आज के समय में ज्यादातर लोग हाई ब्लड शुगर की समस्या से परेशान रहते हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर के अनियंत्रित रहने पर यह शरीर के जरूरी अंगों पर धीरे-धीरे बुरा असर पड़ने लगता है। इनमें आंखों भी शामिल हैं। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने पर व्यक्ति की आंखें और इनस जुड़ी नसें कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में आइए इस बारे में हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्णा मोहन रेड्डी (Dr. G. Krishna Mohan Reddy, Senior Consultant Physician and Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad) से जानें।
हाई ब्लड शुगर से स्वास्थ्य होता है प्रभावित
डॉ. जी. कृष्णा के अनुसार, हाई ब्लड शुगर का असर सिर्फ दिल, किडनी या नसों पर ही नहीं पड़ता है। यह धीरे-धीरे आंखों की छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स (blood vessels) को भी नुकसान पहुंचा सकता है। आंखों में होने वाला नुकसान शुरुआत में किसी दर्द या साफ लक्षण के बिना बढ़ सकता है। ऐसे में समय पर जांच और सही देखभाल से आंखों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
हाई ब्लड शुगर आंखों को कैसे प्रभावित करता है?
डॉ. जी. कृष्णा बताते हैं, आंख के पीछे मौजूद रेटिना एक बेहद सेंसिटिव लेयर होती है, जो देखने की प्रक्रिया में मदद करती है। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स को कमजोर कर सकता है। इसके कारण इन ब्लड वेसल्स से लिक्विड जमा होने या खून का रिसाव हो सकता है, कुछ रक्त वाहिकाएं बंद हो सकती हैं और कुछ मामलों में नई लेकिन असामान्य रक्त वाहिकाएं बनने लगती हैं। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी (diabetic retinopathy) कहा जाता है। अगर समय पर इसका पता न चले और इलाज न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती है।
साल 2013 में investigative ophthalmology & visual science journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ब्लड शुगर का बढ़ा होना (हाइपरग्लाइसीमिया) हमारी आंखों को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण आंख के सामने वाले हिस्से (जिसे कॉर्निया कहते हैं) में इसकी वजह से डायबिटिक केराटोपैथी नाम की बीमारी हो सकती है। वहीं आंख के पिछले हिस्से (रेटिना और कोरोइड) में यह सीधे या इनडायरेक्ट रूप से नसों और खून की नलिकाओं की सेल्स को खत्म कर देता है।
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आंखों से जुड़े किन संकेतों को न करें नजरअंदाज?
डॉ. जी. कृष्णा आगे बताते हैं, डायबिटिक रेटिनोपैथी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर इसके कोई लक्षण नहीं दिखते है, इसलिए कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक उनकी आंखों की दृष्टि प्रभावित नहीं होने लगती है। ऐसे में शुरु में सिर्फ लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है, कुछ लोगों को धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने काले-धब्बे या फ्लोटर्स (आंखों के सामने तैरते हुए धब्बे दिखने) जैसे निशान दिखना, रेटिना में सूजन आने, देखने में परेशानी या नजर कमजोर होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में यह हमेशा के लिए नजर के जाने का कारण भी बन सकती है।
CDC Diabetes के अनुसार, डायबिटिक रेटिनोपैथी के कारण व्यक्ति को आंखों में धुंधलापन होने, आंखों की रोशनी जाने, नजर में धब्बे या काले आकार दिखने और रंग पहचानने में परेशानी होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
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नियमित आंखों की जांच क्यों जरूरी है?
डॉ. जी. कृष्णा बताते हैं, डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए, चाहे उस व्यक्ति की नजर नॉर्मल ही क्यों न लग रही हो। साल में कम से कम एक बार आंखों की पूरी डाइलेटेड जांच कराने से रेटिना में होने वाले शुरुआती बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। जल्दी पहचान होने पर सही इलाज शुरू किया जा सकता है, जिससे नजर को नुकसान होने या अंधेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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डायबिटिक रेटिनोपैथी से राहत के लिए इलाज
डॉ. जी. कृष्णा आगे बताते हैं, डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। सबसे पहला और जरूरी कदम ब्लड शुगर को सख्ती से नियंत्रित रखना है। अगर बीमारी ज्यादा गंभीर हो चुकी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेजर थेरेपी, आंखों में दवा के इंजेक्शन या जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जा सकती है। समय पर इलाज शुरू होने से आंखों को ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
साल 2013 में investigative ophthalmology & visual science journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, इस नुकसान से बचने का सबसे सीधा इलाज यही है कि मरीज दवाइयों और सही परहेज की मदद से अपने ब्लड शुगर लेवल को हमेशा कंट्रोल में रखे।
आंखों को सेफ रखने के लिए क्या करें?
डॉ. जी. कृष्णा बताते हैं, डायबिटीज होने पर कुछ अच्छी आदतें आंखों को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें, साथ ही ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखें। नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटीज करें, स्मोकिंग से बचें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें। इन आसान उपायों को अपनाने से आंखों से जुड़ी परेशानियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
हाई ब्लड शुगर शरीर के अंगों के साथ-साथ यह आंखों की रोशनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग पहचान नहीं पाते हैं। ऐसे में हाई ब्लड शुगर के मरीजों को आंखों को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने की कोशिश करनी चाहिए। आंखों से जुड़ी समस्या की समय से जांच कराने से इनको लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ध्यान रहे, आंखों से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
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FAQ
हाई ब्लड शुगर के क्या लक्षण है?
ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने पर व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने, अधिक भूख लगने, ज्यादा प्यास लगने, वजन कम होने, लगातार थकान रहने, धुंधला दिखने और घाव के धीरे-धीरे बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।आंखों के कमजोर होने के लक्षण?
आंखों के कमजोर होने पर व्यक्ति को धुंधला दिखने, स्क्रीन देखने या पढ़ने के दौरान सिरदर्द होने, रात को देखने में परेशानी होने, आंखों को सिकोड़ने, आंखों से पानी आने, आंखों में थकान होने, डबल विजन दिखने, आंखों के ड्राई होने आंखों में जलन होने या खुजली होने की समस्या हो सकती है।
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Jul 29, 2026 10:50 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. G. Krishna Mohan Reddy
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