मौजूदा समय में ऐसे लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है, जो रात भर जगते हैं और सुबह के समय सोते हैं। कई लोग ऐसा अपने वर्क कल्चर के कारण करते हैं, तो कुछ अपनी आदत की वजह से इस जीवनशैली को अपना चुके हैं। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर रातभर जगना और सुबह सोने की यह आदत कितनी सही है?
इस बारे में Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से कहती हैं, "रात को जगना और सुबह के समय सोना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। इससे सेहत को भारी नुकसान हो सकता है। विशेषकर, हार्मोनल असंतुलन, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, हृदय स्वास्थ्य पर असर देखने को मिलता है।"
रात में जागने और सुबह सोने का शरीर पर असर
Is Staying Awake All Night And Sleeping In The Morning Bad For Health
रात में जागने और सुबह सोने के कारण शरीर कई तरह से प्रभावित हो सकता है, जैसे-
हार्मोनल असंतुलन
Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, "रात भर जागने के कारण शरीर में कोर्टिसोल यानी तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। वहीं, मेलाटोनिन का स्तर कम होने लगता है। यह हार्मोन नींद के लिए जिम्मेदार होता है।"
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चिड़चिड़ापन
Sleep Foundation की मानें, तो रात भर जगने के कारण एंग्जाइटी और डिप्रेशन बढ़ सकता है। असल में, आप रात के समय जितना कम सोते हैं, उतना अधिक आपका मूड प्रभावित होता है। यहां तक कि एक समय बाद व्यक्ति के लिए अपने इमोशंस को कंट्रोल करना तक मुश्किल हो जाता है।
इम्यूनिटी पर असर
PLOS ONE में प्रकाशित साइंटिफिक जर्नल से यह स्पष्ट होता है कि अगर कोई लंबे समय तक रात भर जगता है और दिन में सोता है, तो उसकी इम्यूनिटी भी प्रभावित होने लगती है। असल में, रात भर जगने के कारण शरीर की चोटिल मसल्स को रिकवरी का समय नहीं मिलता है। नतीजतन व्यक्ति दर्द के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
क्या देर रात तक जागना आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक को बिगाड़ता है?
Dr. Vineeta Singh Tandon बताती हैं, "हमारे शरीर में एक बायोलाॅजिकल क्लाॅक है, जिसे हम सर्कैडियन रिदम कहते हैं। यह अंधेरा होने पर सोने में मदद करता है और दिन होने पर जागने के लिए प्रोत्साहित करता है। वहीं, अगर आप लंबे समय तक रात में कृत्रिम रोशनी में जगते हैं, तो यह अपना काम सही तरह से नहीं कर पाता है।"
नींद की कमी से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
- मेटाबोलिक समस्याः सोने और जगने का रूटीन बदलने के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। इसका असर आपके मेटाबाॅलिज्म पर भी पड़ता है। दरअसल, अच्छी नींद नहीं लेने के कारण लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इससे बार-बार क्रेविंग्स बढ़ती है, शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, और आगे चलकर वजन बढ़ने, मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है।
- कार्डियोवैस्कुलर समस्याएंः अनियमित और अधूरी नींद की वजह से रेस्टिंग ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर ऊपर चला जाता है। जब किसी को लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, तो भविष्य में दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है।
- बार-बार बीमार पड़नाः इसका जिक्र हमने पहले भी किया है कि अच्छी नींद नहीं लेने के कारण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में शरीर इंफेक्शन से लड़ने वाले जरूरी साइटोकाइन्स और एंटीबॉडीज कम बना पाता है। नतीजतन, बदलते मौसम में व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ जाता है। ऐसे लोगों को सर्दी-जुकाम आदि समस्याएं अधिक होती हैं।
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एक्सपर्ट की रायः क्या यह स्लीप पैटर्न वाकई खतरनाक है?
Dr. Vineeta Singh Tandon स्पष्ट करती हैं, "इस तरह का स्लीप पैटर्न बिल्कुल सही नहीं है। हां, अगर किसी को अपने काम के चलते रात भर जगना पड़ता है, तो उन्हें अपनी जीवनशैली को उसी हिसाब से मैनेज करना चाहिए। साथ ही, सोने का एक डिसीप्लीन बनाना चाहिए ताकि वे रोजाना 7-8 घंटे की अनिवार्य नींद जरूर ले सकें। वहीं, कुछ लोग ऐसे हैं, जो दिन भर सोते हैं और रात को जगते हैं। उन्हें अपनी इस आदत को सुधारना चाहिए।"
निष्कर्ष
रात को जगना और दिन में सोने की अपनी आदत में सुधार करें। यह बिल्कुल सही नहीं है। इससे न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि मानसिक सेहत भी प्रभावित होती है। इसके अलावा, रात भर में पर्याप्त नींद न लेने से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे मौसमी बुखार, इंफेक्शन और फ्लू होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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FAQ
क्या दिन में सोते समय कमरे में आई मास्क लगाने से सर्कैडियन रिदम को स्पोर्ट मिल सकता है?
आई मास्क लगाने से आंखों के सामने अँधेरा छा जाता है, जिससे पीनियल ग्लैंड को यह संकेत मिलता है कि सोने का समय हो गया है। इससे दिन में डीप स्लीप लेने में मदद मिलती है।लगातार नाइट शिफ्ट करने वालों में पेट के अल्सर और एसिडिटी की समस्या अधिक क्यों देखने को मिलती है?
असल में, दिन में सोने के कारण सर्कैडियन क्लॉक सही तरह से काम नहीं करता है। रात में जब शरीर आराम की स्थिति में होना चाहिए, उस समय जागने और खाने से पेट में गैस्ट्रिक म्यूकोसा की सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है और एसिड प्रोडक्शन बढ़ जाता है। ऐसे में पेप्टिक अल्सर होने का रिस्क भी बढ़ता है।
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Oct 26, 2026 17:33 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon
