थायराइड में अश्वगंधा लेने के फायदों के बारे में सोशल मीडिया पर कई दावे देखने को मिलते हैं। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट ऐसे होते हैं, जिसमें थायराइड की समस्या में अश्वगंधा को एक प्राकृतिक उपाय बताया गया है। कई बार मरीज बिना डॉक्टर की सलाह लिए इसे लेना शुरू कर देते हैं। इस बारे में Dr. Chetan Sharma, Senior Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad कहते हैं कि थायराइड के सभी मरीजों के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल सही नहीं है। कुछ रिसर्च में सामने आया है कि अश्वगंधा के इस्तेमाल से थायराइड हार्मोन लेवल में बदलाव देखने को मिले हैं। इसलिए थायराइड के मरीजों को इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
हाइपोथायरॉयडिज्म में अश्वगंधा कितना फायदेमंद है?
Sage Journals में प्रकाशित स्टडी में सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉयडिज्म वाले 50 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें से 25 लोगों को 600 मिलीग्राम अश्वगंधा अर्क दिया गया और 25 को प्लेसीबो दिया गया। करीब 8 हफ्ते बाद अश्वगंधा वाले ग्रुप के लोगों में प्लेसीबो के मुकाबले TSH, T3 और T4 लेवल में सुधार देखा गया। हालांकि, इसे सभी हाइपोथायरॉयडिज्म के मरीजों पर लागू नहीं किया जा सकता है।
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “हाइपोथायरॉयडिज्म में थायराइड ग्लैंड पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बना पाती। इस वजह से मरीजों को थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा का रूखापन और सुस्ती जैसी परेशानियां हो सकती हैं। थायराइड के मरीज अगर दवा लेते हैं, तो दवा को बंद करके अश्वगंधा लेना बिल्कुल भी सही तरीका नहीं है। थायराइड के मरीजों को अश्वगंधा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।”
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हाइपरथायरॉयडिज्म में सावधानी बरतना क्यों जरूरी है?
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “अगर थायराइड ग्लैंड पहले से ज्यादा एक्टिव है और शरीर में थायराइड हार्मोन बनने लगते हैं, तो इसे हाइपरथायरॉयडिज्म कहा जाता है। इस कंडीशन में मरीजों को अश्वगंधा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि अश्वगंधा लेने के बाद थायराइड हार्मोन का लेवल बढ़ने की संभावना हो सकती है। दरअसल, हाइपरथायरॉयडिज्म में हार्ट बीट तेज होना, हाथ कांपना, बहुत ज्यादा पसीना आना, बेचैनी, वजन कम होना और गर्मी ज्यादा लगने जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में अगर मरीज बिना सलाह के अश्वगंधा लेते हैं, तो इससे कंडीशन बिगड़ सकती है।”
थायराइड के किन मरीजों को अश्वगंधा लेने से बचना चाहिए?
Dr. Chetan Sharma ने सलाह दी है कि आयुर्वेद में अश्वगंधा को बेहतरीन जड़ी-बूटी माना जाता है, लेकिन इसे हर बीमारी के इलाज में नहीं लिया जा सकता है। थायराइड के मामलों में भी कुछ ऐसा ही है। इसलिए इन लोगों को अश्वगंधा लेने से पहले डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।
- ग्रेव्स डिजीज के मरीज - ग्रेव्स ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। ऐसे मरीजों को किसी भी थायराइड एक्टिव सप्लीमेंट अपनी मर्जी से शुरू नहीं करना चाहिए। इससे कंडीशन खराब हो सकती है।
- थायराइड के मरीजों की दवा बदलने पर - जिन मरीजों के थायराइड हार्मोन लेवल को कंट्रोल करने की कोशिश हो रही हो और दवाओं में बदलाव हो रहा हो या उनके TSH और Free T4 की रिपोर्ट्स में बदलाव हो रहा हो, उन्हें अश्वगंधा जैसे सप्लीमेंट खुद से शुरू नहीं करने चाहिए। अगर कोई थायराइड की दवा और अश्वगंधा सप्लीमेंट ले रहा हो, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए।
- प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं के लिए सावधानी - गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान अश्वगंधा खुद से लेना नुकसान कर सकता है। प्रेग्नेंसी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं, ऐसे में अश्वगंधआ लेना मां और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जो महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं या फिर ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं, उन्हें अश्वगंधा सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
- लिवर की बीमारी - अश्वगंधा लेने वाले मरीजों में लिवर इंजरी होने का रिस्क पाया गया है। इसलिए जिन लोगों को लिवर से जुड़ी बीमारी है, उन्हें अश्वगंधा लेने से बचना चाहिए।
अश्वगंधा लेने से पहले मरीज को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि अश्वगंधा लेने से पहले थायराइड के मरीज को ये चीजें पता करना जरूरी है, ताकि अश्वगंधा लेने के फायदे या नुकसान का पता चल सके।
- मरीजों को हाइपोथायरॉयडिज्म है या हाइपरथायरॉयडिज्म है?
- हाशिमोटो थायरॉयडिज्म है या ग्रेव्स बीमारी है?
- फिलहाल TSH और Free T4 क्या हैं?
- थायराइड की दवा कौन-सी चल रही है?
- क्या अन्य दवा या सप्लीमेंट्स भी लिए जा रहे हैं?
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डॉक्टर की सलाह
Dr. Chetan Sharma सलाह देते हैं कि अश्वगंधा लेना हर मरीज के लिए जरूरी नहीं है। जो मरीज दवा लेते हैं, तो वे डॉक्टर की सलाह लेकर सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। थायराइड के मरीजों को सिर्फ लक्षणों के आधार पर दवा नहीं दी जा सकती है। इसलिए थायराइड के सभी मामलों में मरीज को डॉक्टर की ही सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
अश्वगंधा कुछ हाइपोथायरॉयडिज्म वाले मरीजों को दिया जा सकता हैसस लेकिन हाइपरथायरॉयडिज्म वाले मरीजों को नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा, ग्रेव्स के मरीजों को भी अश्वगंधा लेने से पहले एक्सपर्ट की राय लेनी चाहिए। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग वाली महिलाओं को अश्वगंधा लेने से बचना चाहिए। किसी भी हर्बल प्रोडक्ट या अश्वगंधा लेने से पहले उसके फायदे और नुकसान की जानकारी डॉक्टर से लेना महत्वपूर्ण है।
FAQ
यदि कोई मरीज एलोपैथिक थायराइड की दवा ले रहा है, तो क्या वह अश्वगंधा ले सकता है?
डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह से खुराक एडजस्ट करके ही अश्वगंधा लेना चाहिए। अश्वगंधा दवा के असर को बढ़ा सकता है, जिससे आपका TSH लेवल अचानक बहुत ज्यादा गिर सकता है। दोनों के सेवन में कम से कम दो घंटे का अंतर रखें।क्या गर्भावस्था या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान थायराइड मरीज अश्वगंधा ले सकते हैं?
प्रेग्नेंसी के दौरान अश्वगंधा का सेवन गर्भाशय में संकुचन ला सकता है, जिससे गर्भपात का खतरा रहता है। स्तनपान कराने वाली माताओं को भी इससे बचना चाहिए।
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Oct 07, 2026 14:44 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma
