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Medically Reviewed by Dr Deepak Kumar Arora , Orthopaedics & Joint Replacement

हड्डी का फ्रैक्चर जल्दी कैसे ठीक होता है? डॉक्टर से जानें हीलिंग तेज करने के 5 तरीके

हड्डी का फ्रैक्चर जल्दी ठीक करने के लिए प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर डाइट लें, पर्याप्त आराम करें और डॉक्टर की सलाह मानें। यहां ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जानिए, हड्डियों को जुड़ने में कौन सी टिप्स फायदेमंद हो सकती हैं?
हड्डी का फ्रैक्चर जल्दी कैसे ठीक होता है? डॉक्टर से जानें हीलिंग तेज करने के 5 तरीकेहड्डी का फ्रैक्चर जल्दी कैसे ठीक होता है? डॉक्टर से जानें हीलिंग तेज करने के 5 तरीके

हड्डी टूटने यानी फ्रैक्चर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि हड्डी कितने दिनों में जुड़ेगी और रिकवरी को तेज करने के लिए क्या करना चाहिए? कई बार फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर चढ़ने के बाद लोग सोचते हैं कि अब हड्डी अपने आप ठीक हो जाएगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान आपकी डाइट, रोजमर्रा की आदतें और देखभाल भी रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं। Max Hospital Patparganj के ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, फ्रैक्चर की हीलिंग बेहतर बनाने के लिए शरीर को पर्याप्त पोषण देना और टूटी हड्डी को सही तरीके से आराम देना जरूरी है।

हड्डी का फ्रैक्चर जल्दी कैसे ठीक करें?

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, फ्रैक्चर को ठीक होने में लगने वाला समय चोट की गंभीरता, फ्रैक्चर की जगह, व्यक्ति की उम्र और उसकी सेहत पर निर्भर करता है लेकिन सही देखभाल और खान-पान से हड्डियों को ठीक होने में मदद मिल सकती है।

1. कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर डाइट लें

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दीपक अरोड़ा सलाह देते हैं कि फ्रैक्चर के बाद हड्डी को दोबारा जोड़ने और उसके आस-पास के टिश्यू की मरम्मत के लिए शरीर को पर्याप्त पोषक तत्वों की जरूरत होती है। कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी मिनरल है, जबकि प्रोटीन हड्डियों और आस-पास के टिश्यू के निर्माण और मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है।

इसके लिए अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे कैल्शियम से भरपूर फूड्स शामिल करें। वहीं, प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, अंडे और अन्य प्रोटीन युक्त फूड्स खा सकते हैं। बैलेंस डाइट लेने से शरीर को रिकवरी के लिए जरूरी पोषण मिलता है।

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2. विटामिन D के लिए धूप लें

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दीपक अरोड़ा बताते हैं कि विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इसकी कमी होने पर हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसलिए फ्रैक्चर के दौरान विटामिन D का पर्याप्त लेवल बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार धूप में समय बिता सकते हैं और जरूरत पड़ने पर विटामिन D सप्लीमेंट ले सकते हैं। हालांकि, सप्लीमेंट की खुराक व्यक्ति की जरूरत और विटामिन D के लेवल के अनुसार तय की जानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेने से बचें।

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3. पर्याप्त आराम करें

फ्रैक्चर ठीक होने के लिए टूटी हड्डी को स्थिर रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा लगाए गए प्लास्टर, ब्रेस या अन्य सहारे का सही तरीके से इस्तेमाल करें। चोटिल हिस्से पर समय से पहले वजन डालने, भारी सामान उठाने या जरूरत से ज्यादा एक्टिविटी करने से बचें। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में पूरी तरह बिस्तर पर ही रहना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सेफ एक्टिविटीज और जरूरी फिजियोथेरेपी की जा सकती है। इससे शरीर के दूसरे हिस्सों की मसल्स को कमजोर होने से बचाने में मदद मिलती है।

 

 

 

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4. स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखें

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दीपक अरोड़ा सलाह देते हैं कि धूम्रपान करने से फ्रैक्चर की हीलिंग प्रभावित हो सकती है। सिगरेट में मौजूद निकोटीन और अन्य हानिकारक पदार्थ ब्लड फ्लो और टिश्यू तक ऑक्सीजन पहुंचने की प्रोसेस को प्रभावित कर सकते हैं। इससे हड्डी जुड़ने में ज्यादा समय लग सकता है और कुछ मामलों में हड्डी के सही तरीके से न जुड़ने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए फ्रैक्चर होने पर स्मोकिंग से पूरी तरह दूरी बनाना बेहतर है। रिकवरी के दौरान तंबाकू से बचना हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

5. शरीर को हाइड्रेट रखें

पानी शरीर के सामान्य कामकाज और टिश्यू हेल्थ को बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी की जरूरत मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और व्यक्ति की सेहत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। अगर आपको किडनी या दिल से जुड़ी कोई बीमारी है और डॉक्टर ने लिक्विड सीमित रखने की सलाह दी है, तो उसी सलाह का पालन करें।

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साल 2024 में Frontiers in Immunology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, माइक्रोमूवमेंट, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड, ग्रोथ फैक्टर और पीटीएच (PTH) दवाएं हड्डी जुड़ने की स्पीड को तेज करने में सबसे असरदार साबित हो सकती हैं। चूंकि इन सभी तरीकों को आपस में मिलाने से इलाज और बेहतर हो सकता है, इसलिए इंसानों पर बड़े लेवल पर क्लिनिकल स्टडी किए जाने की जरूरत है।

निष्कर्ष

हड्डी का फ्रैक्चर जल्दी ठीक करने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर संतुलित डाइट, विटामिन D का पर्याप्त लेवल, उचित आराम, स्मोकिंग से दूरी और पर्याप्त हाइड्रेशन रिकवरी में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हड्डी को पूरी तरह जुड़ने में कितना समय लगेगा, यह फ्रैक्चर की गंभीरता और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना प्लास्टर न हटाएं, चोटिल हिस्से पर वजन न डालें और फॉलो-अप जांच जरूर करवाएं।

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FAQ

  • क्या एक्स-रे में हड्डी जुड़ने का पता चल जाता है?

    एक्स-रे से डॉक्टर हड्डी के जुड़ने की प्रोग्रेस (प्रगति) का आकलन कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार डॉक्टर अन्य जांच भी करा सकते हैं।
  • क्या फ्रैक्चर के बाद फिजियोथेरेपी कराना जरूरी है?

    कुछ फ्रैक्चर में फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है, ताकि मसल्स की ताकत, जोड़ों की मूवमेंट और सामान्य एक्टिविटीज को वापस पाने में मदद मिल सके।
  • क्या डायबिटीज होने पर फ्रैक्चर देर से ठीक होता है?

    डायबिटीज में ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहने पर हड्डियों के जुड़ने और घाव भरने की प्रोसेस प्रभावित हो सकती है। इसलिए फ्रैक्चर के दौरान ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना और नियमित जांच कराना जरूरी है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 29, 2026 13:37 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Deepak Kumar Arora