Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

रस्‍सी कूदने से दोगुना हो जाती है फेफड़ों की क्षमता, एक्‍सपर्ट ने बताए फायदे

रस्‍सी कूदना (Skipping Rope) से वजन, तो कम होता ही है साथ ही श्वसन संबंध‍ित समस्‍याएं भी दूर होती हैं। रस्‍सी कूदने से फेफड़ों की क्षमता बेहतर होती है और शरीर को बीमार‍ियों से बचने में मदद म‍िलती है।

बचपन में मुझे रस्‍सी कूदने काबहुत शौक था। मां भी मेरे साथ रस्‍सी कूदना पसंद करती थीं। हम रोज शाम को बगीचे में जाते थे और कभी दौड़ना तो कभी रस्‍सी कूदने का अभ्‍यास करते थे। मां कहती थीं रस्‍सी कूदना सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है। कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है क‍ि रस्‍सी कूदने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ जाती है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ने से सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है, स्‍टैम‍िना बढ़ता है और इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है। अगर शरीर में बेहतर ऑक्‍सीजन सप्‍लाई होगी, तो स्‍ट्रेस और एंग्‍जाइटी जैसी मानस‍िक समस्‍याएं भी दूर होंगी। फेफड़ों की क्षमता बेहतर होगी, तो अस्‍थमा या सांस की बीमारी का खतरा भी कम होता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेड‍िस‍िन के शोध के मुताब‍िक, ज‍िन मह‍िलाओं ने लगातार चार हफ्तों तक रस्‍सी कूदने का अभ्‍यास क‍िया उनके फेफड़ों की क्षमता और श्वसन क्षमता दोनों में सुधार देखा गया। इस कसरत से कार्ड‍ियो और रेस्‍प‍िरेटरी स‍िस्‍टम दोनों में सक्र‍ियता देखी गई। इस लेख में जानेंगे क‍ि फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने के ल‍िए रस्‍सी कूदना (Skipping Rope) क्‍यों फायदेमंद है? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।

रस्‍सी कूदने से हार्ट और फेफड़ों की सेहत बेहतर होती है

Fitness Coach Payal Asthana ने बताया क‍ि रस्‍सी कूदना सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है। इससे फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने में मदद म‍िलती है। जब हम रस्‍सी कूदते हैं, तो फेफड़े ज्‍यादा हवा खींचते और छोड़ते हैं। इस प्रक्र‍िया से शरीर को ज्‍यादा ऑक्‍सीजन म‍िलती है। साथ ही रस्‍सी कूदना एक तरह का कार्डि‍यो वर्कआउट भी है, तो इससे हार्ट की मसल्‍स भी एक्‍ट‍िव रहती हैं और द‍िल की बीमार‍ियों का खतरा भी घटता है।

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एनर्जी बढ़ेगी और थकान कम होगी

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रस्‍सी कूदने से श्वसन मांसपेश‍ियां मजबूत होती हैं। ज‍िन लोगों की कम काम करने के बाद भी सांस फूल जाती है उन्‍हें यह फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी करनी चाह‍िए। Fitness Coach Payal Asthana ने बताया क‍ि रस्‍सी कूदने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है, तो ब्‍लड में ऑक्‍सीजन तेजी से पहुंचता है और सभी अंगों को पोषण म‍िलता है। जब शरीर की ऑक्‍सीजन सप्‍लाई बेहतर होगी, तो एनर्जी लेवल भी अच्‍छा रहेगा और शरीर जल्‍दी थकेगा नहीं। न‍ियम‍ित रस्‍सी कूदने से ब्‍लड सर्कुलेशन सुधरता है और शरीर के रोगों से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होती है।

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हफ्ते में 5 से 6 बार 15 म‍िनट के ल‍िए रस्‍सी कूदें

वैसे तो रस्‍सी कूदना फायदेमंद है, लेक‍िन अगर आपके घुटने में, टखनों या पीठ में दर्द है, तो रस्‍सी कूदने से बचें। अगर आप रस्‍सी कूदने की शुरुआत कर रहे हैं, तो पांच से 10 म‍िनट ही करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। हफ्ते में पांच से छह बार 15 से 20 म‍िनट के ल‍िए रस्‍सी कूदना फायदेमंद होता है। रस्‍सी कूदते समय सही जूते पहनें और वार्म अप करना न भूलें।

न‍िष्‍कर्ष:

रस्‍सी कूदने से थकान कम होती है, शरीर की एनर्जी बढ़ती है, हार्ट ड‍िजीज और अन्‍य बीमार‍ियों का खतरा कम होता है। शरीर की ऑक्‍सीजन सप्‍लाई बेहतर होती है और श्वसन मांसपेश‍ियां मजबूत होती हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 30, 2026 13:33 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 30, 2026 13:33 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Payal Asthana

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