Mon Sep 14, 2026 | 09:01 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

क्‍या है माइंडफुल ईटिंग? जो वेट लॉस से लेकर बेहतर पाचन तक, सेहत को देती है ये 7 फायदे

शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए भोजन खाना काफी नहीं है, बल्‍क‍ि इसे जागरूक होकर खाना जरूरी है। इसे ही माइंडफुल ईट‍िंग कहा जाता है। इसके जर‍िए वेट लॉस करना भी आसान हो जाता है। जानें इसके अन्‍य फायदों के बारे में। 

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समय की कमी और आधुन‍िक जीवनशैली में हेल्‍दी डाइट लेना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, लेक‍िन माइंडफुल ईट‍िंग की मदद से यह संभव है। लोग अक्‍सर यह सोचते हैं क‍ि मैं हेल्‍दी डाइट लेता या लेती हूं और इसल‍िए मुझे बीमार‍ियां नहीं होंगी या डाइट का पूरा फायदा म‍िलेगा, लेक‍िन ऐसा नहीं होता। हम में से ज्‍यादातर लोग हेल्‍दी डाइट लेते हैं, लेक‍िन माइंडफुल ईट‍िंग के बारे में न जानने के कारण हेल्‍दी चीजों को खाने का भी कोई फायदा सेहत को नहीं म‍िलता है। हेल्‍दी खाने के बाद भी लोग मोटापा, गैस, अपच, ज्‍यादा बेली फैट, थकान, स्‍क‍िन प्रॉब्‍लम्‍स और हेयर फॉल जैसी समस्‍याओं का श‍िकार हो जाते हैं। गौर करें क‍ि क्‍या आप खाने के बाद हल्‍का महसूस करते हैं या द‍िनभर शरीर में एनर्जी रहती है और वजन कंट्रोल रहता है? माइंडफुट ईट‍िंग के साथ न स‍िर्फ डाइट बेहतर होती है बल्‍क‍ि उसके पूरे फायदे शरीर को म‍िलते हैं। आइए जानते हैं माइंडफुल ईट‍िंग क्‍या है और इसके क्‍या फायदे हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

माइंडफुल ईट‍िंग क्‍या है?

माइंडफुल ईट‍िंग का आसान शब्‍दों में मतलब है जागरूक होकर खाना। जब हम सोच-समझकर भोजन करते हैं, तो उसके फायदे दोगुना हो जाते हैं। माइंडफुल ईट‍िंग में खाते समय भोजन के स्वाद, खुशबू, बनावट और पेट भरने के संकेतों पर ध्यान दिया जाता है। उदाहरण के लिए, खाना खाते समय मोबाइल पर वीडियो देखने के बजाय भोजन पर ध्यान देना, हर निवाले को अच्छी तरह चबाना और यह महसूस करना कि पेट कब भर रहा है? ये माइंडफुल ईटिंग का हिस्सा हो सकते हैं।

माइंडफुल ईट‍िंग को कैसे अपनाएं?

  • जब भी आप भोजन करने बैठें, तो खुद से पूछें क‍ि क्‍या आपको सच में भूख लगी है? अगर जवाब हां हो, तो ही भोजन करें।
  • भोजन करते समय लैपटॉप, टीवी या फोन का इस्‍तेमाल करने से बचें।
  • भोजन को आराम से धीरे-धीरे चबाकर खाएं।
  • भोजन के स्वाद, खुशबू और बनावट पर ध्यान दें।
  • खाने के बाद ध्यान दें कि आपका शरीर कैसा महसूस कर रहा है?
  • खाते समय जल्दबाजी न करें।

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सेहत के ल‍िए माइंडफुल ईट‍िंग के फायदे

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1. वेट लॉस में मदद म‍िलती है

माइंडफुल ईटिंग में भूख और पेट भरने के संकेतों पर ध्यान दिया जाता है। इससे जरूरत से ज्यादा खाने और अनजाने में ज्‍यादा कैलोरी लेने से बचने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक इसे फॉलो करेंगे, तो वेट लॉस में मदद म‍िल सकती है। Harvard Medical School में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, कई स्‍टडीज में बताया गया है क‍ि वजन कम करने में माइंडफुल ईट‍िंग एक अच्‍छी आदत साब‍ित हो सकती है। इससे ब‍िंज ईट‍िंग को भी कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है।

