डायलिसिस कराने वाले मरीजों को अक्सर अपना खानपान पर खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इन लोगों को हर फल, सब्जी या कोई अन्य फूड्स को बहुत सोच समझकर खाने की जरूरत होती है, क्योंकि इन फूड्स में पोटैशियम, फॉस्फोरस और सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि क्या डायलिसिस के ये मरीज शिमला मिर्च खा सकते हैं? इसको खाना सेफ है या नहीं? ऐसे में आइए इस बारे में जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से जानें शिमला मिर्च में पोटैशियम कितना होता है और इसको डायलिसिस के दौरान खा सकते हैं या नहीं?
डायलिसिस के मरीजों को पोटैशियम पर ध्यान देना क्यों है जरूरी?
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, डायलिसिस एक मेडिकल लाइफसेविंग प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मरीज की किडनी खराब हो जाती है या ठीक से काम नहीं करती है। इस स्थिति में शरीर एक्स्ट्रा पोटैशियम बाहर नहीं निकल पाता है, जिसके कारण शरीर में इसका स्तर बढ़ने लगता है। यह स्थिति दिल की धड़कन पर असर डालने और अन्य गंभीर स्थितियां हो सकती है। इसी कारण से डायलिसिस के मरीजों को अक्सर पोटैशियम से युक्त चीजों का सेवन करने और शरीर में इसकी मात्रा को नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है। इस स्थिति में डाइटिशियन या डॉक्टर से खाने से जुड़ी सलाह लें।
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शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा कितनी होती है?
आमतौर पर शिमला मिर्च को लो पोटैशियम वाली सब्जियों में गिना जाता है। 100 ग्राम हरी कच्ची शिमला मिर्च में 170 से 180 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। वहीं, लाल शिमला मिर्च में 194 से 213 मिलीग्राम और पीली शिमला मिर्च में लगभग 212 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। जिसको बहुत ज्यादा नहीं माना जाता है, क्योंकि रंग के अनुसार, इसकी मात्रा में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसके अलावा, शिमला मिर्च में अच्छी मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
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क्या डायलिसिस के मरीज शिमला मिर्च खा सकते हैं?
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, अगर डॉक्टर या डाइटिशियन ने शिमला मिर्च को खाने से मना नहीं किया है, तो डायलिसिस के मरीज शिमला मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में कर सकते हैं। इसको कम पोटैशियम वाली सब्जियों में से एक माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण शरीर के सेल्स को नुकसान में बचाने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे, इस बात पर ध्यान दें कि आप पूरे दिन में पोटैशियम युक्त कौन से फूड्स खा रहें और इनके साथ शिमला मिर्च का सेवन भी सीमित करें।
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शिमला मिर्च खाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
डायलिसिस के मरीजों को शिमला मिर्च का सेवन करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी होता है, जैसे इसको ज्यादा तेल, नमक या प्रोसेस्ड सॉस के साथ पकाने से बचना चाहिए। अगर इसकी सब्जी में आलू और टमाटर जैसी सब्जियां मिलाई जाती हैं, तो खाने में पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए बैलेंस तरीके से खाना खाएं। इसके लिए डाइटिशियन से सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा कम होती है। ऐसे में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के साथ डायलिसिस के मरीज शिमला मिर्च को सीमित मात्रा में खा सकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि आप इसके साथ कौन सी सब्जियां खा रहें हैं। इसके अलावा, किडनी या स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर और डाइटिशियन की सलाह अनुसार ही खाने की चीजों को चुनें।
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FAQ
किडनी खराब होने के क्या संकेत होते हैं?
किडनी खराब होने पर व्यक्ति को पैरों और चेहरे पर सूजन आने, यूरिन में झाग आने, पेशाब में बदलाव आने, बिना कारण कमजोरी होने, थकान होने, स्किन से जुड़ी समस्या होने और पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।शिमला मिर्च के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
शिमला मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसका जरूरत से ज्यादा सेवन करने के कारण व्यक्ति को पेट में जलन होने, पसीना आने, नाक बहने, ब्लोटिंग और गैस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Jul 03, 2026 15:45 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jul 03, 2026 15:45 IST
Modified By : Priyanka SharmaJul 03, 2026 15:45 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Archana Jain