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बार-बार डाइटिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है? जानें एक्सपर्ट से

बार-बार डाइटिंग करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है, विशेषकर मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है। यहां तक कि बार-बार डाइटिंग की वजह से मेटाबॉलिज्म को स्थाई रूप से नुकसान पहुंच सकता है। ऐसा क्यों होता है, समझने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

अक्सर लोग वजन कम करने के लिए डाइटिंग करते हैं और जैसे ही थोड़ा वजन कम होता है, डाइटिंग छोड़ देते हैं। इसी तरह, कुछ समय बाद बढ़ते वजन की चिंता सताने लगती है, तो एक बार फिर डाइटिंग करने लगते हैं। हालांकि, वजन कम करने के लिए बार-बार डाइटिंग करना सबसे आसान तरीका लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार-बार डाइटिंग करने से आपके मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ सकता है? जी, हां! यह सच है। आइए, नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Consultant – Gastroenterology डॉ. क्षितिज शरण जानते हैं कि बार-बार डाइटिंग से मेटाबॉलिज्म कैसे प्रभावित होता है?

बार-बार डाइटिंग का मेटाबॉलिज्म पर असर

how does repeated dieting affect metabolism over time explains expert inside-10

लीन मसल्स को नुकसान

बार-बार डाइटिंग करने से लीन मसल्स को भारी नुकसान होने लगता है। असल में बिना सही प्रोटीन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के डाइटिंग करने से अक्सर मांसपेशियां घटने लगती हैं। चूंकि मांसपेशियां शरीर में बहुत एक्टिव होती हैं और फैट के मुकाबले अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न करती हैं। इसलिए मसल्स कम होने से मेटाबॉलिज्म पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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एडेप्टिव थर्मोजेनेसिस

शरीर अक्सर खुद को स्वस्थ बनाए रखने की पुरजोर कोशिश करता है। वह तमाम वे एक्टिविटी करता है, जिससे शरीर एक्टिव रहे। इसके उलट, जब आप बार-बार डाइटिंग करते हैं, तो इसकी वजह से शरीर को लगता है कि भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में खुद को बचाए रखने के लिए ब्रेन मेटाबॉलिज्म को बहुत धीमा कर देता है ताकि कम से कम ऊर्जा की खपत हो। ऐसे में जब आप डाइटिंग छोड़ देते हैं यानी सामान्य भोजन करने लगते हैं, तो इससे पहले से धीमे हुए मेटाबॉलिज्म के कारण शरीर उस भोजन को तुरंत फैट के रूप में जमा करने लगता है

हार्मोन का असंतुलन

बार-बार डाइटिंग करने से लेप्टिन (जो पेट भरने का संकेत देता है) हार्मोन का स्तर गिर जाता है और घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोनल असंतुलन मेटाबॉलिज्म को और धीमा करता है, जिससे डाइटिंग छोड़ने के बाद व्यक्ति को पहले से ज्यादा भूख लगने लगती है। भूख बढ़ने की वजह से व्यक्ति अधिक मात्रा में खाना खाता है, जिससे वजन दुगनी रफ्तार से बढ़ने लगता है

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निष्कर्ष

बार-बार डाइटिंग किया जाना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। इसका मेटबाॅलिज्म पर भी बुरा असर पड़ता है यानी मेटाबॉलिज्म को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो बार-बार डाइटिंग न करें। अपनी डाइट को बैलेंस्ड रखें और नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (मांसपेशियां बचाने के लिए) करें। साथ ही, हमेशा वजन धीरे-धीरे कम करने पर अधिक जोर दें। क्रैश डाइटिंग स्वास्थ्य को कई मायनों में नुकसान पहुंचा सकती है।

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FAQ

  • क्या क्रैश डाइटिंग से धीमा हुआ मेटाबॉलिज्म कभी ठीक हो सकता है?

    हां, क्रैश डाइटिंग न करें। अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लें और दिनभर में भारी भोजन के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाएं।
  • मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर क्या संकेत नजर आते हैं?

    बहुत कम खाने के बावजूद वजन का न घटना या तेजी से बढ़ना, हर समय थकान महसूस करना और बालों का झड़ना इसके मुख्य संकेत हो सकते हैं।
  • मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचाए बिना वजन कैसे घटाएं?

    अपनी डाइट को बैलेंस्ड रखें, प्रोटीन की सही मात्रा लें और एक्सपर्ट की सलाह पर विशेष किस्म के वर्कआउट करें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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