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Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

बरसात में टाइफाइड और पीलिया से रहना है सुरक्षित? आज ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलें ये 5 आदतें

बरसात में टाइफाइड और पीलिया से बचने के लिए साफ पानी पीना जरूरी है। इसके साथ ही बाहर का खाना खाने से बचें और हाथों की सफाई का भी खास ध्यान रखें। इन बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेशन भी बहुत जरूरी है। 
बरसात में टाइफाइड और पीलिया से रहना है सुरक्षित? आज ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलें ये 5 आदतेंबरसात में टाइफाइड और पीलिया से रहना है सुरक्षित? आज ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलें ये 5 आदतें

बरसात का मौसम खुद बीमारी नहीं फैलाता है, लेकिन तेज बारिश और जगह-जगह पानी भरने के दौरान सीवेज के पीने का पानी इन लाइनों में मिलने से इंफेक्शन के जोखिम को बढ़ा सकता है। टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जबकि मानसून में दूषित पानी के बाद दिखने वाला पीलिया कई बार हेपेटाइटिस ए या हेपेटाइटिस ई जैसे वायरल इंफेक्शन से जुड़ा होता है। ऐसे में आइए इस लेख में Dr Anjali Pillay, Family Physician, Inamdar Multispeciality Hospital, Pune और Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida के अनुसार, बारिश के मौसम में टाइफाइड और पीलिया से बचने के लिए आप अपने लाइफस्टाइल या खान-पान की आदतों में ये बदलाव कर सकते हैं।

बरसात में टाइफाइड और पीलिया से कैसे बचें?

साफ पानी, बेहतर हाइजीन और हाथों की सफाई टाइफाइड और पीलिया इन बीमारियों से बचाव के लिए बहुत जरूरी उपाय हैं।

1. पीने का पानी सुरक्षित रखें

Dr Anjali Pillay का कहना है कि बरसात में पानी के सोर्स सीवेज या गंदे पानी से दूषित हो सकते हैं। इसलिए, पीने और खाना बनाने के लिए सिर्फ सुरक्षित और उबले हुए पानी का इस्तेमाल करें। अगर पानी की क्वालिटी को लेकर किसी तरह का संदेह हो तो उसे अच्छी तरह उबालकर ठंडा करें। उबले हुए पानी को साफ, ढक्कन वाले बर्तन में रखें और पानी निकालते समय साफ बर्तन का इस्तेमाल करें। टाइफाइड और हेपेटाइटिस A दोनों ही बीमारियां दूषित पानी के कारण फैल सकती हैं।

साल 2009 में BMC Public Health द्वारा प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, गांव के लोग कुएं के पानी पर निर्भर रहते हैं, इसलिए जब लोगों ने बैक्टीरिया से भरपूर इस दूषित पानी का सेवन किया तो हफ्ते के अंदर 300 से ज्यादा लोगों को टाइफाइड हुआ।

2. बाहर का खाना खाते समय सावधानी बरतें

Dr. Akshay Chugh के मुताबिक, बारिश के मौसम में सड़क किनारे खुले में मिलने वाले फूड्स पर मक्खियां, धूल और दूषित पानी का असर हो सकता है। इसलिए, कटे हुए फल, खुले में रखी चटनी, सलाद, बर्फ और लंबे समय से रखा हुआ खाना खाने से बचें, खासकर जब वह साफ-सफाई के साथ न तैयार हो। ध्यान रखें कि खाना अच्छी तरह पका हो और गर्म हो। दूध और दूध से बने फूड्स भी किसी अच्छे सोर्स से ही लें।

साल 2024 में Journal of Nepal Medical Association में प्रकाशित स्टडी बताती हैं कि फेरीवालों का खाना खाने वालों में टाइफाइड होने की संभावना 10.89 गुना ज्यादा होती है। वहीं, नॉर्मल स्ट्रीट फूड खाने वालों में यह जोखिम 3.28 गुना ज्यादा पाया गया है।

