प्रेग्नेंसी में व्रत रखना चाहिए या नहीं, इसको लेकर अक्सर महिलाओं के मन में कशमकश रहती है। विशेषकर, प्रेग्नेंसी के दिनों में नवरात्रि के नौ दिनों का व्रत रखा जाना कितना सुरक्षित है, इस संबंध में सटीक जानकारी होना हर गर्भवती महिला के लिए आवश्यक है।
इस संबंध में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्टडॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "नवरात्रि में प्रेग्नेंट महिलाएं 9 दिनों का व्रत कर सकती हैं। हालांकि, उन्हें व्रत रखना है या नहीं, यह उनकी सेहत पर निर्भर करता है। अगर डॉक्टर ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है, तो बेहतर है कि आप 9 दिनों का व्रत न करें। इसके बजाय, डॉक्टर की दी हुई सलाह फॉलो करें और डाइट में अचानक ऐसे बदलाव न करें, तो सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।"
क्या प्रेग्नेंसी में 9 दिन का व्रत रखना सही है?- Is It Safe To Keep Nine Days Fasting During Pregnancy In Hindi
Is It Safe To Keep Nine Days Navratri Fast During Pregnancy
आमतौर पर प्रेग्नेंसी में 9 दिनों के लिए व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही नहीं है। इससे उसका विकास बाधित हो सकता है। डॉ. शोभा गुप्ता के शब्दों में, "प्रेग्नेंसी में आप नौ दिनों के लिए व्रत रखना चाहती हैं, तो बेहतर है कि इस बारे में आप अपने डॉक्टर से सलाह ले लें। वह आपकी सेहत की जांच करते हुए आपको इस संबंध में सही सलाह दे सकते हैं।"
MDPI के साइंटिफिक जर्नल Nutrients में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान इंटरमिटेंट फास्टिंग में रखने वाली माताओं के नवजात शिशुओं के औसत जन्म वजन में बहुत मामूली अंतर नजर आता है, जो कि चिंता का विषय नहीं है। अध्ययन में यह भी बताया गया कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में व्रत करने का प्रभाव बाद की तिमाहियों की तुलना में थोड़ा अधिक हो सकता है। इसलिए उन्हें व्रत करना है या नहीं, इस बारे में डॉक्टर की राय ले लेनी चाहिए।
इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में व्रत रखने के कारण हो रही है गैस की समस्या? जानें बचाव के 4 टिप्स
प्रेग्नेंसी में व्रत रखने के स्वास्थ्य जोखिम
Is It Safe To Keep Nine Days Navratri Fast In Pregnancy
- पानी की कमीः नौ दिनों तक लगातार व्रत करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी हो सकती है। असल में, इन दिनों महिलाओं को भारी मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत होती है। वहीं, अगर वे पर्याप्त मात्रा में पानी न पिएं या इलेक्ट्रोलाइट्स न लें, तो ऐसे में उन्हें चक्कर आना, सिरदर्द जैसी परेशानी हो सकती है।
- पोषक तत्वों की कमीः प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपने पोषण के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। लेकिन, 9 दिनों के व्रत में लोग फलाहार पर आश्रित होते हैं। इससे गर्भस्थ शिशु को सभी पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। यही कारण है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को नौ दिनों तक लगातार व्रत करने से बचना चाहिए।
- स्वास्थ्य समस्याएंः अगर प्रेग्नेंट महिला को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी कोई समस्या है, तो उन्हें नौ दिनों की फास्टिंग नहीं करनी चाहिए। इसका गर्भ में पल रहे शिशु पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। खासकर, अगर किसी गर्भ में शिशु का वजन नहीं बढ़ रहा है या महिला को एनीमिया जैसी खतरनाक समस्या है, तो भी व्रत किया जाना सही नहीं होता है। साल 2025 में मेडिकल जर्नल Medicine में प्रकाशित समीक्षा पत्र के अनुसार, एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर (mortality) का जोखिम बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए व्रत के दौरान पोषण संबंधी दिशा-निर्देश
अगर किसी गर्भवती महिला को नौ दिनों तक व्रत करना है, तो उन्हें डॉक्टर के पोषक तत्वों से संबंधित इन दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करना चाहिए, जैसे-
