Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकता है? जानें डॉक्टर से

प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाना सही नहीं है। हालांकि, अधिक मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज होता है या नहीं, यह जानना भी आवश्यक है। जानें, इस लेख में इस सवाल का सटीक जवाब।

प्रेग्नेंसी में कई महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज हो जाता है। इसका मतलब है गर्भकालीन मधुमेह। यह समस्या होने पर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ब्लड शुगर बहुत हाई रहता है। इसे हम हाइपरग्लाइसीमिया भी कहते हैं। आमतौर पर यह समस्या 24वें से 28वें सप्ताह के बीच गर्भवती महिला को हो सकती है। ऐसा न हो, इसके लिए डॉक्टर्स यही सलाह देते हैं कि गर्भावस्था में महिलाएं अपने खानपान और जीवनशैली को सही तरह से मैनेज करें। ऐसी चीजें न करें, जिससे उनका ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाए। ऐसे में कई महिलाएं प्रेग्नेंसी में मीठा खाना छोड़ देती हैं। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वाकई प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकता है? आइए, जानते हैं Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से।

प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकता है?- Can Eating A Lot Of Sugar Cause Gestational Diabetes

does eating too many sweets cause gestational diabetes 01 (1)

वैसे तो ज्यादा मीठा किसी को नहीं खाना चाहिए। ज्यादा मीठा खाना हेल्थ के लिए किसी भी लिहाज में सही नहीं होता है। जहां तक सवाल इस बात का है कि क्या प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज होता है? इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "बहुत ज्यादा मीठा खाने से सीधे तौर पर जेस्टेशनल डायबिटीज नहीं होता है। हां, अधिक मीठा खाने से वजन बढ़ सकता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इस तरह की परेशानियां टाइप 2 मधुमेह का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स पीने से प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर को रेगुलेट करने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है। इससे जेस्टेशनल डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ जाता है।" एनसीबीआई में प्रकाशित एक रिपोर्ट से भी यह पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान अधिक चीनी का सेवन करने से मां का वजन बढ़ सकता है। यह स्थिति जेस्टेशनल डायबिटीज, प्री-एक्लेम्पसिया और समय से पहले प्रसव जैसी जटिलताओं के खतरे को बढ़ा देता है।

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जेस्टेशनल डायबिटीज से कैसे बचें- Gestational Diabetes Prevention Tips

डॉ. शोभा बताती हैं कि जेस्टेशनल डायबिटीज न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप यहां बताए गए टिप्स को अपनाएं-

  • वजन बढ़ने न देंः गर्भावस्था में वजन बढ़ना नॉर्मल होता है, लेकिन ओवर वेट गेन होना सही नहीं है। अगर अतिरिक्त मात्रा में वजन बढ़ता है, तो इससे जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बना रहता है।
  • फिजिकली एक्टिव रहेंः विशेषज्ञों के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला को रोजाना 30 मिनट तक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसमें वॉकिंग या साइक्लिंग कर सकती हैं। हालांकि, आपको डॉक्टर ने रेस्ट करने को कहा है, तो एक्सरसाइज करने से बचें।
  • डाइट में सुधार करेंः एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि जेस्टेशनल डायबिटीज न हो, इसके लिए डाइट में भी जरूरी बदलाव करने आवश्यक हैं। जैसे नियमित रूप से फाइबर लें और अन्य पोषक तत्वों को शामिल करें। डाइट में शुगरी ड्रिंक को पूरी तरह दूर कर दें।

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निष्कर्ष

सिर्फ चीनी खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज नहीं होता है। हां, महिला की डाइट, लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर्स जेस्टेशनल डायबिटीज का कारण हो सकते हैं। इसके जोखिम कारक को कम करना है, तो बेहतर है कि अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, हेल्दी डाइट लें और अपना वजन बढ़ने न दें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाने से क्या होता है?

    प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाना सही नहीं है। इससे वजन बढ़ सकता है और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी असर पड़ सकता है।
  • ज्यादा मीठा खाने से कौन सी बीमारी होती है?

    ज्यादा मीठा खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी की दिक्कत हो सकती है, इससे टाइप 2 मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • क्या जेस्टेशनल डायबिटीज से वजन कम हो सकता है?

    जेस्टेशनल डायबिटीज का वजन पर असर पड़ता है। अगर इसे सही तरह से मैनेज किया जाए, तो बढ़ते वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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