Tue Sep 22, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vishal Khurana , Director & HOD - Gastroenterology & Hepatobiliary Sciences Metro Heart Institute, Faridabad

बवासीर ठीक होने के बाद दोबारा क्यों हो जाती है? इन गलतियों से बढ़ सकता है खतरा

बवासीर ठीक होने के बाद दोबारा होने की समस्या आम है। यहां डॉक्टर से जानिए, कब्ज, टॉयलेट की गलत आदतों और खान-पान की किन गलतियों से बवासीर वापस हो सकती है।
बवासीर ठीक होने के बाद दोबारा क्यों हो जाती है? इन गलतियों से बढ़ सकता है खतराबवासीर ठीक होने के बाद दोबारा क्यों हो जाती है? इन गलतियों से बढ़ सकता है खतरा

बवासीर की तकलीफ से राहत मिलने के बाद जब कुछ समय बीत जाता है, तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि अब यह समस्या दोबारा नहीं होगी लेकिन कई लोगों में अचानक फिर से मल त्याग के समय खून आना, गुदा के आस-पास दर्द, खुजली या गांठ जैसी परेशानी शुरू हो जाती है। मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपेटोबिलियरी साइंसेज विभाग के डायरेक्टर और HOD, डॉ. विशाल खुराना के अनुसार, कई लोग बवासीर ठीक होते ही अपने पुराने डेली रूटीन में वापस लौट जाते हैं। पानी कम पीना, भोजन में फाइबर की कमी, फिजिकल एक्टिविटी कम होना और शौच की इच्छा को बार-बार रोकना जैसी आदतें बवासीर की समस्या को दोबारा बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं।

बवासीर ठीक होने के बाद दोबारा क्यों हो जाती है?

डॉ. विशाल खुराना के अनुसार, बवासीर गुदा और निचले मलाशय की ब्लड वैसेल्स और आस-पास के टिश्यू के सूजने से जुड़ी समस्या है। अगर उन कारणों में बदलाव नहीं किया जाता जिनकी वजह से पहले बवासीर हुई थी, तो दोबारा समस्या हो सकती है। खासकर लगातार कब्ज रहने या मल त्याग के दौरान जोर लगाने से गुदा के पास की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए इलाज के बाद भी कब्ज से बचना और मल त्याग की आदतों को ठीक रखना जरूरी है।

1. कब्ज को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

  • बवासीर के दोबारा होने की सबसे आम वजहों में कब्ज शामिल है। जब मल कठोर हो जाता है, तो उसे बाहर निकालने के लिए व्यक्ति को ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है।
  • बार-बार ऐसा होने से गुदा के पास दबाव बढ़ता है और बवासीर के दोबारा होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • कब्ज से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना, भोजन में फाइबर वाली चीजें शामिल करना और फिजिकली एक्टिव रहना मददगार हो सकता है।

2. शौचालय में ज्यादा देर बैठने की आदत

  • डॉ. विशाल खुराना का कहना है कि आज के समय में कई लोग मोबाइल लेकर लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहते हैं।
  • इससे शौचालय में जरूरत से ज्यादा समय बिताने की आदत बन सकती है और गुदा पर दबाव पड़ सकता है।
  • अगर मल त्याग नहीं हो रहा है, तो लंबे समय तक बैठे रहने और जोर लगाने के बजाय कुछ समय बाद दोबारा कोशिश करना बेहतर है।

3. बार-बार जोर लगाना

  • मल त्याग के दौरान लगातार जोर लगाना बवासीर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
  • खासकर कब्ज की स्थिति में व्यक्ति जल्दी मल निकालने की कोशिश में ज्यादा दबाव डालता है।
  • यह आदत समस्या को दोबारा बढ़ा सकती है। इसलिए मल को रोककर रखना और बाद में बहुत जोर लगाकर निकालना, दोनों से बचना चाहिए।

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4. डाइट में फाइबर की कमी भी बन सकती है कारण

  • डॉ. विशाल खुराना के अनुसार, अगर डाइट में फाइबर कम है और भोजन में प्रोसेस्ड या कम फाइबर वाले फूड्स ज्यादा हैं, तो कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य फाइबर युक्त फूड्स मल को नरम रखने में मदद कर सकते हैं।
  • हालांकि, फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर होता है और पर्याप्त पानी भी लेना चाहिए।

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5. लंबे समय तक बैठे रहने की आदत

  • लगातार बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल कब्ज और फिजिकल इनएक्टिविटी से जुड़ी हो सकती है।
  • नियमित चलना-फिरना और शरीर को एक्टिव रखना पाचन और मल त्याग की नियमितता के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  • जिन लोगों का काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है, उन्हें बीच-बीच में उठकर चलने की आदत डालनी चाहिए।

साल 2022 में Advances in Therapy में प्रकाशित एक सिस्टमैटिक रिव्यू में बवासीर के दोबारा होने और दवाओं के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया। उपलब्ध अध्ययनों में बावासीर दोबारा होने से संबंधित आंकड़े सीमित थे।

कुछ स्टडीज में micronized purified flavonoid fraction (MPFF) लेने वाले मरीजों में बवासीर दोबारा होने का जोखिम placebo या no-treatment की तुलना में कम पाया गया और ब्लीडिंग, दर्द तथा सूजन जैसे लक्षणों में सुधार देखा गया। हालांकि, MPFF हर मरीज के लिए आवश्यक या उपयुक्त नहीं है, इसे डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। लंबे समय तक बार-बार बवासीर रोकने के लिए इसके प्रभाव पर अभी और बेहतर शोध की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

बवासीर के लक्षण ठीक होने के बाद भी अगर कब्ज, जोर लगाकर शौच करने और लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने जैसी आदतें जारी रहती हैं, तो समस्या दोबारा हो सकती है। पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त बैलेंस डाइट, नियमित फिजिकल एक्टिविटी और सही टॉयलेट जाने की आदतें दोबारा होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं। अगर बवासीर बार-बार लौट रही है या खून आने की समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर से जांच और उचित इलाज लेना जरूरी है।

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FAQ

  • क्या प्रेग्नेंसी के बाद बवासीर दोबारा हो सकती है?

    प्रेग्नेंसी और प्रसव के दौरान गुदा एरिया पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे बवासीर की समस्या हो सकती है। बाद में कब्ज जैसी समस्या रहने पर लक्षण दोबारा दिखाई दे सकते हैं।
  • क्या बवासीर एक बार होने के बाद हमेशा बनी रहती है?

    बवासीर के लक्षण इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से ठीक हो सकते हैं लेकिन कुछ लोगों में जोखिम वाले कारण बने रहने पर यह दोबारा हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 22, 2026 19:20 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Vishal Khurana

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