- खुद से सख्ती न बरतेंः व्रत के दौरान कई लोग खुद के संबंध में काफी स्ट्रिक्ट होते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इन दिनों निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए। इससे उनकी और गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान हो सकता है।
- छोटे-छोटे मील लेंः अगर गर्भावस्था में आप व्रत रख रही हैं, तो एक बार में हैवी मील न लें। इसके बजाय, प्रत्येक 2-3 घंटे में फलाहार लें, ताकि ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहे। इसमें आप दही, भुने हुए मखाने आदि शामिल कर सकती हैं।
- पर्याप्त पानी पिएंः गर्भावस्था में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। दिन भर में आवश्यकता अनुसार पानी पिएं। इसके अलावा, इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन के लिए नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी भी पी सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकता है? जानें डॉक्टर से
व्रत के दौरान शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने के उपाय
व्रत के दौरान महिलाओं को हाइड्रेशन पर विशेष जोर देना चाहिए। इन दिनों खुद को हाइड्रेट रखने के लिए यहां बताए गए टिप्स को अपनाएं-
- दिन भर में 10-15 गिलास पानी जरूर पिएं।
- एक बार में अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें।
- घूंट-घूंट लेकर पानी पीना फायदेमंद होता है।
- हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी पिएं।
- पानी युक्त फलों का सेवन अधिक करें।
किन परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं को व्रत नहीं रखना चाहिए
कई ऐसी परिस्थितियां होती हैं, जब प्रेग्नेंट महिला को व्रत नहीं करना चाहिए, जैसे-
- जेस्टेशनल डायबिटीज
- प्री-डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- हार्ट से संबंधित समस्या
- पुरानी बीमारी
- पहली तिमाही में उल्टी और मतली
- तीसरी तिमाही में पोषक तत्वों की कमी होने पर
डॉक्टर की सलाह
नवरात्रि में महिलाओं को व्रत रखना है या नहीं, इस संबंध में उन्हें अपने गायनेकोलॉजिस्ट से राय लेनी चाहिए। डाॅ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं, "अगर किसी को व्रत के दौरान सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, कमजोरी महसूस हो, तो उन्हें तुरंत व्रत तोड़ देना चाहिए। इसके अलावा, यह भी ध्यान रखें कि अगर व्रत के कारण शरीर में ऐसे बदलाव हो रहे जो सही नहीं है, जैसे शिशु की मूवमेंट में कमी, योनि से रक्तस्राव आदि, तो बेहतर है कि आप व्रत को जारी न रखें।" डाॅ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "यह सही संकेत नहीं है। गर्भवती महिलाओं को व्रत रखते हुए अपने साथ नर्मी बरतनी चाहिए। जैसे दिन भर में फलाहार लें, मखाने आदि हेल्दी स्नैक्स खाएं और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की कमी न होने दें। इस तरह की स्थिति में व्रत रखना सही हो सकता है।"
निष्कर्ष
नवरात्रि में गर्भवती महिलाएं चाहें, तो व्रत कर सकती हैं। हालांकि, उन्हें अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर उन्हें जरा भी लगे कि इसका उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है, तो बेहतर है कि वे व्रत न रखें। इसके अलावा, यह भी बेहतर होगा कि डॉक्टर की देख-रेख में ही व्रत रखने का निर्णय लें।
All Image Credit: Magnific
FAQ
गर्भावस्था के दौरान व्रत रखते हुए मॉर्निंग सिकनेस, हो तो क्या करें?
मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाने के लिए सुबह खाली पेट रहने से बचें। व्रत के दौरान साबूदाना कचौड़ी या तली-भुनी चीजें न खाएं। इसके बजाय भुना मखाना, अदरक वाली हर्बल टी आदि ले सकती हैं।क्या गर्भावस्था के दौरान व्रत रखने से गर्भस्थ शिशु की न्यूरोलॉजिकल ग्रोथ पर असर पड़ता है?
गर्भावस्था की पहली तिमाही लंबे समय तक व्रत रखना सही नहीं। इसी अवधि में शिशु की न्यूरल ट्यूब और मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है। ऐसे में अगर व्रत के कारण शरीर में पोषक तत्वों और फोलिक एसिड की कमी हो जाती है, तो शिशु मस्तिष्क विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 12, 2026 16:33 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
