आज के समय में ज्यादातर लोग ऑफिस या अन्य कामों के चलते दिनभर बैठे रहते हैं और फिजिकल एक्टिविटीज नहीं करते हैं। जिसके कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है और लोगों को स्वास्थ्य और पाचन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru बताते हैं, सिर्फ बैठे रहने से पाचन संबंधी विकार नहीं होते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनएक्टिव रहने (फिजिकल एक्टिविटीज न करने) और खराब खान-पान की आदतें मिलकर पाचन से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती हैं।
दिनभर बैठे रहने का पाचन पर असर
डॉ. अरविंद के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने से पाचन की नॉर्मल प्रक्रिया धीमी हो सकती है और फिजिकल एक्टिविटी कम हो सकती है, जिससे पाचन पर असर पड़ सकता है। पाचन तंत्र खाने को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (पाचन नली) में आगे बढ़ाने के लिए मांसपेशियों के तालमेल वाले संकुचन पर निर्भर करता है, जिसे पेरिस्टालसिस कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक शारीरिक रूप से इनएक्टिव रहता है, तो मल त्याग की प्रक्रिया अनियमित हो सकती है, जिससे कब्ज, पेट फूलने और पेट में बेचैनी जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।
बढ़ती हैं पाचन की समस्याएं
लंबे समय तक बैठे रहने से, खासकर खाना खाने के तुरंत बाद, कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। झुककर बैठने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे पेट की सामग्री का वापस एसोफैगस (खाने की नली) में जाना आसान हो जाता है। इससे सीने में जलन, एसिडिटी, डकार आना और खाने के बाद भारीपन महसूस होने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
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how prolonged sitting affects your digestive health and what doctors recommend to fix it 1
सेडेंटरी लाइफस्टाइल से बढ़ती है परेशानी
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, एक और चिंता की बात है सेडेंटरी लाइफस्टाइल (बैठकर काम करने वाली लाइफस्टाइल) का मेटाबॉलिज्म पर असर। शारीरिक रूप से इनएक्टिव रहने से ब्लड शुगर के नियंत्रण को प्रभावित कर सकती है और समय के साथ वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। शरीर का अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास, एसिड रिफ्लक्स और पाचन संबंधी अन्य समस्याओं के खतरे को और बढ़ा सकता है।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2024 में eBioMedicine में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, इस स्टडी के अनुसार, लंबे समय तक बैठने (prolonged sitting / sedentary lifestyle) का आपके पाचन स्वास्थ्य (digestive health) पर गहरा असर पड़ता है। खाली समय में ज्यादा देर स्क्रीन देखने या बैठने (Leisure Screen Time) से पाचन तंत्र (पेट और आंतों की समस्याएं) की 16 बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एसिड रिफ्लक्स (GERD), पेट का अल्सर (gastric ulcer), डुओडेनल अल्सर, क्रोनिक गैस्ट्राइटिस, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS), डाइवर्टिकुलर बीमारी, क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस एवं एक्यूट अपेंडिसाइटिस, लिवर, गॉलब्लैडर और पैनक्रियाज की समस्याएं (नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD), अल्कोहलिक लिवर डिजीज, पित्ताशय की सूजन (cholecystitis), पित्त की पथरी (cholelithiasis), कोलांगाइटिस और एक्यूट व क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस)।
लंबे समय तक बैठने से शरीर का BMI (मोटापा), इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसे मेटाबॉलिक फैक्टर्स प्रभावित होते हैं, जो इन बीमारियों को बढ़ाने में मध्यस्थ (mediators) की भूमिका निभाते हैं। इससे शरीर में क्रोनिक सूजन (chronic inflammation) बढ़ सकती है, लिपिड मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है और आंतों के बैक्टीरिया (gut microbiota) का संतुलन बिगड़ सकता है।
अच्छे पाचन के लिए खान-पान से जुड़ी सही आदतें
डॉ. अरविंद का कहना है, पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने में खान-पान की अहम भूमिका होती है। ऐसे में पाचन को दुरुस्त रखने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है। जैसे-
फाइबर से भरपूर फूड्स जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां और नट्स खाने से मल त्याग नियमित रहता है।
पर्याप्त पानी पीने से पाचन में मदद मिलती है और मल को सख्त होने से रोका जा सकता है।
कम मात्रा में बैलेंस डाइट लेने और तला-भुना, फैटी और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाना न खाने से भी पाचन संबंधी परेशानी कम हो सकती है।
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हेल्दी पाचन के लिए लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें
डॉ. अरविंद का कहना है, लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव बड़ा अंतर ला सकते हैं। ऐसे में सही खान-पान के साथ लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतों में बदलाव करना भी जरूरी है। जैसे-
- खाने के बाद थोड़ी देर टहलें।
- हर 30-60 मिनट में उठें।
- सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- रोज के रूटीन में फिजिकल एक्टिविटीज को शामिल करें।
इन आदतों को अपनाने से आंतों की गति और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
साल 2024 में eBioMedicine में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, मध्यम से तेज शारीरिक एक्टिविटी करने से एसिड रिफ्लक्स, अल्सर, IBS, पित्त की पथरी और पैनक्रियाटाइटिस जैसी 8 पाचन बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।
- पाचन से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए बैठने के समय को कम करना और एक्सरसाइज दोनों जरूरी हैं।
- लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में खड़े होना या हल्का टहलना (breaks in sitting time) ब्लड शुगर, इंसुलिन और पाचन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
- डायबिटीज और मोटापे से ग्रस्त लोगों को अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक रूप से ज्यादा एक्टिव रहने और बैठने का समय कम करने की खास सलाह दी जाती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर व्यक्ति को लगातार कब्ज, पेट में तेज दर्द, मल में खून आना या पाचन संबंधी लगातार लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। ताकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
निष्कर्ष
दिनभर बैठे रहने और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी से पाचन तंत्र की नॉर्मल गति धीमी हो सकती है, जिससे कब्ज, एसिडिटी, सीने में जलन और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक सेडेंटरी लाइफस्टाइल अपनाने से मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और पाचन से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में स्वस्थ पाचन के लिए फाइबर युक्त डाइट लें, पर्याप्त पानी पिएं और हर 30-60 मिनट में उठकर थोड़ी फिजिकल एक्टिविटीज करें या टहलने की आदत डालें। इसके अलावा, पाचन से जुड़ी कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
ज्यादा देर बैठने से कौन सी बीमारी होती है?
ज्यादा देर तक बैठे रहने और फिजिकल एक्टिविटीज न करने से व्यक्ति को दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा और कमर या पीठ दर्द जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।पाचन से जुड़ी समस्या के लक्षण क्या हैं?
व्यक्ति को पाचन से जुड़ी समस्या होने पर पेट में दर्द, गैस, एसिडिटी, दस्त, कब्ज, ब्लोटिंग, ऐंठन, मतली, उल्टी, लगातार थकान, अचानक से वजन में बदलाव और खाना पचाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Oct 04, 2026 17:55 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N
