Fri Sep 18, 2026 | 06:42 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naresh Babbar , Senior Consultant – Internal Medicine; Medical Superintendent & Unit Head Metro RLKC Hospital & Heart Institute, Pandav Nagar, New Delhi

फ्लू वैक्सीन कब और किसे लगवानी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और जरूरी बातें

फ्लू वैक्सीन को इन्फ्लुएंजा (फ्लू)  वायरस के ख‍िलाफ सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। यह वायरस हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करता है। डॉक्‍टर से जानें फ्लू वैक्‍सीन कब और क‍िसे लगवाना चाह‍िए?
फ्लू वैक्सीन कब और किसे लगवानी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और जरूरी बातेंफ्लू वैक्सीन कब और किसे लगवानी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और जरूरी बातें

अक्‍सर लोग फ्लू या इन्फ्लुएंजा वायरस को हल्‍के में लेते हैं या सामान्‍य बुखार समझ लेते हैं, लेक‍िन आपको बता दें क‍ि यह वायरस सांस की नली को प्रभावित कर सकता है और बुखार, खांसी, गले में खराश, थकान और बदन दर्द जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। फ्लू के गंभीर मामलों में यह निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में। फ्लू वायरस हर साल बदलता रहता है, इसलिए इसका इलाज एक बड़ी चुनौती समझा जाता है। यही वजह है कि फ्लू वैक्सीन लेना बेहद जरूरी है। यह टीका शरीर की इम्‍यून‍िटी को वायरस से लड़ने में सक्षम बनाता है और गंभीर फ्लू संक्रमण से बचाव करता है। आइए जानते हैं फ्लू वैक्‍सीन क‍िसे और कब लेना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Naresh Babbar, Senior Consultant- Internal Medicine, Medical Superintendent & Unit Head At Metro RLKC Hospital & Heart Institute, New Delhi से बात की।

  फ्लू वैक्‍सीन से जुड़ी जानकारी 
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छह माह और उससे अध‍िक उम्र के बच्‍चे और वयस्‍कों को वैक्‍सीन की एक डोज लगाई जाती है।

2 ज‍िन बच्‍चों को फ्लू वैक्‍सीन नहीं लगी हो, उन्‍हें चार हफ्तों के गैप पर दो डोज, फ‍िर हर साल एक डोज दी जा सकती है। 
3 65 साल या उससे अध‍िक उम्र के बुजुर्ग भी वैक्‍सीन लगवा सकते हैं। 
4 छह माह से कम उम्र के श‍िशुओं को वैक्‍सीन नहीं लगाई जाती है। 
5 गर्भवस्‍था में फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं।

फ्लू वैक्‍सीन क‍िसे लगवाना चाह‍िए?

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  • फ्लू वैक्‍सीन छह माह से अध‍िक उम्र के बच्‍चों और वयस्‍कों को लगाई जाती है।
  • गर्भवती मह‍िलाओं को भी फ्लू वैक्‍सीन लगाई जाती है।
  • डायब‍िट‍िक मरीज।
  • क्रॉन‍िक कंडीशन वाले मरीज।
  • अर्थराइट‍िस या ऑटोइम्‍यून‍ ड‍िजीज वाले मरीज।
  • इम्‍यून‍िटी कमजोरी है या स्‍टेरॉयड ले रहे हैं।
  • 65 साल या उससे ज्‍यादा उम्र वाले बुजुर्गों को गंभीर न‍िमोन‍िया हो सकता है इसल‍िए फ्लू वैक्‍सीन लगवाना न भूलें।

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कितनी डोज लगती हैं?

  • आमतौर पर हर फ्लू सीजन में वयस्कों के ल‍िए एक डोज लेना काफी होता है।
  • 6 महीने और इससे अध‍िक उम्र के बच्‍चों को 4 हफ्ते के गैप पर दो डोज लगती है। इसके बाद हर साल एक डोज लगवा सकते हैं।
  • 6 महीने से छोटे बच्चों को फ्लू वैक्सीन नहीं दी जाती है।

फ्लू वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?

  • फ्लू वैक्सीन हर साल लगवाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि हर फ्लू सीजन में वायरस के स्ट्रेन बदल सकते हैं।
  • आमतौर पर, फ्लू का मौसम सर्दियों में आता है और इसका असर अक्टूबर से शुरू होकर फरवरी या मार्च तक रहता है। इसलिए, फ्लू वैक्सीन लगवाने का सही समय अक्टूबर या नवंबर माना जाता है।
  • वैक्सीन लगवाने के बाद इम्यून सिस्‍टम को फ्लू वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने में लगभग 2 से 3 हफ्ते का समय लगता है। इस कारण इसे फ्लू सीजन की शुरुआत से पहले लगवाना जरूरी होता है।

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क्या फ्लू वैक्सीन हर साल लगवानी पड़ती है?

