सही तरह से हो रही है, तो बेहतर है कि आप हल्की-फुल्की वॉक करें। लगातार बैठने रहने से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
- सिट्ज बाथ लेंः अगर मल त्याग करने में दिक्कत हो रही है, तो सिट्ज बाथ ले सकती हैं। इसके लिए, टब में गुनगुना पानी भरकर उसमें 15 से 20 मिनट के लिए बैठें। ऐसा करने से नसों की सूजन कम होती है। Women and Birth में बताया गया है कि इससे पेल्विक मांसपेशियों की सूजन कम होती है और अप्रत्यक्ष रूप से कब्ज में आराम मिलता है।
इसे भी पढ़ें: पोस्टपार्टम रिकवरी के लिए हर नई मां के पास जरूर होनी चाहिए ये 5 चीजें
निष्कर्ष
आमतौर पर डिलीवरी के बाद महिलाओं को कब्ज की समस्या हो जाती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि हर महिला के साथ यह परेशानी हो। हां, अगर यह दिक्कत हो जाती है, तो बेहतर है कि आप अपनी जीवनशैली में सुधार करें और खान-पान आदतों को बेहतर बनाएं। ऐसा करने से न सिर्फ कब्ज की समस्या खत्म होती है, बल्कि पाइल्स भी नहीं होता है। यहां तक कि सही खान-पान की मदद से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी मिलते हैं।
All Image Credit: Magnific
FAQ
डिलीवरी के बाद पाइल्स की समस्या कितने दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है?
सही आहार, पर्याप्त पानी और कब्ज-रोधी उपायों को अपनाने से डिलीवरी के बाद पाइल्स की समस्या 2 से 6 हफ्तों में ठीक हो जाती है।क्या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पाइल्स में मलहम का उपयोग करना चाहिए?
पाइल्स में ओवर-द-काउंटर (OTC) टॉपिकल क्रीम लगाना सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, इसका उपयोग करने से महिलाओं को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 06, 2026 12:58 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
