वर्तमान में बढ़ता प्रदूषण, तनाव और खराब लाइफस्टाइल हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता को लगातार कमजोर कर रहे हैं। सांस से जुड़ी समस्याओं और कम स्टैमिना से बचने के लिए श्वसन तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है। फेफड़ों को मजबूत करने के लिए कई लोग योग और प्राणायाम करते हैं। Dr. Deepak Prajapat, Pulmonologist, Metro Heart Institute, Noida का कहना है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने और गलत तरीके से बैठने से फेफड़े अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इसलिए, अगर आप रोजाना की भागदौड़ से सिर्फ 10 मिनट निकालकर प्राणायाम करते हैं तो यह आपके फेफड़ों की सेहत में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।
रोजाना 10 मिनट प्राणायाम करने से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है?
Dr. Deepak Prajapat के अनुसार, जब आप गहरी सांस लेने और छोड़ने के एक्सरसाइज जैसे अनुलोम-विलोम, कपालभाति, या भ्रामरी करते हैं, तो फेफड़ों के अंदर शारीरिक स्तर पर कई सकारात्मक बदलाव होते हैं-
1. फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ना
सामान्य दिनों में हम उथली सांसें लेते हैं, जिससे फेफड़ों का सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल में आता है और बाकी हिस्सों की हवा अंदर ही रुकी रहती है। प्राणायाम के दौरान गहरी सांस लेने से फेफड़ों की हर एक वायु थैली पूरी तरह से फूलती है और ऑक्सीजन पाती है। नियमित रूप से प्राणायाम का अभ्यास करने से फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता यानी वाइटल कैपेसिटी तेजी से बढ़ती है।
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2. डायाफ्राम मजबूत होना
डायाफ्राम फेफड़ों के ठीक नीचे मौजूद एक सांस लेने वाली मांसपेशी है। ज्यादातर लोग सांस लेते समय अपनी छाती का इस्तेमाल करते हैं, पेट का नहीं।अनुलोम-विलोम और पेट से लंबी सांस लेने वाले प्राणायाम करने से डायाफ्राम मजबूत होता है। डायाफ्राम के मजबूत होने पर शरीर को हर सांस के साथ ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है और फेफड़ों पर बिना कारण जोर नहीं पड़ता है।
3. शरीर के सेल्स तक ऑक्सीजन का बेहतर फ्लो
जब फेफड़े मजबूत होते हैं और आप गहरी सांस लेते हैं तो खून में ऑक्सीजन का लेवल बेहतर होता है। यह ब्लड जब दिमाग और दिल सहित शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है तो आपको दिनभर तरोताजा महसूस होता है, थकान कम महसूस होती है और एनर्जी का लेवल बढ़ता है।
4. श्वसन तंत्र की सफाई
प्राणायाम के दौरान जब आप लंबे और गहरी सांसें छोड़ते हैं तो फेफड़ों में जमी हुई कार्बन डाइऑक्साइज और अन्य टॉक्सिन्स पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं। यह प्रक्रिया फेफड़ों की नेचुरल सफाई करने में मदद करती है और सर्दी-जुकाम, एलर्जी या प्रदूषण से होने वाले इंफेक्शन के जोखिम को भी कम करने में प्रभावी होती है।
5. फेफड़ों की लोच बेहतर रहना
जैसे-जैसे उम्र बढ़ने लगती है, फेफड़ों के टिश्यू कड़क होने लगते हैं, जिससे सांस फूलने की समस्या शुरू होती है। प्राणायाम करने से फेफड़ों के टिश्यू लचीले बने रहते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के साथ भी सांस लेने में आसानी होती है।
Pranayama-benefits-for-lungs
क्या कहती है स्टडी?
साल 2014 में Journal of Clinical and Diagnostic Research में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, प्राणायाम का नियमित अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता और श्वसन क्षमता में सुधार करने में फायदेमंद होता है। सही तरीके से प्राणायाम करने के दौरान सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया का रोजाना अभ्यास करने से ब्रेथ होल्डिंग टाइम, वाइटल कैपेसिटी (VC), टाइडल वॉल्यूम (TV) और पीक एक्सपायरेटरी फ्लो रेट (PEFR) में बढ़ोतरी होती है। प्राणायाम श्वसन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे फेफड़े पूरी तरह से फैल और सिकुड़ पाते हैं।
मेंटल हेल्थ के लिए रोज 10 मिनट प्राणायाम करने के फायदे
Dr. Deepak का कहना है कि फेफड़ों की सेहत का सीधा कनेक्शन हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम से होता है। प्राणायाम करने से हमारे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है, जो तनाव हार्मोन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। लंबी सांसें लेने से मन शांत होता है, एंग्जायटी कम होती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।
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फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए प्राणायाम करने के नियम
Dr. Deepak ने बताया कि अगर आप अपने फेफड़ों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें-
- सही समय और जगह चुनें- सुबह के वक्त शांत, खुली और ताजी हवा वाली जगह जैसे बालकनी या पार्क में प्राणायाम करना सबसे अच्छा होता है। खाली पेट या भोजन के कम से कम 2 से 3 घंटे बाद ही आप प्राणायाम अभ्यास करें।
- शुरुआत धीरे-धीरे करें- अगर आप पहली बार प्राणायाम करना शुरू कर रहे हैं तो सीधे जोर-जोर से सांस न लें। अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका को बहुत ही आरामदायक गति से शुरू करें।
- धैर्य रखें- फेफड़ों की ताकत रातों-रात नहीं बढ़ती है। अगर आप इसे अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाते हैं तो सिर्फ 3 से 4 हफ्तों में आपको अपनी सांस लेने की क्षमता में सुधार महसूस होने लगेगा।
- स्मोकिंग से बचें- अगर आपको स्मोकिंग करने की आदत है तो प्राणायाम के साथ-साथ इसे छोड़ना बहुत जरूरी है, वरना आपके फेफड़ों को अंदर से हुए नुकसान को ठीक करना मुमकिन नहीं हो पाएगा।
निष्कर्ष
प्राणायाम कोई साधारण योग नहीं है, बल्कि यह आपके फेफड़ों के लिए एक बेहतरीन जिम वर्कआउट की तरह है। रोजाना सिर्फ 10 मिनट अगर आप सही तरीके से प्राणायाम का अभ्यास करते हैं तो आपके फेफड़े हमेशा हेल्दी, मजबूत और बीमारी से दूर रहेंगे।
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FAQ
सुबह उठकर कौन सा व्यायाम करना चाहिए?
सुबह उठकर हल्की स्ट्रेचिंग, गर्दन और जोड़ों की हल्की मूवमेंट वाली एक्सरसाइज, सूर्य नमस्कार या 30 मिनट की हल्की वॉक करना सबसे बेहतरीन माना जाता है।प्राणायाम करने के बाद क्या नहीं करना चाहिए?
प्राणायाम करने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना, नहाना या भारी भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, प्राणायाम के बाद तुरंत किसी भारी शारीरिक गतिविधि को नहीं करना चाहिए और कम से कम 15 से 20 मिनट आराम करना चाहिए।
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Oct 24, 2026 19:27 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Deepak Prajapat
