Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट किसे नहीं करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें

हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसे खाने से शरीर को एनर्जी म‍िलती है, लेकिन हर किसी के लिए यह सही नहीं होता। कुछ हेल्थ कंडीशन में ज्यादा प्रोटीन लेना नुकसान पहुंचा सकता है। जानें किन लोगों को हाई प्रोटीन नाश्ता करने से बचना चाह‍िए?

हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट (High Protein Breakfast) हेल्दी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा है। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, शरीर को एनर्जी देता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। यही कारण है कि कई लोग सुबह के नाश्ते में अंडे, पनीर, दही, प्रोटीन शेक या दाल जैसे हाई प्रोटीन फूड्स शामिल करते हैं। वैसे सही मायने में देखा जाए, तो हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए सभी के लिए हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट सही नहीं होता है। कुछ लोगों में ज्यादा प्रोटीन का सेवन करने से पाचन खराब हो सकता है, कि‍डनी की बीमारी हो सकती है या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है या जिनका डाइजेशन कमजोर है, उन्हें प्रोटीन की मात्रा संतुलित रखना जरूरी होता है, इसलिए बिना अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझे बहुत ज्यादा प्रोटीन लेना सही नहीं माना जाता। संतुलित मात्रा में और सही तरीके से प्रोटीन का सेवन करना ही शरीर के लिए सुरक्षित और फायदेमंद होता है। इस लेख में जानेंगे क‍ि क‍िन लोगों को प्रोटीन का सेवन करने से बचना चाह‍िए।

1. ज्‍यादा एक्‍सरसाइज से पहले हाई प्रोटीन ब्रेकफास्‍ट न करें

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Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि इंटेंस एक्सरसाइज से पहले हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट नहीं करना चाह‍िए, क्योंकि प्रोटीन धीरे-धीरे पचता है। इससे एक्सरसाइज करते समय भारीपन, सुस्ती या असहजता महसूस हो सकती है। इस समय हल्के और आसानी से पचने वाले हेल्‍दी कार्बोहाइड्रेट बेहतर विकल्प होते हैं।

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2. पेट फूल रहा हो तो हाई प्रोटीन ब्रेकफास्‍ट से बचें

पेट फूलने या ब्लोटिंग की समस्या होने पर हाई प्रोटीन फूड्स लेने से पाचन कमजोर हो सकता है। इससे गैस और भारीपन बढ़ सकती है। ऐसे समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना ज्यादा हेल्‍दी माना जाता है।

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3. पाचन समस्‍या होने पर हाई प्रोटीन ब्रेकफास्‍ट न करें

अगर आपको अपच, गैस, एसिडिटी या पेट खराब है, तो हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट खाने से बचें। प्रोटीन को पचाने में ज्‍यादा समय लगता है, जिससे पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है और लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं।

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4. किडनी समस्या में हाई प्रोटीन नाश्‍ता न करें

जिन लोगों को किडनी की बीमारी है या किडनी कमजोर है, उन्हें हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट से बचना चाहिए। ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर जोर पड़ता है, क्योंकि किडनी को प्रोटीन के वेस्ट प्रोडक्ट्स को फिल्टर करना पड़ता है। इससे किडनी ज्‍यादा कमजोर हो सकती है।

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5. लिवर की बीमारी होने पर हाई प्रोटीन नाश्‍ते से बचें

लिवर शरीर में प्रोटीन को प्रोसेस करने में अहम भूमिका निभाता है। अगर लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो ज्यादा प्रोटीन लेने से लिवर पर दबाव बढ़ सकता है और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

हर व्यक्ति की उम्र, वजन, फ‍िजि‍कल एक्‍ट‍िव‍िटी का लेव और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार प्रोटीन की जरूरत अलग होती है। इसलिए संतुलित मात्रा में प्रोटीन लें और डाइट में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और हेल्दी फैट को भी शामिल करें।

निष्कर्ष:

हाई प्रोटीन ब्रेकफफास्ट कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कुछ हेल्थ कंडीशन में यह नुकसान पहुंंचाता है, इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही प्रोटीन का सेवन करना चाह‍िए।

इस लेख को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें। सेहत से जुड़ी अन्‍य जानकारी के ल‍िए पढ़ें ओनलीमायहेल्‍थ।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 25, 2026 10:05 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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