Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

वेट लॉस जर्नी में कभी-कभार फास्ट फूड खाना सही है या नहीं? एक्‍सपर्ट से जानें

वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि क्या वेट लॉस जर्नी के दौरान फास्ट फूड पूरी तरह छोड़ देना चाहिए या कभी-कभार खा सकते हैं? एक्‍सपर्ट से जानेंगे इसका जवाब।

कई लोग वेट लॉस जर्नी शुरू करते ही पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और अन्य पसंदीदा चीजों से दूरी बना लेते हैं। हालांकि कुछ समय बाद इन्हीं चीजों को खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है, जिससे डाइट फॉलो करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या कभी-कभार फास्ट फूड खाना वेट लॉस की कोश‍िशों को नुकसान पहुंचाता है या नहीं? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

वेट लॉस जर्नी में कभी-कभी फास्‍ट फूड खा सकते हैं

वेट लॉस करना केवल किसी एक भोजन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आपकी पूरी जीवनशैली, खानपान की आदतों और लंबे समय तक बनाए गए कैलोरी संतुलन पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति अधिकांश समय संतुलित और पौष्टिक आहार लेता है, तो कभी-कभार फास्ट फूड खाने से उसके वेट लॉस लक्ष्य पर बड़ा असर नहीं पड़ता। समस्या तब होती है जब फास्ट फूड नियमित आदत बन जाए या उसकी मात्रा जरूरत से ज्‍यादा हो।

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पसंदीदा चीज को खाना पूरी तरह से बंद न करें

वेट लॉस जर्नी में अगर आप खुद को हर पसंदीदा चीज खाने से पूरी तरह रोक देंगे, तो लंबे समय तक डाइट का पालन करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए कभी-कभार सीमित मात्रा में फास्ट फूड खाया जा सकता है। इसे कई एक्‍सपर्ट्स 80-20 नियम कहते हैं। यानी 80 प्रतिशत समय पौष्टिक और संतुलित भोजन लें और 20 प्रतिशत समय अपनी पसंद की चीजें सीमित मात्रा में खा सकते हैं। इस तरह आप वेट लॉस लक्ष्‍य को पूरा कर पाएंगे।

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फास्ट फूड से समस्या कब होती है?

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फास्ट फूड आमतौर पर ज्‍यादा कैलोरी, फैट, नमक और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। अगर इसे बार-बार खाया जाए, तो वजन घटाने का प्रयास व‍िफल हो सकता है। समस्या तब भी हो सकती है जब एक चीट मील, चीट डे में बदल जाए। उदाहरण के लिए, अगर आप सिर्फ एक बर्गर खाने का प्‍लान बनाते हैं लेकिन उसके साथ फ्राइज, कोल्ड ड्रिंक और डेजर्ट भी ले लेते हैं, तो कैलोरी की मात्रा काफी बढ़ सकती है। साल 2024 में Mintage Journal Of Pharmaceutical & Medical Sciences नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, नियमित रूप से फास्ट फूड खाने से टाइप 2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

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पोर्शन साइज का ध्यान रखें

  • फास्ट फूड खाते समय पोर्शन साइज का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। बड़ी सर्विंग की बजाय छोटी या मीडियम सर्विंग चुनें।
  • अगर आपने एक समय फास्ट फूड खाया है, तो दिन के बाकी भोजन को ज्‍यादा पौष्टिक और हल्का रखें।
  • मीठे कोल्ड ड्रिंक की बजाय पानी, नींबू पानी या बिना चीनी वाले पेय को चुनें।
  • ऐसे विकल्प चुनें जिनमें कुछ मात्रा में प्रोटीन और फाइबर मौजूद हो। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है।
  • कभी-कभार फास्ट फूड खाने के बाद खुद को दोषी महसूस करने की जरूरत नहीं है। एक भोजन आपकी पूरी प्रगति को खराब नहीं करता।

निष्कर्ष:

वेट लॉस जर्नी में कभी-कभार फास्ट फूड खाना आमतौर पर हान‍िकारक नहीं माना जाता, लेक‍िन आपकी कुल डाइट संतुलित होनी चाह‍िए। वजन कम करने का लक्ष्य केवल किसी एक भोजन से तय नहीं होता, बल्कि आपकी रोज की आदतों और लंबे समय तक बनाए गए स्वस्थ जीवनशैली पैटर्न पर निर्भर करता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 01, 2026 22:16 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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