2. पाचन बेहतर होता है

माइंडफुल ईटिंग में भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने पर ध्यान दिया जाता है। इससे जल्दबाजी में भोजन करने की आदत कम हो सकती है। इस तरह यह पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट म‍िलता है।

3. ओवरईट‍िंग से बचाव होता है

खाना खाते समय पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना माइंडफुल ईटिंग का अहम हिस्सा है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कब शरीर को पर्याप्त भोजन मिल चुका है? इस तरह ओवरईट‍िंग से बचा जा सकता है।

यह भी पढ़ें- ओवरईट‍िंग से बचने के ल‍िए भोजन से पहले हमेशा खुद से पूछें ये 3 सवाल, जवाब में छिपा है सेहत का राज

4. इमोशनल ईट‍िंग से बचाव होता है

कई बार भूख नहीं होती, लेक‍िन फ‍िर भी हम खाने लगते हैं। माइंडफुल ईटिंग खाने से पहले अपनी भावनाओं और भूख को पहचानने पर ध्यान देती है। इससे इमोशनल ईटिंग के ट्रिगर को समझने और उसे मैनेज करने में मदद मिल सकती है।

5. नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है

माइंडफुल ईटिंग की मदद से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। इससे रात में ओवरईट‍िंग से बचाव होता है ज‍िससे रात को पेट की भारीपन या असहजता से बचने में मदद मिल सकती है। इसका असर नींद पर पड़ता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।

6. ब्लड शुगर मैनेज करने में मदद म‍िलती है

माइंडफुल ईटिंग में खाद्य पदार्थों का सही चुनाव और खाने की मात्रा पर गौर क‍िया जाता है। इससे संतुलित भोजन और नियमित खाने की आदतों को अपनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डायबिटीज में यह दवा या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है, लेक‍िन इससे ब्‍लड शुगर लेवल को मैनेज करने में मदद म‍िलती है।

7. हार्ट हेल्‍थ बेहतर होती है

माइंडफुल ईट‍िंग की मदद से भोजन का चुनाव और खाने की मात्रा को तय करने में मदद म‍िलती है। इससे व्‍यक्‍त‍ि को पौष्टिक आहार लेने का बढ़ावा म‍िलता है जो हार्ट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद साब‍ित होता है और हार्ट की सेहत सुधरती है।

न‍िष्‍कर्ष:

माइंडफुल ईट‍िंग का मतलब है जागरूक होकर खाना। माइंडफुल ईट‍िंग में खाते समय भोजन के स्वाद, खुशबू, बनावट और पेट भरने के संकेतों पर ध्यान दिया जाता है। माइंडफुल ईट‍िंग की मदद से वेट लॉस करने में मदद म‍िलती है, पाचन बेहतर होता है, ओवरईट‍िंग से बचाव होता है, इमोशनल ईट‍िंग से बचाव होता है, नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है, ब्लड शुगर मैनेज करने में मदद म‍िलती है और हार्ट हेल्‍थ बेहतर होती है वगैरह। माइंडफुल ईट‍िंग को अपनाने के ल‍िए सबसे पहले व‍िचार करें क‍ि सच में भूख है या नहीं?, इसके बाद स्‍क्रीन से दूरी बनाएं, खाने के स्‍वाद, गंध, खुशबू और बनावट पर गौर करें। साथ ही, खाते समय जल्‍दबाजी न करें और आराम से खाएं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या माइंडफुल ईटिंग और डाइटिंग में क्‍या अंतर?

    डाइट‍िंग में कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन कम क‍िया जाता है या परहेज क‍िया जाता है जबक‍ि माइंडफुल ईट‍ि‍ंग में खाने के प्रत‍ि जागरूकता रखनी होती है जैसे खाना चबाकर खाना या खाने के स्‍वाद को महसूस करना वगैरह।
  • क्या माइंडफुल ईटिंग में कैलोरी काउंट की जाती है?

    माइंडफुल ईटिंग में भोजन की कैलोरी पर ध्‍यान देने के बजाय भूख और पेट भरने के संकेतों को समझने पर ध्यान दिया जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 14, 2026 19:26 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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