Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

क्या सहजन (मोरिंगा) के पत्ते प्लेटलेट काउंट बढ़ाते हैं? एक्‍सपर्ट से जानें

कई लोग समझते हैं क‍ि मोर‍िंगा की मदद से प्‍लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद म‍िलती है। मोर‍िंगा में व‍िटाम‍िन ए, बी, सी, ई, प्रोटीन, अमीनो एस‍िड, प्रोटीन वगैरह पाए जाते हैं। जानते हैं क‍ि आख‍िर मोर‍िंगा, प्‍लेटलेट्स के ल‍िए फायदेमंंद है या नहीं।

मोरिंगा को सहजन भी कहा जाता है। मैंने करीब डेढ़ साल पहले ही मोर‍िंगा को अपनी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाया है। एक द‍िन मैं आंखोंं की जांच करवाने गई और टेस्‍ट के दौरान मुझे पता चला क‍ि मेरी आंखें कमजोर हैं और डॉक्‍टर ने मुझे मोर‍िंगा का सेवन करने के ल‍िए कहा। बस फ‍िर क्‍या था, अगले ही द‍िन से मैंने मोर‍िंगा को खाना शुरू कर द‍िया। मेरे पापा के ऑफ‍िस में मोर‍िंगा का पेड़ है ज‍िससे वह ताजे-ताजे पत्ते तोड़ लाते हैं। मोर‍िंगा सेहत के ल‍िए बेहतर फायदेमंद माना जाता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं क‍ि इसके पत्ते खाने से प्लेटलेट काउंट बढ़ता है। क्‍या वाक‍ई यह सच है? इस सवाल का जवाब आगे इस लेख से जानेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

मोर‍िंगा से हीमोग्‍लोबि‍न बढ़ता है

प्‍लेटलेट्स ब्‍लड में मौजूद छोटी कोश‍िकाओं को कहा जाता है जो क्‍लॉट‍िंग प्रक्र‍िया से ब्‍लीड‍िंग होने से रोकती हैं। कई बार डेंगू, मलेर‍िया, वायरल इंफेक्‍शन जैसी बीमारी या पोषक तत्‍वों की कमी के कारण प्‍लेटलेट्स का काउंट कम हो जाता है। International Journal Of Scientific And Research Publications (IJSRP) की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, मोर‍िंगा का सेवन करने से गर्भवती मह‍िलाओं में हीमोग्‍लोब‍िन बढ़ता हुआ नजर आया। मोर‍िंगा के सेवन से हीमोग्‍लोबि‍न के बढ़ने की दर 58 प्रत‍िशत थी। इस स्‍टडी में 64 गर्भवती मह‍िलाओं को शाम‍िल क‍िया गया था। मोरि‍ंगा में आयरन, व‍िटाम‍िन ए,सी, प्रोटीन जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं ज‍िससे रेड ब्‍लड सेल्‍स के प्रोडक्‍शन में मदद म‍िलती है।

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मोर‍िंगा प्‍लेटलेट्स ब्रेकेज घटाता है

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Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि अगर क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि के शरीर में क्रोम‍ियम जैसे हैवी मेटल मौजूद हैं और हैवी मेटल के कारण क‍िसी का प्‍लेटलेट टूट रहा है, तो मोर‍िंगा प्‍लेटलेट्स ब्रेकेज को रोकता है। साथ ही मोर‍िंगा प्‍लेटलेट्स को एक-दूसरे के साथ च‍िपकने से रोकता है। इसल‍िए प्‍लेटलेट्स काउंट्स को बूस्‍ट करने में मोर‍िंगा मदद करेगा, लेक‍िन सीधे तौर पर मोर‍िंगा का सेवन करने से प्‍लेटलेट्स काउंट नहीं बढ़ता।

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पपीते के पत्ते और गि‍लोय से बढ़ाएं प्‍लेटलेट काउंट

  • पपीते के पत्ते में कार्पेन पाया जाता है जो प्‍लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद करता है।
  • साथ ही ग‍िलोय शरीर की इम्‍यून‍िटी को मजबूत करता है और प्‍लेटलेट डैमेज से शरीर को सुरक्ष‍ित रखता है।
  • प्‍लेटलेट काउंट कम होने पर इन द‍ोनों को डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

मोर‍िंंगा का सेवन करने से प्‍लेटलेट्स काउंट सीधे तौर पर नहीं बढ़ता हालांकि‍ मोर‍िंगा की मदद से प्‍लेटलेट्स ब्रेकेज कम करने में मदद म‍िलती है। प्‍लेटलेट्स बढ़ाने के ल‍िए आप मोर‍िंगा को डाइट में शाम‍िल कर सकते हैं, लेक‍िन इससे काउंट बढ़ने में कोई खास फर्क देखा नहीं गया है।

मोर‍िंंगा पर दी गई जानकारी को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें। सेहत और न्‍यूट्र‍िशन से जुड़ी अन्‍य जानकारी के ल‍िए पढ़ें ओनलीमायहेल्‍थ।

FAQ

  • प्‍लेटलेट काउंट कम होने के लक्षण क्‍या हैं?

    प्‍लेटलेट काउंट कम होने पर मसूड़े और नाक से खून आने लगता है, छोटे घाव से लगातार खून बहता है और कमजोरी महसूस होती है। 
  • प्‍लेटलेट काउंट बढ़ाने के ल‍िए क्‍या खाएं?

    प्‍लेटलेट काउंट बढ़ाने के ल‍िए डाइट में पपीते के पत्ते, गि‍लोय, अनार, व‍िटाम‍िन के, पालक, चुकंदर वगैरह को शामि‍ल करें। 
  • प्‍लेटलेट काउंट क‍ितना होना चाह‍िए?

    एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्‍त‍ि में प्‍लेटलेट काउंट 150,000 और 400,000 प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलीटर के बीच होना चाह‍िए। काउंट कम होने पर ब्‍लीड‍िंग का खतरा बढ़ जाता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Feb 18, 2026 18:52 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 18, 2026 18:52 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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