हां, फ्लू वैक्सीन को आमतौर पर हर साल लगवाने की सलाह दी जाती है। इसका एक कारण यह है कि इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए हर फ्लू सीजन में फैलने वाले वायरस के अनुसार वैक्सीन की संरचना को अपडेट किया जा सकता है। इसलिए पिछले साल फ्लू वैक्सीन लगवाने का मतलब यह नहीं है कि अगले सीजन में दोबारा वैक्सीन की जरूरत नहीं होगी।

क्या फ्लू वैक्सीन लेने के बाद भी फ्लू हो सकता है?

हां, वैक्सीन लेने के बाद भी फ्लू हो सकता है। वैक्सीन पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देती और शरीर को वैक्सीन के बाद प्रतिरक्षा विकसित करने में समय लगता है। इसके अलावा, फ्लू वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन भी हो सकते हैं। अगर वैक्सीन लेने के बाद फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो आराम करें, पर्याप्त तरल लें और डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या गर्भवस्‍था में फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान फ्लू होने पर गंभीर बीमार‍ी जैसे न‍िमोन‍िया का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को फ्लू से बचाव के लिए इंजेक्शन वाली निष्क्रिय फ्लू वैक्सीन की सलाह दी जा सकती है। वैक्सीनेशन मां को सुरक्षा देने के साथ जन्म के बाद शुरुआती महीनों में बच्चे को भी कुछ सुरक्षा हद तक सुरक्षा दे सकती है।

फ्लू वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

  • फ्लू वैक्सीन लेने के बाद, इंजेक्‍शन वाले क्षेत्र में दर्द, रेडनेस या सूजन हो सकती है।
  • कुछ लोगों को हल्का बुखार, सिरदर्द, थकान या मांसपेशियों में दर्द भी महसूस हो सकता है। ये लक्षण आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाते हैं।
  • गंभीर एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया बहुत दुर्लभ होती है।

न‍िष्‍कर्ष:

छह माह और उससे अध‍िक उम्र के बच्‍चे और वयस्‍कों को फ्लू वैक्‍सीन लगाई जाती है। इसे गर्भवती मह‍िलाएं, डायब‍िट‍िक मरीज, क्रॉन‍िक कंडीशन वाले मरीज, अर्थराइट‍िस या ऑटोइम्‍यून‍ ड‍िजीज वाले मरीज, स्‍टेरॉयड वाले मरीज, कमजोर इम्‍यून‍िटी वाले मरीज, 65 साल या उससे अध‍िक उम्र के बुजुर्ग लगवा सकते हैं। फ्लू सीजन में वैक्‍सीन की एक डोज लगाई जाती है। ज‍िन बच्‍चों को वैक्‍सीन नहीं लगी हो, उन्‍हें चार हफ्तों के गैप पर दो डोज, फ‍िर हर साल एक डोज लगाई जाती है। छह माह से कम उम्र के बच्‍चों को फ्लू वैक्‍सीन नहीं लगाई जाती है। फ्लू वैक्‍सीन हर साल फ्लू सीजन से पहले लगवाने की सलाह दी जाती है।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या सर्दी-जुकाम होने पर फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं?

    हल्की सर्दी-जुकाम में फ्लू वैक्‍सीन नहीं लगाई जाती है। सर्दी-जुकाम में एंटीबायोट‍िक्‍स को डॉक्‍टर की सलाह पर ही लेना चाह‍िए। 
  • क्या फ्लू वैक्सीन लेने के बाद सर्दी-जुकाम नहीं होगा?

    फ्लू वैक्सीन सामान्य सर्दी-जुकाम से सुरक्षा नहीं देती। सर्दी-जुकाम कई अलग वायरस के कारण हो सकता है, जबकि फ्लू, इन्फ्लुएंजा वायरस से होता है। इसलिए वैक्सीन लेने के बाद भी सामान्य सर्दी-जुकाम हो सकता है।
  • फ्लू वैक्सीन की कीमत क्‍या है?

    भारत में फ्लू (इन्फ्लुएंजा) वैक्सीन की एक खुराक की कीमत आमतौर पर एक हजार से तीन हजार के बीच हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 18, 2026 17:09 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Naresh Babbar

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