Fri Nov 6, 2026 | 12:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

खराब AQI में बच्चों को बाहर खेलने देना कितना सेफ है? पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह

खराब AQI में बच्चों को बाहर खेलने भेजना पूरी तरह सेफ नहीं है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन आदि।
खराब AQI में बच्चों को बाहर खेलने देना कितना सेफ है? पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाहखराब AQI में बच्चों को बाहर खेलने देना कितना सेफ है? पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह

बच्चों को घर से बाहर खेलना बहुत पसंद आता है। मौसम कोई भी हो, उन्हें घर में रोकना मुश्किल होता है। लेकिन, फेस्टिव सीजन शुरू होने के बाद से ही दिनों-दिन AQI का स्तर खराब होता जा रहा है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक दिल्ली-NCR का AQI 300 पार है। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि इस खराब AQI में बच्चों को बाहर खेलने भेजना सेफ है या नहीं?

इस बारे में Dr. Abhishek Chopra, Senior Consultant, Paediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi बताते हैं, "बच्चों की इम्यूनिटी वयस्कों की तुलना में काफी कमजोर होती है और वे आसानी से बीमार हो जाते हैं। इसलिए, खराब AQI होने पर बच्चों को बाहर खेलने नहीं भेजना चाहिए। खराब AQI में खेलने जाने के कारण नाक में जलन, आंखों में जलन, पानी आने की समस्या आदि हो सकती है।"

खराब AQI में खेलने के नुकसान

Is It Safe For Kids To Play Outdoors During High AQIIs It Safe For Kids To Play Outdoors During High AQI

  1. सांस संबंधी समस्याः बच्चों को खराब AQI में खेलने के लिए नहीं भेजना चाहिए। इससे उन्हें रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। खासकर, जिन्हें पहले से ही सांस संबंधी समस्या है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
  2. अस्थमा ट्रिगर होनाः जो बच्चे पहले से ही अस्थमा के मरीज हैं, उन्हें भी आउटडोर एक्टिविटीज से पूरी तरह दूरी बनाए रखनी चाहिए। पैरेंट्स को चाहिए कि अगर उनके बच्चे अस्थमा से ग्रस्त हैं, तो उन्हें बाहर खेलने न भेजें, वरना उनकी समस्या ट्रिगर हो सकती है।
  3. नाक-आंख से पानी निकलनाः खराब AQI में खेलने के कारण बच्चों की आंखों में जलन, नाक में जलन, आंखों से पानी आना और गले में खराश जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।
  4. सिरदर्द और थकान होनाः खराब AQI में समय बिताने से सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि वयस्कों को भी यह परेशानियां ट्रिगर कर सकती हैं। कमजोर इम्यूनिटी के चलते आउटडोर गेम्स खेलने के कारण बच्चों को भी सिरदर्द हो सकता है।
  5. संक्रमण का जोखिमः जो बच्चे किसी क्राॅनिक बीमारी या रेस्पिरेटरी समस्याओं से ग्रस्त हैं, उनमें संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है और इनमें सर्दी-जुकाम, बुखार जैसे लक्षण भी जल्दी नजर आने लगते हैं।

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Air Quality and Outdoor Activity Guidance for Schools के आधार पर

AQI हवा की श्रेणी बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पैरेंट्स क्या करें?
0-50 अच्छा साफ हवा और पूरी तरह सेफ। बच्चों के लिए बाहर खेलने-कूदने के लिए या एक्सरसाइज करने के लिए सुरक्षित।
51-100 मध्यम सामान्य हवा और बच्चों के लिए ठीक-ठाक। जिन बच्चों की सेहत खराब रहती है, उन्हें हल्की परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों के अलावा, ज्यादातर बच्चों के लिए सेफ।
101-150 सेंसिटिव बच्चों के लिए अनसेफ। अस्थमा या सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के लिए अनसेफ है। बच्चों को बाहर खेलने के लिए बिल्कुल न भेजें।
151-200 बच्चों के लिए अस्वस्थ हवा। सभी बच्चों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। बच्चों को घर में रहने की सलाह दें और बाहर की फिजिकल एक्टिविटी न करने को कहें।
200 से अधिक बहुत खराब से खतरनाक हवा। इसकी वजह से बच्चों के फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है और सांस से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ता है। बच्चों को पूरी तरह घर के अंदर रहने को कहें।