3. हाथों को समय-समय पर धोएं

Dr Anjali Pillay के मुताबिक, शौचालय जाने के बाद, खाना खाने से पहले और खाना बनाने से पहले साबुन और पानी से अपने हाथों को बहुत अच्छी तरह साफ करें। छोटे बच्चों के हाथों की सफाई पर खास ध्यान रखना जरूरी है। अगर परिवार में किसी व्यक्ति को इंफेक्शन है तो उसके हाथों के हाइजीन और खाना तैयार करने से जुड़ी सावधानियों पर ध्यान देना जरूरी है। हाथों पर बैक्टीरिया होने के कारण टाइफाइड और हेपेटाइटिस A के इंफेक्शन फैलने का खतरा ज्यादा हो सकता है।

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4. फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोएं

Dr. Akshay Chugh का कहना है कि कच्चे फल और सब्जियां खाने से पहले उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। अगर मुमकिन हो तो ऐसे फल चुनें, जिन्हें छीलकर खाया जा सके। कच्चे फूड्स को उस पानी से न धोएं, जो आपको साफ न लग रहा हो। खाना तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तनों को भी साफ करें।

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5. घर और आसपास पानी जमा न होने दें

बरसात में घर के आसपास गंदा पानी जमा होने से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए, आप कूड़े को खुले में फेंकने से बचें और शौचालय या नालियों की साफ-सफाई का ध्यान रखें। पीने के पानी के बर्तन को हमेशा ढककर रखें। साफ पानी, सही सीवेज निपटने औऱ अच्छे हाइजीन का ध्यान रखें ताकि टाइफाइड या हेपेटाइटिस A से बचाव में अहम भूमिका निभाई जा सके।

6. वैक्सीनेशन के लिए डॉक्टर से सलाह लें

Dr Anjali Pillay का कहना है कि टाइफाइड से बचाव के लिए सही वैक्सीनेशन मौजूद हैं और WHO टाइफाइड-प्रभावित इलाकों में टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन को जरूरी रोकथाम उपाय मानता है। हेपेटाइटिस A से बचाव के लिए भी सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन मौजूद है। इसलिए, अपनी उम्र, स्वास्थ्य और स्थानीय जोखिम के अनुसार कौन-सी वैक्सीन जरूरी है, इस बारे में डॉक्टर से पूछें। ध्यान रहे, वैक्सीनेशन के बाद भी खाने को साफ-सफाई से बनाना और साफ पानी पीना बहुत जरूरी है।

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डॉक्टर से कब मिलें?

Dr Anjali Pillay के अनुसार, हेपेटाइटिस A या टाइफाइड के संकेतों को नजरअंदाज करना आपकी सेहत को बदतर बना सकता है। इसलिए, अगर आपको लगातार तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, पेट दर्द, दस्त या कब्ज हो तो यह टाइफाइड के लक्षण हो सकते हैं। दूसरी ओर, आंखों या स्किन का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, भूख कम होना, मतली और ज्यादा थकान पीलिया या हेपेटाइटिस का संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों के नजर आने पर खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना सही नहीं है। इस स्थिति में डॉक्टर से सही जांच और बीमारी का पता लगने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

बरसात में टाइफाइड और पीलिया होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे बचने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं। साफ पानी पीना, खाना अच्छी तरह पकाकर खाना, खुले में मिलने वाले फूड्स से बचना और साबुन से हाथ धोना जरूरी है। इसके साथ ही, जरूरत के अनुसार, टाइफाइड और हेपेटाइटिस A के वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या टाइफाइड और पीलिया एक साथ हो सकते हैं?

    हां, टाइफाइड और पीलिया एक साथ हो सकते हैं। टाइफाइड फैलाने वाला बैक्टीरिया जब ब्लड के जरिए लिवर तक पहुंचता है, तो वहां सूजन और इंफेक्शन पैदा हो सकता है।
  • पीलिया में कितने दिन बुखार रहता है?

    पीलिया में शुरुआती दिनों में आमतौर पर 3 से 5 दिन तक हल्का बुखार रहता है। जैसे-जैसे बुखार उतरने लगता है, आंखों और स्किन का पीलापन बढ़ना शुरू होता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 15, 2026 15:02 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh