Thu Sep 17, 2026 | 12:57 PM IST

Medically Reviewed by Dr Pankila Mittal , Obstetrician and Gynaecologist, Fertility & IVF Specialist, Laparoscopic Surgeon - Cloudnine, New Delhi

प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने के लिए रखें इन 5 बातों का ध्यान, जानें डॉक्टर की सलाह

प्रेग्नेंसी में हर महिला चाहती है कि उसकी डिलीवरी नॉर्मल तरीके से हो। इसके लिए प्रेग्नेंसी में महिलाएं अपने लाइफस्टाइल और डाइट में क्या बदलाव कर सकती हैं? इस लेख में डॉक्टर ने विस्तार से समझाया है।

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के लिए अपने लाइफस्टाइल या डाइट में बदलाव करने की कोशिश करती हैं। हालांकि, उन्हें कई बार कंफ्यूजन रहती है कि ऐसा क्या किया जाए कि प्रेग्नेंसी के दौरान सेहतमंद रहे और डिलीवरी भी नॉर्मल रहे। इस बारे में दिल्ली के Cloudnine Group of Hospitals के Department of Obstetrics and Gynecology की सीनियर कंसल्टेंट Dr. Pankila Mittal ने समझाया कि हर महिला के लिए नॉर्मल डिलीवरी हो, इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं दी जा सकती। हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ सेहतमंद आदतें अपनाकर मां और शिशु दोनों ही सेहतमंद रह सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी के लिए अपनाएं ये 5 तरीके

Dr. Pankila Mittal ने कहा, “यह समझना बहुत जरूरी है कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है और डिलीवरी का तरीका भी मां और शिशु की सेहत के आधार पर किया जाता है। अगर महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है, तो महिला ये तरीके अपना सकती है।”

1. प्रेग्नेंसी में रेगुलर चेकअप कराना जरूरी

Dr. Pankila Mittal ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाएं रेगुलर चेकअप को टालने लगती हैं कि सब कुछ ठीक ही है, लेकिन ऐसा नहीं होता। गर्भावस्था में नियमित चेकअप में महिला का ब्लड प्रेशर, वजन, ब्लड, और अन्य जरूरी पैरामीटर चेक किए जाते हैं। इसके साथ भ्रूण की ग्रोथ पर भी लगातार नजर रखी जाती है। नियमित चेकअप के जरिए ही समस्या का समय पर पता चल सकता है और उसका मैनेजमेंट जल्दी शुरू हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान सभी महिलाओं को अपने डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए, ताकि महिला या भ्रूण में होने वाले किसी भी बीमारी का समय पर पता चल सके।

2. बैलेंस्ड डाइट पर ध्यान देना जरूरी

Dr. Pankila Mittal का कहना है, “अक्सर मेरे पास महिलाएं इस सोच के साथ आती है कि प्रेग्नेंसी में उन्हें दो लोगों का खाना है और इसे वह जरूरत से ज्यादा खाना समझ लेती हैं। हालांकि, इसका मतलब खाने की मात्रा से नहीं होता, बल्कि डाइट की क्वालिटी मायने रखती है। खाने में प्रोटीन, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स लेने चाहिए। इसके साथ प्रेग्नेंट महिलाओं को आयरन, कैल्शियम, फॉलिक एसिड और डॉक्टर की सलाह पर अन्य सप्लीमेंट्स भी लेने चाहिए।”

NHS भी कहता है कि प्रेग्नेंसी में दो लोगों के बराबर खाने की कोई जरूरत नहीं होती, बल्कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कब्ज से बचाव के लिए फल और सब्जियां डाइट में शामिल करनी चाहिए।

  • इसके अलावा, एनर्जी के लिए विटामिन, फाइबर, साबुत अनाज जैसे विकल्पों को अपनाना चाहिए।
  • प्रेग्नेंसी में प्रोटीन, डेयरी प्रोडक्ट्स और हेल्दी स्नैकिंग लें।

normal delievery precautions

यह भी पढ़ें- प्रेग्नेंसी में रोज कितना चलना चाहिए? डॉक्टर से जानें इसके फायदे

3. प्रेग्नेंसी में एक्टिव रहना जरूरी

Dr. Pankila Mittal कहती हैं, “प्रेग्नेंसी में महिलाएं सिर्फ आराम ही करने लगती है, लेकिन यह सभी प्रेग्नेंसी के मामलों में नहीं होता। अगर प्रेग्नेंसी सामान्य है, तो डॉक्टर की सलाह पर फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रेग्नेंसी में फिजिकल एक्टिविटी की सलाह महिला की मेडिकल कंडीशन और उसकी उम्र देखकर दी जाती है। इसलिए सोशल मीडिया या इंटरनेट पर देखकर खुद से एक्सरसाइज न करें।”

4. स्मोकिंग और तंबाकू के इस्तेमाल से बचें

Dr. Pankila Mittal के अनुसार, नॉर्मल प्रेग्नेंसी के लिए महिलाओं को इस दौरान स्मोकिंग और तंबाकू से पूरी तरह बचना जरूरी है। इसके साथ ही शराब का सेवन भी बिल्कुल न करें। ये चीजें मां की सेहत के साथ-साथ भ्रूण के विकास के लिए भी नुकसानदायक हो सकती हैं।

NHS के मुताबिक, स्मोकिंग का धुआं सांस के जरिए शिशु तक पहुंच सकता है। हर सिगरेट में चार हजार से ज्यादा हानिकारक केमिकल्स होते हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड व अन्य जहरीले तत्व फेफड़ों के जरिए ब्लड फ्लो में, फिर प्लासेंटा (नाल) के माध्यम से बच्चे के शरीर में चले जाते हैं।

इसी तरह शराब सीधे शिशु के प्लेसेंटा तक पहुंच सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान शराब पीने से मिसकैरेज और समय से पहले डिलीवरी होना और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का रिस्क हो सकता है।

5. पानी और नींद को नजरअंदाज न करें

Dr. Pankila Mittal ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं। इसलिए पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में फ्लूड लेते रहना जरूरी है। हालांकि, पानी या फ्लूड की मात्रा मौसम, एक्टिविटी और मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में नींद जरूर लें, अन्यथा प्रेग्नेंसी में सिरदर्द की समस्या हो सकती है। स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज जरूरी करें।

डॉक्टर की सलाह

Dr. Pankila Mittal कहती हैं, “मेरे पास कई महिलाएं आती हैं, जो नॉर्मल डिलीवरी को लेकर बहुत ज्यादा प्रेशर महसूस करती है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि नॉर्मल डिलीवरी होना ही हेल्दी बर्थ का एकमात्र तरीका नहीं है। कुछ स्थितियों में सर्जरी करना मां और शिशु दोनों के लिए जरूरी हो सकता है। इसलिए डिलीवरी का तरीका शिशु की पोजीशन, कंडीशन, लेबर पेन और मां की हेल्थ पर निर्भर करता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में महिलाएं खुद को हेल्दी रखने की कोशिश करें, लेकिन डिलीवरी को लेकर ज्यादा परेशान न हो।”

यह भी पढ़ें- प्रेग्नेंसी में बच्चे की हलचल कम होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं? जानें सही समय

निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में अगर ब्लीडिंग, पानी जैसा डिस्चार्ज निकलने लगे, बहुत तेज सिरदर्द, बच्चे की मूवमेंट सामान्य से कम महसूस होना और अचानक बहुत ज्यादा सूजन दिखें, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी के लिए महिलाओं को हेल्दी आदतें और डाइट रोजाना अपनाना जरूरी है। इसके साथ ही डॉक्टर से रेगुलर चेकअप जरूर कराएं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या एनीमिया होने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है?

    अगर गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन 10 ग्राम से कम है, तो डिलीवरी के दौरान थकावट जल्दी होती है और मां बच्चे को पुश करने में असमर्थ हो सकती है। इसके साथ ही ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ता है, इसलिए प्रेग्नेंसी में डॉक्टर की सलाह पर आयरन और फोलिक एसिड जरूर लेना चाहिए। 
  • क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा वजन बढ़ने से नॉर्मल डिलीवरी कठिन हो जाती है?

    मां का वजन बहुत ज्यादा बढ़ने से जेस्टेशनल डायबिटीज और बच्चे का आकार बहुत बड़ा होने का खतरा रहता है। ऐसे में बर्थ कैनाल से बच्चे को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है।

Read Next

क्या गर्भ में शिशु की गर्दन में गर्भनाल का लिपटना वाकई खतरनाक है? जानें डॉक्टर की राय

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 17, 2026 11:58 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Pankila Mittal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content