National Library of Medicine में प्रकाशित क्लिनिकल रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, बच्चे वयस्कों की तुलना में एयर पॉल्यूटेंट्स के प्रति अधिक सेंसिटिव होते हैं। उनके अंग (विशेषकर फेफड़े) अभी विकसित हो रहे होते हैं और उनके सांस लेने की दर (respiratory rate) तेज होती है। यही कारण है कि वे शरीर के वजन के अनुपात में अधिक विषाक्त हवा अंदर खींच लेते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि छोटे बच्चे खेलते समय सांस की तकलीफ या शुरुआती लक्षणों को अक्सर अनदेखा कर देते हैं और खेलना जारी रखते हैं, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।

पैरेंट्स क्या करें?

AQI बढ़ने पर पैरेंट्स की जिम्मेदारी अपने बच्चों के प्रति बढ़ जाती है। उन्हें इन दिनों कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि खराब AQI में बच्चों की सेहत न बिगड़े-

  1. रियल टाइम AQI चेक करना न भूलें। जिस समय सबसे खराब एयर क्वालिटी हो, उस समय बच्चे को बिल्कुल बाहर न भेजें।
  2. घर के अंदर एयर प्यूरिफायर का उपयोग जरूर करें। इससे घर के अंदर की हवा को शुद्ध करने में मदद मिलती है।
  3. बच्चों को बाहर खेलने न भेजें। संभव हो, तो उन्हें इनडोर एक्टिविटी के लिए प्रेरित करें।
  4. बच्चों को प्रदूषित एरिया में भेजने से बचें। जैसे गाड़ी के आसपास या फैक्ट्री के इर्द-गिर्द उन्हें जाने न दें।
  5. जब बच्चे घर से बाहर जाएं, तो लौटने के बाद उन्हें पोस्ट आउटडोर हाइजीन पर ध्यान देने की सलाह दें।
  6. अगर बच्चे की सेहत पर जरा भी नकारात्मक प्रभाव दिखे, जैसे सांस संबंधी समस्या आदि, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

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बच्चों को डॉक्टर के पास कब ले जाएं?

  1. सांस लेने में तकलीफ होने पर।
  2. होंठों का रंग बदलना जैसे नीला या ग्रे नजर आने पर।
  3. सीने में दर्द और चीजों को समझने में दिक्कत होने पर।
  4. अगर बच्चे को अस्थमा है, तो घर में इन्हेलर जरूर रखें।
  5. अगर बच्चे को सांस फूलने पर इन्हेलर देने के बाद भी राहत न मिले, तो तुरंत इमरजेंसी में ले जाएं।

निष्कर्ष

खराब AQI होने पर बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी न करने की सलाह दी जानी चाहिए। हालांकि, मौसम या माहौल कोई भी हो, बच्चे घर में रहकर समय बिताना पसंद नहीं करते हैं। वे अपने दोस्तों के साथ खेल-कूद में लगे रहते हैं। लेकिन, खराब AQI में बच्चों का इस तरह खेल-कूद करना सही नहीं है। इससे उनकी सेहत बिगड़ सकती है। जरूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चों का आउटडोर टाइम सीमित करें और आवश्यक हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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FAQ

  • क्या इस प्रदूषण में बच्चों को स्कूल या पार्क भेजते समय साधारण सूती कपड़ा या रूमाल मुंह में बांध सकते हैं?

    नहीं, रूमाल या साधारण कपड़ा PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों को नहीं छान पाता। इससे बच्चे को प्रदूषण से नहीं बचाया जा सकता है। बच्चों के लिए उनके चेहरे के नाप का सही फिटिंग वाला चाइल्ड-साइज N95 रेस्पिरेटर मास्क ही दें।
  • क्या जहरीली हवा में खेलने के बाद बच्चों की आंखों को सादे पानी से बार-बार धोना चाहिए?

    आंखों की जलन और धूल साफ करने के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाए गए लुब्रिकेटिंग या सलाइन आई ड्रॉप्स का उपयोग किया जा सकता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 06, 2026 11:56 IST

    Published By : Meera Tagore
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