Mon Oct 12, 2026 | 04:08 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akash Singhal , Consultant – Orthopaedics

World Arthritis Day: गठिया में रोज दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें

गठिया के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या कई लोगों को होती है और इसकी वजह से लोग पेन किलर टेबलेट लेना शुरू कर देते हैं जो कि सही नहीं है। यहां ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जानिए, गठिया में रोज दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है?
World Arthritis Day: गठिया में रोज दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानेंWorld Arthritis Day: गठिया में रोज दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें

वर्ल्ड अर्थराइटिस डे के मौके पर गठिया और दर्द निवारक यानी पेन किलर दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक होना जरूरी है। गठिया यानी अर्थराइटिस में दर्द और सूजन के कारण कई लोगों को चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजाना के काम करने में परेशानी होती है, ऐसे में कई लोग पेन किलर्स लेना शुरू कर देते हैं। कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. आकाश सिंघल के अनुसार, पेन किलर टेबलेट कुछ समय के लिए राहत जरूर देती हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आकाश सिंघल से समझते हैं कि गठिया में रोज दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है, लंबे समय तक पेन किलर खाने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है और जोड़ों के दर्द को कंट्रोल करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गठिया में दर्द की गोली लेना कितना सुरक्षित है?

ऑर्थोपेडिक्स डॉ. आकाश सिंघल के अनुसार, गठिया यानी अर्थराइटिस में जोड़ों का दर्द कम करने के लिए डॉक्टर कुछ स्थितियों में दर्द निवारक दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, हर मरीज के लिए एक ही दवा और उसकी खुराक नहीं होती। दवा का चुनाव गठिया के प्रकार, दर्द की गंभीरता, उम्र और मरीज की दूसरी हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखकर किया जाता है।

  • ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आकाश सिंघल के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक रोजाना पेन किलर लेना शरीर पर बुरा असर डाल सकता है।
  • दर्द की गोली से कुछ समय के लिए राहत मिलने का मतलब यह नहीं है कि गठिया की समस्या ठीक हो रही है।
  • इसलिए दर्द बार-बार होने पर केवल दवा के सहारे रहने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

क्या पेनकिलर का लंबे समय तक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचाता है?

ऑर्थोपेडिक्स डॉ. आकाश सिंघल के अनुसार, कुछ पेन किलर दवाएं, खासकर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) लंबे समय तक लेने या ज्यादा खुराक में इस्तेमाल करने पर कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती हैं। रोजाना पेनकिलर के नुकसान (Side effects of daily painkillers) बहुत हैं, पेट में जलन, अल्सर और कभी-कभी पेट या आंतों से खून बहने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, कुछ दवाएं किडनी के फंक्शन को भी प्रभावित कर सकती हैं और शरीर में पानी जमा होने या ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण बन सकती हैं। जिन लोगों को पहले से किडनी, दिल या पेट से जुड़ी समस्या है, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए।

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डॉक्टर की सलाह: दर्द की दवा कब और कितनी मात्रा में लें?

ऑर्थोपेडिक्स डॉ. आकाश सिंघल सलाह देते हैं कि गठिया के हर मरीज को रोज दर्द की गोली लेने की जरूरत नहीं होती। कुछ लोगों में दर्द कभी-कभी बढ़ता है, जबकि कुछ मरीजों को लगातार दर्द होता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर फायदे और संभावित नुकसान को ध्यान में रखकर दवा की प्लानिंग बनाते हैं।

यदि दर्द लगातार बना हुआ है या दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है, तो खुद से खुराक बढ़ाना या दूसरी पेन किलर दवा लेना सही नहीं है। एक साथ दो ऐसी दवाएं लेना जिनमें समान या मिलते-जुलते दर्द निवारक तत्व हों, नुकसान का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स की जानकारी दें।

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साल 2012 में The Open Rheumatology Journal में प्रकाशिर रिसर्च के अनुसार-

  • गठिया के दर्द का इलाज करना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें असरदार इलाज के साथ-साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।
  • दर्द के अलग-अलग कारणों को समझते हुए अब डॉक्टर एक से ज्यादा तरीकों (multimechanistic approach) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • लंबे समय के दर्द के लिए ट्रामाडोल और पैरासिटामोल का संयोजन एक अच्छा और असरदार विकल्प साबित हुआ है।
  • वहीं, दर्द के अचानक तेज होने पर NSAIDs बहुत मददगार हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में सेवन, खासकर बुजुर्गों के लिए, सुरक्षित नहीं है।

गठिया में दर्द कम करने के लिए क्या करें?

डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्की एक्सरसाइज, नियमित वॉक और जोड़ों के लिए सही एक्टिविटीज करने से मदद मिल सकती है। जरूरत से ज्यादा वजन होने पर उसे धीरे-धीरे कम करना भी घुटनों और कूल्हों के जोड़ों पर दबाव घटाने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही, पर्याप्त नींद लें और ऐसी एक्टिविटीज से बचें जिनसे जोड़ों का दर्द बढ़ता है।

गठिया के प्रकार के अनुसार इलाज अलग हो सकता है। रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसे सूजन वाले गठिया में ऐसी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है जो बीमारी की बढ़ोतरी को कंट्रोल करती हैं। केवल पेन किलर लेने से बीमारी का मूल कारण कंट्रोल नहीं होता है।

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निष्कर्ष

वर्ल्ड अर्थराइटिस डे पर गठिया के मरीजों के लिए यह समझना जरूरी है कि दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना बिना सलाह के पेन किलर लेना सुरक्षित आदत नहीं है। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आकाश सिंघल के अनुसार, लंबे समय तक पेन किलर दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आपको बार-बार जोड़ों में दर्द होता है, सूजन रहती है या रोज दवा लेने की जरूरत पड़ती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। सही जांच, उचित इलाज, नियमित एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलावों से गठिया को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

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FAQ

  • क्या गठिया का दर्द मौसम बदलने पर बढ़ता है?

    कुछ लोगों को ठंड या मौसम में बदलाव के दौरान जोड़ों में दर्द और अकड़न अधिक महसूस हो सकती है। हालांकि, इसका अनुभव हर व्यक्ति में अलग होता है।
  • क्या गठिया में सीढ़ियां चढ़ना बंद कर देना चाहिए?

    हर मरीज को सीढ़ियां चढ़ना बंद करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, घुटनों में ज्यादा दर्द होने पर एक्टिविटीज में बदलाव करना और डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना सही है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 12, 2026 15:20 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Akash Singhal