Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Edwina Raj , Nutritionist & Dietician

क्या डेंगू में बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं? जानें एक्सपर्ट से

डेंगू में बकरी के दूध को हमेशा से बेहद फायदेमंद बताया गया है लेकिन क्या ये सच में कारगर है? विस्तार से जानकारी के लिए हमने एक्सपर्ट से भी बात की।

बरसात के मौसम में अक्सर लोग मच्छरों से परेशान रहते हैं और इस मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का डर भी ज्यादा रहता है जैसे डेंगू, मलेरिया और चिगुनिया। ये तमाम मच्छर जनित बीमारियां लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर देती हैं जैसे कि अगर बात डेंगू के मच्छर की करें तो ये बीमारी एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर की वजह से होता है। इस बीमारी में अचानक से तेज बुखार आने लगता है। साथ ही लगातार प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या होती है। इतना नहीं नहीं, तेज सिर दर्द और कई बार कमजोरी के कारण बेहोशी की स्थिति भी आ जाती है। ऐसे में सबसे ज्यादा ध्यान घटने हुए प्लेटलेट काउंट्स पर रखना होता है। इस स्थिति में लोग प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए लोग बकरी का दूध पीने का सुझाव देते हैं लेकिन, क्यों जानते हैं इस बारे में Ms. Edwina Raj, Head of Services - Clinical Nutrition & Dietetics, Aster CMI Hospital, Bangaluru से।

क्या डेंगू में बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं?

डाइटीशियन एडविना बताती हैं कि ऐसा कोई भरोसेमंद वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि बकरी का दूध डेंगू के मरीजों में सीधे तौर पर प्लेटलेट काउंट बढ़ाता है, हालांकि कभी-कभी इसे पारंपरिक घरेलू उपाय के तौर पर सुझाया जाता है। डेंगू की वजह से प्लेटलेट्स में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है और प्लेटलेट काउंट की निगरानी आम तौर पर ब्लड टेस्ट के जरिए की जानी चाहिए, न कि किसी खास खाने या पीने की चीज पर निर्भर रहकर।

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बकरी का दूध पीने का सही तरीका क्या है?

डाइटीशियन एडविना बताती हैं कि अगर डेंगू का मरीज बकरी का दूध पीना चाहता है, तो इसे सामान्य और संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। बशर्ते इसे ठीक से पाश्चराइज या उबाला गया हो और इससे पेट में कोई तकलीफ न हो। पर ध्यान रखें कि इसे पानी, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन, सूप या दूसरे सही ड्रिंक्स जैसे तरल पदार्थों की जगह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि डिहाइड्रेशन से बचाव डेंगू के इलाज का एक अहम हिस्सा है।

Indian Medical Association स्टडी जर्नल में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि मॉडर्न मेडिसिन में ऐसी कोई साइंटिफिक स्टडी नहीं है जो यह कहे कि बकरी का दूध एंडोथेलियल डिसफंक्शन को ठीक करता है। अगर इससे कोई फायदा होता भी है, तो वह सिर्फ इसलिए हो सकता है क्योंकि यह एक लिक्विड है, न कि इसलिए कि यह बकरी का दूध है।

बकरी के कच्चे दूध में साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणु हो सकते हैं, जिनसे खाने से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं और इंसान बहुत बीमार पड़ सकता है। कच्चा दूध वह दूध होता है जिसे खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए पाश्चराइज नहीं किया गया हो।

dengue

साथ ही इस शोध में बताया गया है कि कच्चा बकरी का दूध पीने से ब्रूसेलोसिस भी हो सकता है। Clinical Case Reports में ये बताया गया है कि बकरी के दूध की वजह से डेंगू में को-इन्फेक्शन हो सकता है या क्रॉस-रिएक्टिविटी की वजह से दिक्कत हो सकती है लेकिन आयुर्वेद में इसे फायदेमंद बताया गया।

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बकरी का दूध पीने के फायदे

Food Science ans Nutrition जर्नल में प्रकाशित शोध की मानें तो बकरी के दूध में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है । इस स्टडी में बकरी का दूध पीने के तमाम फायदे के बारे में बताया गया है। बकरी के दूध के प्रोटीन अपने न्यूट्रिशनल और फंक्शनल गुणों के कारण खास होते हैं और हाल के सालों में ये काफी लोकप्रिय हुए हैं। इन प्रोटीनों को निकालने और अलग करने के लिए कई तरीकों पर रिसर्च की गई है, जिनमें

-बकरी के दूध के प्रोटीन में ट्रिप्टोफैन और सिस्टीन जैसे कुछ अमीनो एसिड ज्यादा मात्रा में होते हैं जो कि सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इससे डेंगू में शरीर को ताकत मिलती है और रिकवरी आसान बन जाता है।

- रिसर्च से पता चला है कि बकरी के दूध के प्रोटीन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसे कि इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने वाले प्रभाव (immunomodulatory effects), एलर्जी को कंट्रोल करना, सूजन कम करने वाले (anti-inflammatory) और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव, साथ ही एंटीमाइक्रोबियल और एंटीकैंसर गुण।

-इसके साइटोकिन्स और इम्यून सिस्टम के अन्य घटकों के उत्पादन को नियंत्रित करने की क्षमता के कारण, इनका इस्तेमाल ऑटोइम्यून बीमारियों, एलर्जी और इम्यून सिस्टम से जुड़ी अन्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जा सकता है।

-इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण भी होता है। ये आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोटा के लिए बेहद फायदेमंद है।

निष्कर्ष:

अंत में डाइटीशियन एडविना बताती हैं कि डेंगू के दौरान मुख्य ध्यान पर्याप्त तरल पदार्थ, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन, भरपूर आराम, नियमित मेडिकल जांच और प्लेटलेट काउंट व अन्य ब्लड पैरामीटर्स की निगरानी पर होना चाहिए। साथ ही, अगर मरीजों में गंभीर पेट दर्द, बार-बार उल्टी, ब्लीडिंग, असामान्य नींद या बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ या प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे चेतावनी वाले लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

FAQ

  • बकरी के दूध का साइड इफेक्ट क्या है?

    बकरी के दूध के कई नुकसान भी हैं जैसे कि बकरी के कच्चे दूध में साल्मोनेला, ई. कोलाई इंफेक्शन हो सकता है।
  • 1 दिन में बकरी का दूध कितना पीना चाहिए?

    1 दिन में लगभग 1 से 2 कप ही बकरी का दूध पिएं। डाइटीशियन एडविना बताती हैं कि ज्यादा बकरी का दूध पीना कई बार नुकसानदेह हो सकता है।

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Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 12, 2026 16:48 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Edwina Raj

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